स्वयं सहायता समूह — ग्रामीण महिलाओं के छोटे समूह जो बचत एकत्र करते और एक-दूसरे को ऋण देते हैं — DAY-NRLM के तहत बड़े पैमाने पर बढ़े, कुछ करोड़ सदस्यों से ~91 लाख समूहों में 10 करोड़ से अधिक महिलाओं तक।
महिला सशक्तिकरण और स्वयं सहायता समूह
भारत की सबसे शांत क्रांतियों में से एक महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) का उदय है। DAY-NRLM के तहत, SHG में ग्रामीण महिलाओं की संख्या कुछ करोड़ से बढ़कर ~91 लाख समूहों में 10 करोड़ से अधिक हुई — छोटे बचत-व-ऋण समूह जो सदस्यों को ऋण देते और उद्यम चलाते हैं। लखपति दीदी अभियान उनमें से 3 करोड़ को साल में ₹1 लाख से अधिक कमाने का लक्ष्य रखता है, और 'ड्रोन दीदी' अब कृषि-ड्रोन उड़ाती हैं। काउंटर SHG में जुटाई गई महिलाएँ दिखाता है।

| वर्ष | Women in SHGs |
|---|---|
| 2014 | 3 crore |
| 2015 | 3 crore |
| 2016 | 4 crore |
| 2017 | 5 crore |
| 2018 | 6 crore |
| 2019 | 7 crore |
| 2020 | 7 crore |
| 2021 | 8 crore |
| 2022 | 9 crore |
| 2023 | 9 crore |
| 2024 | 10 crore |
| 2025 | 10 crore |
यह क्यों मायने रखता है SHG ग्रामीण महिलाओं को आय, ऋण, आत्मविश्वास और राजनीतिक आवाज़ देते हैं — ज़मीनी महिला सशक्तिकरण के सबसे प्रभावी इंजनों में से एक।
- SHG में महिलाएँ: ~2.5 करोड़ → ~10 करोड़; ~91 लाख SHG
- लखपति दीदी लक्ष्य 3 करोड़; ₹9.7 लाख करोड़ SHG ऋण
- स्रोत: DAY-NRLM




इतिहास
लखपति व ड्रोन दीदी
SHG अब ~₹9.7 लाख करोड़ के बैंक ऋण तक पहुँचते हैं। लखपति दीदी अभियान 3 करोड़ महिलाओं को साल में ₹1 लाख से अधिक कमाने का लक्ष्य रखता है, और 'ड्रोन दीदी' शुल्क पर कृषि ड्रोन उड़ाने के लिए प्रशिक्षित हैं — सदस्यों को उद्यमी बनाते हुए।
यह कैसे काम करता है
मॉडल है स्वयं सहायता समूह (SHG) — 10-20 महिलाएं जो छोटी बचत जमा करतीं, एक-दूसरे को उधार देतीं, और समय के साथ कम दर पर बैंक ऋण से जुड़ती हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत, लाखों समूह गांव व ब्लॉक संगठनों में संघबद्ध होते हैं, ग़रीब ग्रामीण महिलाओं को सामूहिक शक्ति, ऋण इतिहास व उद्यम का रास्ता देते हुए — डेयरी से ड्रोन तक।
आगे की राह
लगभग 10 करोड़ महिलाएं अब लगभग 90 लाख SHG में हैं — दुनिया के सबसे बड़े नेटवर्कों में से एक। प्रमुख लक्ष्य हैं लखपति दीदी (महिलाओं को एक वर्ष में ₹1 लाख+ कमाने में मदद, लगभग 3 करोड़ तक पहुंचे) और नमो ड्रोन दीदी (कृषि-ड्रोन महिलाओं के हाथ में)। असली परीक्षा पैमाना व टिकाऊपन है — बचत समूहों को स्थायी व्यवसाय बनाना, और सदस्यों को निर्वाह से वास्तविक समृद्धि तक ले जाना।
आगे का रास्ता
असली परीक्षा पैमाना व स्थायित्व है — सदस्यता को स्थिर, बढ़ती आजीविका में बदलना, राज्यों में बेहतर प्रशिक्षण, बाज़ार पहुँच व ऋण के साथ।
आँकड़ों में
SHG में महिलाएँ ~2.5 करोड़ → ~10 करोड़; ~91 लाख समूह; ₹9.7 लाख करोड़ ऋण; लखपति दीदी लक्ष्य 3 करोड़। स्रोत: DAY-NRLM।
स्रोत: DAY-NRLM / Ministry of Rural Development — women mobilised into SHGs (crore), 2014–2025.