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तीन तलाक़ क़ानून

तीन तलाक़ क़ानून

तलाक़-ए-बिद्दत, यानी तात्कालिक तीन तलाक़, में पति तीन बार तलाक़ बोलकर तुरंत और अपरिवर्तनीय रूप से विवाह समाप्त कर सकता था। 22 अगस्त 2017 को सर्वोच्च न्यायालय ने 3:2 के बहुमत से इस प्रथा को निरस्त किया। सितंबर 2018 से जारी अध्यादेशों ने इस निर्णय को क़ानूनी बल दिया, और संसद ने जुलाई 2019 में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम पारित किया, जो 19 सितंबर 2018 से प्रभावी है। अधिनियम तात्कालिक तीन तलाक़ को शून्य और अवैध घोषित करता है, इसे 3 वर्ष तक के कारावास और जुर्माने से दंडनीय बनाता है, और महिला को निर्वाह भत्ता तथा बच्चों की अभिरक्षा का अधिकार देता है।

नई दिल्ली में भारत का सर्वोच्च न्यायालय और उसके सामने का उद्यान।
नई दिल्ली में भारत का सर्वोच्च न्यायालय और उसके सामने का उद्यान। · Pinaki1983 · CC BY-SA 4.0 · Wikimedia Commons
3:2
तात्कालिक तीन तलाक़ निरस्त करने वाला सर्वोच्च न्यायालय का बहुमत (22 अगस्त 2017)
3 years
अधिकतम कारावास, जुर्माने सहित (अधिनियम 19 सितंबर 2018 से प्रभावी)
About 82%
अल्पसंख्यक कार्य मंत्री द्वारा बताई गई मामलों में गिरावट (31 जुलाई 2020)
संसद से पारित अधिनियम (19 सितंबर 2018 से प्रभावी)
2017
सर्वोच्च न्यायालय ने तात्कालिक तीन तलाक़ निरस्त किया
22 अगस्त 2017 को शायरा बानो बनाम भारत संघ मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने 3:2 के बहुमत से तलाक़-ए-बिद्दत (तात्कालिक तीन तलाक़) की प्रथा को निरस्त कर दिया।
2017
संसद में विधेयक पेश
28 दिसंबर 2017 को संसद में विधेयक पेश किया गया। PIB की एक ई-पुस्तिका के अनुसार, निर्णय से उस तिथि तक तात्कालिक तीन तलाक़ के लगभग 100 मामले सामने आए।
2018
पहला अध्यादेश जारी
2019
2019 का दूसरा अध्यादेश
2019
संसद ने अधिनियम पारित किया
2020
मंत्री ने मामलों में गिरावट बताई
2021
मुस्लिम महिला अधिकार दिवस
2017
2उपलब्धियाँ
20172021
नवीनतम
संसद में विधेयक पेश
28 दिसंबर 2017 को संसद में विधेयक पेश किया गया। PIB की एक ई-पुस्तिका के अनुसार, निर्णय से उस तिथि तक तात्कालिक तीन तलाक़ के लगभग 100 मामले सामने आए।

यह क्यों मायने रखता है सरकार के अनुसार, 2017 के निर्णय के बाद भी यह प्रथा जारी रखने वालों को दंडित करने या प्रभावित महिलाओं को उपाय देने वाला कोई क़ानून नहीं था। अधिनियम महिला को पुलिस और अदालत तक जाने, अपने और आश्रित बच्चों के लिए निर्वाह भत्ता माँगने और नाबालिग बच्चों की अभिरक्षा का अधिकार देता है। मजिस्ट्रेट द्वारा महिला की सुनवाई के बाद ही पति को ज़मानत दी जा सकती है।

  • 22 अगस्त 2017: सर्वोच्च न्यायालय ने शायरा बानो बनाम भारत संघ मामले में 3:2 के बहुमत से तात्कालिक तीन तलाक़ निरस्त किया।
  • 19 सितंबर 2018: पहला अध्यादेश जारी हुआ; 2019 का अधिनियम बाद में इसी तिथि से प्रभावी हुआ।
  • 25 और 30 जुलाई 2019: लोकसभा और राज्यसभा ने मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2019 पारित किया।
  • 12 जून 2019: मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत विधेयक में यह अपराध तब संज्ञेय बनाया गया जब सूचना महिला या उसके रक्त या विवाह संबंधी रिश्तेदार दें, और मजिस्ट्रेट की अनुमति से महिला के कहने पर शमनीय।
  • 31 जुलाई 2020: अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख़्तार अब्बास नक़वी ने कहा कि क़ानून पारित होने के बाद के एक वर्ष में मामलों में लगभग 82 प्रतिशत की कमी आई।

इतिहास

तलाक़-ए-बिद्दत में पति तीन बार तलाक़ बोलकर पत्नी को तुरंत और अपरिवर्तनीय रूप से तलाक़ दे सकता था। 22 अगस्त 2017 को शायरा बानो बनाम भारत संघ मामले में सर्वोच्च न्यायालय के पाँच न्यायाधीशों ने 3:2 के बहुमत से इस प्रथा को निरस्त किया। PIB की एक ई-पुस्तिका के अनुसार, निर्णय से 28 दिसंबर 2017 तक, जब संसद में विधेयक पेश हुआ, लगभग 100 मामले फिर भी सामने आए।

उल्लेखनीय उपलब्धि

मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अध्यादेश, 2018 19 सितंबर 2018 को जारी हुआ, और इसके बाद दो और अध्यादेश आए, जिनमें अंतिम 21 फ़रवरी 2019 को। मंत्रिमंडल ने 12 जून 2019 को नए विधेयक को मंज़ूरी दी। लोकसभा ने इसे 25 जुलाई 2019 को और राज्यसभा ने 30 जुलाई 2019 को पारित किया। राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद अधिनियम 19 सितंबर 2018 से भूतलक्षी प्रभाव से लागू हुआ।

यह कैसे काम करता है

अधिनियम तात्कालिक तीन तलाक़ को शून्य और अवैध घोषित करता है और इसे 3 वर्ष तक के कारावास और जुर्माने से दंडनीय बनाता है। महिला को अपने और आश्रित बच्चों के लिए निर्वाह भत्ता तथा नाबालिग बच्चों की अभिरक्षा का अधिकार है। जून 2019 में मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत विधेयक के अनुसार, जब महिला या उसके रक्त या विवाह संबंधी रिश्तेदार पुलिस को सूचना दें तो अपराध संज्ञेय है, और मजिस्ट्रेट की अनुमति से महिला के कहने पर इसका शमन हो सकता है। पति को ज़मानत पर छोड़ने से पहले मजिस्ट्रेट को महिला की सुनवाई करनी होगी।

आगे की राह

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने 1 अगस्त को मुस्लिम महिला अधिकार दिवस के रूप में मनाया है, जिसके कार्यक्रम 31 जुलाई 2020 और 1 अगस्त 2021 को हुए। 2020 के कार्यक्रम में मंत्री मुख़्तार अब्बास नक़वी ने कहा कि क़ानून पारित होने के बाद के एक वर्ष में मामलों में लगभग 82 प्रतिशत की गिरावट आई। 2021 में उन्होंने कोई आँकड़ा दिए बिना उल्लेखनीय गिरावट की बात कही। ये मंत्रिस्तरीय वक्तव्य हैं; यहाँ उद्धृत विज्ञप्तियाँ अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की कोई संख्या नहीं देतीं।

आँकड़ों में

सर्वोच्च न्यायालय का 3:2 बहुमत (22 अगस्त 2017)। निर्णय से 28 दिसंबर 2017 तक लगभग 100 मामले। 3 अध्यादेश, पहला 19 सितंबर 2018 को। विधेयक लोकसभा से 25 जुलाई 2019 और राज्यसभा से 30 जुलाई 2019 को पारित। 3 वर्ष तक कारावास और जुर्माना। मामलों में लगभग 82% गिरावट, अल्पसंख्यक कार्य मंत्री के अनुसार (31 जुलाई 2020)। स्रोत: भारत का सर्वोच्च न्यायालय; विधि एवं न्याय, गृह और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, PIB के माध्यम से।

आँकड़े इस तिथि तक: 2017 से 2021

स्रोत: भारत का सर्वोच्च न्यायालय; विधि एवं न्याय, गृह और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, PIB के माध्यम से। तात्कालिक तीन तलाक़ से जुड़े क़ानून की टाइमलाइन, 2017 से 2021: 22 अगस्त 2017 का सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय, 2018 और 2019 के अध्यादेश, जुलाई 2019 में संसद से पारित अधिनियम और बाद के मंत्रिस्तरीय वक्तव्य। शीर्ष आँकड़ा और अधिनियम के मुख्य प्रावधान इस अधिनियम पर PIB की ई-पुस्तिका से हैं (लिंक)। · लिंक