भारत के 10.45 करोड़ जनजातीय (अनुसूचित जनजाति) नागरिक ऐतिहासिक रूप से स्वास्थ्य, शिक्षा व भूमि अधिकारों पर पिछड़े रहे हैं। हाल की नीति ने उन अंतरालों को पाटने के लिए लक्षित स्कूल, मान्यता व अंतिम-छोर मिशन लाए।
जनजातीय कल्याण
भारत के 10.45 करोड़ जनजातीय नागरिक (अनुसूचित जनजातियाँ, जनगणना 2011) लंबे समय से इसके सबसे कम-सेवित लोगों में रहे हैं। हाल के वर्षों में एक मज़बूत प्रयास आया: जनजातीय ब्लॉकों में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, बिरसा मुंडा जैसे जनजातीय नायकों का सम्मान करता एक समर्पित जनजातीय गौरव दिवस, सबसे संवेदनशील जनजातीय समूहों के लिए ₹24,104 करोड़ का PM-JANMAN मिशन, और 63,843 जनजातीय गाँवों को कवर करता धरती आबा अभियान। यह समयरेखा उन पड़ावों को दर्शाती है।

यह क्यों मायने रखता है लक्षित स्कूल, मान्यता और अंतिम-छोर सेवाएँ जनजातीय समुदायों के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका में गहरे, पुराने अंतराल पाटने में मदद करती हैं।
- 728 अनुमोदित में से 723 स्वीकृत, 499 एकलव्य स्कूल चालू (अप्रैल 2026); PM-JANMAN ₹24,104 करोड़ (PVTG)
- जनजातीय गौरव दिवस (2021); 10.45 करोड़ जनजातीय नागरिक (जनगणना 2011); 63,843 गाँवों के लिए धरती आबा अभियान
- स्रोत: जनजातीय कार्य मंत्रालय, PIB के माध्यम से
इतिहास
मान्यता व संतृप्ति
एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय जनजातीय बहुल ब्लॉकों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा लाते हैं (अप्रैल 2026 तक 499 चालू); जनजातीय गौरव दिवस (2021) बिरसा मुंडा जैसे जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मान करता है; और PM-JANMAN (₹24,104 करोड़) सबसे संवेदनशील समूहों को घर, सड़क, पानी व स्वास्थ्य से लक्षित करता है।
यह कैसे काम करता है
जनजातीय कल्याण विशेष संरक्षण व लक्षित योजनाओं के मिश्रण से चलता है। वन अधिकार अधिनियम वन-निवासी समुदायों को उनकी भूमि पर कानूनी अधिकार देता है। एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय दूरस्थ क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा देते हैं। और PM-जनमन जैसे 'संतृप्ति' मिशन सबसे संवेदनशील जनजातीय समूहों तक हर बुनियादी सेवा — आवास, पानी, बिजली, सड़क, स्वास्थ्य — एक साथ पहुंचाने का लक्ष्य रखते हैं।
आगे की राह
दो बड़े मिशन अब प्रयास को आधार देते हैं: 75 सबसे संवेदनशील जनजातीय समूहों हेतु PM-जनमन (₹24,104 करोड़), और 63,843 जनजातीय गांवों को कवर करता धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (₹79,156 करोड़, 2024)। वास्तव में कठिन अगला कदम बिखरे, दूरस्थ टोलों तक वास्तविक सेवाएं पहुंचाना — और यह सुनिश्चित करना कि विकास जनजातीय भूमि अधिकार, वन व संस्कृति का सम्मान करे, उन्हें विस्थापित न करे।
आँकड़ों में
10.45 करोड़ जनजातीय नागरिक (जनगणना 2011); 728 अनुमोदित में से 723 स्वीकृत, 499 एकलव्य स्कूल चालू (अप्रैल 2026); 75 PVTG के लिए PM-JANMAN ₹24,104 करोड़; धरती आबा अभियान: 63,843 गाँव, ₹79,156 करोड़; जनजातीय गौरव दिवस (2021)। स्रोत: जनजातीय कार्य मंत्रालय, PIB के माध्यम से।
आँकड़े इस तिथि तक: अभियान 2024-25 से 2028-29; विद्यालय स्थिति अप्रैल 2026
स्रोत: जनजातीय कार्य मंत्रालय, PIB द्वारा प्रकाशित राज्यसभा उत्तर (1 अप्रैल 2026, लिंक) — 2 अक्टूबर 2024 को शुरू हुए धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान का लक्ष्य 2024-25 से 2028-29 के लिए ₹79,156 करोड़ (केंद्र ₹56,333 करोड़, राज्य ₹22,823 करोड़) के स्वीकृत परिव्यय से 63,843 जनजातीय गाँवों में बुनियादी ढाँचे की कमी पूरी करना है। गाँवों का आँकड़ा अभियान का दायरा है, पहले से सेवा पा चुके गाँव नहीं। मंत्रालय के अन्य मील के पत्थर: नवंबर 2021 में जनजातीय गौरव दिवस घोषित; 75 विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूहों के लिए ₹24,104 करोड़ पर PM-JANMAN स्वीकृत (नवंबर 2023); 728 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय अनुमोदित, जिनमें से 723 स्वीकृत और 499 चालू (1 अप्रैल 2026; राज्यसभा उत्तर, PIB PRID 2247594)। मील के पत्थर 2018–2024। · लिंक