चाय भारत की पहचान में बुनी है — असम व दार्जिलिंग के बाग़ानों से नीलगिरि पहाड़ियों तक — और भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। उत्पादन 2014 के 1,207 मिलियन किग्रा से बढ़कर 2025 में रिकॉर्ड 1,396 मिलियन किग्रा हुआ। भारत की अधिकांश चाय घर पर खपत होती है, प्रीमियम दार्जिलिंग व असम किस्में निर्यात के रूप में मूल्यवान।
चाय और बागान
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चाय उत्पादक है, और चाय — असम व दार्जिलिंग से नीलगिरि तक — एक प्रमुख नियोक्ता व सांस्कृतिक प्रतीक दोनों है। उत्पादन 2014 के 1,207 मिलियन किग्रा से बढ़कर 2025 में रिकॉर्ड 1,396 मिलियन किग्रा हुआ, 2024 में 1,304 मिलियन किग्रा तक गिरने के बाद। संगठित क्षेत्र 11.56 लाख श्रमिकों को रोज़गार देता है, जिनमें लगभग 58% महिलाएँ हैं। काउंटर चाय उत्पादन दिखाता है।

| वर्ष | चाय उत्पादन (मिलियन किग्रा, 2014 → 2025) |
|---|---|
| 2014 | 1,207 मिलियन किग्रा |
| 2015 | 1,209 मिलियन किग्रा |
| 2016 | 1,267 मिलियन किग्रा |
| 2017 | 1,322 मिलियन किग्रा |
| 2018 | 1,339 मिलियन किग्रा |
| 2019 | 1,390 मिलियन किग्रा |
| 2020 | 1,258 मिलियन किग्रा |
| 2021 | 1,343 मिलियन किग्रा |
| 2022 | 1,366 मिलियन किग्रा |
| 2023 | 1,394 मिलियन किग्रा |
| 2024 | 1,304 मिलियन किग्रा |
| 2025 | 1,396 मिलियन किग्रा |
यह क्यों मायने रखता है चाय बागान पहाड़ी व वन क्षेत्रों में लाखों की आजीविका बनाए रखते हैं और एक प्रतिष्ठित भारतीय निर्यात बने हुए हैं, जिसे चाय बोर्ड के तहत बागान श्रमिकों के आवास, स्वास्थ्य व कल्याण कार्यक्रमों का सहारा है।
- चाय उत्पादन: 1,207 M kg (2014) → 1,396 M kg (2025)
- दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक; असम, दार्जिलिंग, नीलगिरि
- स्रोत: भारतीय चाय बोर्ड
इतिहास
प्रमुख ताक़त
भारत की चाय अनूठे भौगोलिक संकेत (GI) टैग रखती है — दार्जिलिंग भारत का पहला GI उत्पाद था — जो इसकी विरासत किस्मों की रक्षा व प्रीमियम-मूल्य देते हैं। अकेले संगठित क्षेत्र 11.56 लाख श्रमिकों को रोज़गार देता है, जिनमें लगभग 58% महिलाएँ हैं, और ऑर्थोडॉक्स, हरी व विशेष चाय स्वास्थ्य-जागरूक वैश्विक खरीदारों के लिए बढ़ता क्षेत्र है।
यह कैसे काम करता है
चाय बड़े बागानों पर उगती है, कुछ क्षेत्रों में केंद्रित — मात्रा हेतु असम व डूआर्स, प्रीमियम पत्ती हेतु दार्जीलिंग व नीलगिरी। हर बागान एक स्व-निहित दुनिया है: श्रमिक (बड़ा हिस्सा महिलाएं) पत्तियां तोड़ते जो घंटों में बागान की अपनी फैक्ट्री में संसाधित होनी चाहिए। टी बोर्ड उद्योग को नियंत्रित करता व दार्जीलिंग जैसे नाम GI से रक्षित करता है।
आगे की राह
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चाय उत्पादक (हाल के वर्षों में 1,300–1,400 मिलियन किग्रा/वर्ष), असम व दार्जीलिंग में वैश्विक नाम, व स्थिर निर्यातक। आगे की प्राथमिकताएँ हैं श्रमिक कल्याण — चाय बोर्ड के माध्यम से आवास, स्वास्थ्य व वेतन कार्यक्रम — साथ ही पुरानी झाड़ियों का पुनर्रोपण, विशेष व जैविक चाय में प्रीमियम ब्रांडिंग, व बढ़ती निर्यात माँग।
आँकड़ों में
1,207 → 1,396 M kg चाय उत्पादन (2014→2025)। दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक। GI टैग (दार्जिलिंग, असम)। संगठित क्षेत्र में 11.56 लाख श्रमिक, लगभग 58% महिलाएँ। स्रोत: भारतीय चाय बोर्ड; PIB।
आँकड़े इस तिथि तक: कैलेंडर वर्ष 2025
स्रोत: भारतीय चाय बोर्ड — कैलेंडर वर्ष (जनवरी–दिसंबर) के अनुसार अखिल भारतीय चाय उत्पादन, मिलियन किग्रा, 2014–2025: 1,207 (2014), 1,390 (2019), 1,258 (2020), 1,394 (2023), 1,304 (2024) और 1,396 (2025, अगस्त 2026 के अंतिम आँकड़े) (लिंक)। वित्त वर्ष के योग थोड़े अलग हैं (2024-25: 1,316)। · लिंक