भारत में राष्ट्रीय टीबी कार्यक्रम दशकों से चल रहा है, पर 2014 के बाद सबसे बड़ा बदलाव यह आया कि मरीज़ों के आने का इंतज़ार करने के बजाय उन्हें खोजा जाने लगा। 2014 में 13,583 निर्दिष्ट माइक्रोस्कोपी केंद्र और केवल 127 औषधि-प्रतिरोधी टीबी उपचार केंद्र थे। टीबी उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय रणनीतिक योजना 2017–2025 ने पहचान–उपचार–रोकथाम–निर्माण का ढाँचा रखा, और मार्च 2018 के दिल्ली एंड टीबी शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने वैश्विक लक्ष्य से पाँच वर्ष पहले, 2025 तक टीबी मुक्त भारत का संकल्प लिया। नि-क्षय पोषण योजना अप्रैल 2018 में हर अधिसूचित मरीज़ को ₹500 मासिक के साथ शुरू हुई। 2020 में संशोधित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम का नाम बदलकर राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम कर दिया गया। अधिसूचनाएँ 2017 की 18.28 लाख से बढ़कर 2019 में 24.05 लाख हुईं, कोविड-19 के कारण सेवाएँ बाधित होने से 2020 में घटकर 18.06 लाख रह गईं, और 2022 तक फिर 24.22 लाख तक पहुँच गईं।
टीबी उन्मूलन
क्षय रोग (टीबी) एक जीवाणु संक्रमण है, जो आमतौर पर फेफड़ों को प्रभावित करता है और कम से कम छह महीने की दवा से पूरी तरह ठीक हो जाता है। भारत में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) चलता है — 2020 में इसका नाम संशोधित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम से बदला गया — जिसका घोषित लक्ष्य 2025 तक टीबी समाप्त करना है, यानी 2030 के वैश्विक सतत विकास लक्ष्य से पाँच वर्ष पहले। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर जाँच और इलाज नि:शुल्क है, हर मामला नि-क्षय पोर्टल पर दर्ज होता है, और निजी डॉक्टरों व प्रयोगशालाओं के लिए मामले की सूचना देना अनिवार्य है। काउंटर बताता है कि कार्यक्रम ने हर कैलेंडर वर्ष में कितने टीबी मामले दर्ज किए।
| वर्ष | प्रति वर्ष अधिसूचित टीबी के मामले (लाख) |
|---|---|
| 2017 | 18.28 लाख |
| 2018 | 21.56 लाख |
| 2019 | 24.05 लाख |
| 2020 | 18.06 लाख |
| 2021 | 21.36 लाख |
| 2022 | 24.22 लाख |
| 2023 | 25.52 लाख |
| 2024 | 26.18 लाख |
यह क्यों मायने रखता है जो टीबी मामला कभी दर्ज ही नहीं होता, उसका इलाज भी नहीं होता, और बिना इलाज के मरीज़ से संक्रमण फैलता रहता है। इसलिए अधिसूचनाओं का बढ़ना यह नापता है कि स्वास्थ्य तंत्र बीमारी का कितना हिस्सा वास्तव में खोज पा रहा है, न कि बीमारी कितनी है। कार्यक्रम के अपने आकलन में "छूटे हुए मामले" — वे मरीज़ जिनकी सूचना कभी दर्ज नहीं हुई — 2015 के लगभग 15 लाख से घटकर 2024 में एक लाख से कम रह गए, जबकि उपचार कवरेज 2015 के 53% से बढ़कर 2024 में 92% से अधिक हो गया।
- टीबी की घटना दर 2015 के 237 प्रति लाख जनसंख्या से घटकर 2024 में 187 प्रति लाख रह गई, यानी 21% की गिरावट — स्वास्थ्य मंत्रालय, WHO की वैश्विक टीबी रिपोर्ट 2025 के हवाले से (PIB, 12 नवंबर 2025)
- टीबी से मृत्यु दर 2015 के 28 प्रति लाख जनसंख्या से घटकर 2024 में 21 प्रति लाख रह गई, जिसे स्वास्थ्य मंत्रालय 25% की कमी बताता है — यह भी WHO की वैश्विक टीबी रिपोर्ट 2025 के हवाले से (पहल एवं उपलब्धियाँ-2025, जनवरी 2026)
- अप्रैल 2018 में शुरू हुई नि-क्षय पोषण योजना के तहत 14 दिसंबर 2025 तक 1.38 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को ₹4,454.68 करोड़ दिए गए; 1 नवंबर 2024 से मासिक पोषण राशि ₹500 से बढ़ाकर ₹1,000 कर दी गई
- 8 दिसंबर 2025 तक 6,90,257 नि-क्षय मित्र पंजीकृत हुए और 20,38,841 मरीज़ों को 45,76,059 खाद्य टोकरियाँ बाँटी गईं (पहल एवं उपलब्धियाँ-2025)
- निर्दिष्ट माइक्रोस्कोपी केंद्र 2014 के 13,583 से बढ़कर 2025 में 25,222 हो गए और 9,826 आणविक जाँच प्रयोगशालाएँ (CBNAAT/ट्रूनेट) स्थापित हुईं; औषधि-प्रतिरोधी टीबी उपचार केंद्र 2014 के 127 से बढ़कर 2024 में 815 हो गए
- 7 दिसंबर 2024 को 33 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के 347 उच्च-प्राथमिकता वाले ज़िलों में शुरू हुए 100-दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान में 12.97 करोड़ संवेदनशील लोगों की जाँच हुई और 7.19 लाख टीबी मामले मिले, जिनमें 2.85 लाख बिना लक्षण वाले थे (प्रधानमंत्री कार्यालय की समीक्षा, 13 मई 2025)
इतिहास
उल्लेखनीय उपलब्धि
7 दिसंबर 2024 को 33 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के 347 उच्च-प्राथमिकता वाले ज़िलों में शुरू हुआ 100-दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान कार्यक्रम का सबसे सघन खोज अभियान था। 13 मई 2025 को इसकी समीक्षा तक 12.97 करोड़ संवेदनशील लोगों की जाँच हो चुकी थी और 7.19 लाख टीबी मामले मिल चुके थे, जिनमें 2.85 लाख बिना लक्षण वाले थे और सामान्य हालात में पकड़ में न आते। अभियान के दौरान 1 लाख से अधिक नए नि-क्षय मित्र जुड़े, और फिर इसे देश के हर ज़िले तक बढ़ाया गया। कुल मिलाकर, 7 दिसंबर 2024 से मार्च 2026 तक 20 करोड़ से अधिक लोगों की जाँच हुई और 28 लाख से अधिक मरीज़ों की पहचान हुई। पूरे वर्ष 2024 में अधिसूचनाएँ 26.18 लाख रहीं, जो कार्यक्रम का अब तक का सर्वाधिक आँकड़ा है, और इनमें 9.50 लाख — यानी 36% — निजी क्षेत्र से आईं।
यह कैसे काम करता है
लक्षण वाले किसी भी व्यक्ति की जाँच किसी भी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों सहित, नि:शुल्क हो सकती है। जाँच का आधार 25,222 निर्दिष्ट माइक्रोस्कोपी केंद्र और 9,826 त्वरित आणविक प्रयोगशालाएँ (CBNAAT और ट्रूनेट) हैं, साथ ही 107 कल्चर व औषधि-संवेदनशीलता परीक्षण प्रयोगशालाएँ और सामुदायिक जाँच के लिए 500 से अधिक AI-सक्षम हाथ में पकड़ी जाने वाली छाती एक्स-रे मशीनें। हर मामला, चाहे सरकारी हो या निजी, नि-क्षय पोर्टल पर दर्ज होता है, जिससे प्रत्यक्ष लाभ अंतरण भी होता है। दवाएँ नि:शुल्क हैं, जिनमें सितंबर 2024 में स्वीकृत छोटी, पूर्णत: मुँह से ली जाने वाली BPaLM पद्धति (बेडाक्विलीन, प्रीटोमैनिड, लाइनज़ोलिड, मोक्सीफ़्लोक्सासिन) भी शामिल है, जो औषधि-प्रतिरोधी टीबी का इलाज 9–12 महीने से घटाकर 6 महीने कर देती है; मार्च 2026 तक 15,000 से अधिक MDR/RR-टीबी मरीज़ इस पर शुरू किए जा चुके थे। ₹1,000 मासिक पोषण सहायता मरीज़ों तक DBT से पहुँचती है, और नि-क्षय मित्र — व्यक्ति, कंपनियाँ, पंचायतें और संस्थाएँ — मरीज़ों तथा उनके परिवारों को खाद्य टोकरियों के साथ गोद लेते हैं।
आगे की राह
राष्ट्रीय लक्ष्य अब भी 2025 तक टीबी समाप्त करना बताया जाता है, और मंत्रालय के अपने दस्तावेज़ अब टीबी के लिए राष्ट्रीय रणनीतिक योजना (2025–27) का उल्लेख करते हैं, यानी काम लक्ष्य वर्ष के बाद भी जारी है। अधिसूचित मरीज़ों में उपचार सफलता दर 2021 के 83% से बढ़कर 2024 में 89% हुई, और जनवरी–अक्टूबर 2025 में 90% रही, जबकि वैश्विक औसत 88% है। जनवरी–अक्टूबर 2025 में 22.64 लाख मामले अधिसूचित हुए; 2025 के पूरे वर्ष का आँकड़ा अभी प्रकाशित नहीं हुआ है, इसीलिए चार्ट 2024 पर समाप्त होता है। प्रमाणन अब गाँव तक पहुँच रहा है: वर्ष 2024 के लिए 46,118 ग्राम पंचायतों को टीबी-मुक्त प्रमाणपत्र मिला। जिन नए साधनों का विस्तार हो रहा है उनमें छाती के एक्स-रे का AI से पठन, खाँसी की ध्वनि से जाँच और खराब परिणाम के जोखिम वाले मरीज़ों की पहचान करने वाला पूर्वानुमान विश्लेषण शामिल हैं। टीबी का सबसे बड़ा बोझ अब भी भारत पर है, और कार्यक्रम स्वयं मानता है कि इस गिरावट को बनाए रखना मामलों की जल्दी पहचान जारी रखने पर निर्भर है।
आँकड़े इस तिथि तक: कैलेंडर वर्ष 2024 (स्वास्थ्य मंत्रालय, पहल एवं उपलब्धियाँ-2025, PIB, जनवरी 2026)
स्रोत: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP), PIB के माध्यम से। चार्ट में नि-क्षय प्रणाली से कैलेंडर वर्ष (जनवरी–दिसंबर) में अधिसूचित कुल टीबी मामले लाख में दिए गए हैं: 2017–2019 के आँकड़े 23 सितंबर 2020 के लोकसभा उत्तर से; 2020–2023 के 3 दिसंबर 2024 के राज्यसभा उत्तर से; 2024 का आँकड़ा 'स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय: पहल एवं उपलब्धियाँ-2025' (PIB, जनवरी 2026) से। सटीक संख्याओं को लाख में बदलकर दो दशमलव तक पूर्णांकित किया गया है — जैसे 2020 की 18,05,670 संख्या यहाँ 18.06 लाख है, जबकि PIB अपनी सुर्खी में इसे 18.05 लाख लिखता है। 2014, 2015 और 2016 इसलिए छोड़े गए हैं क्योंकि उन वर्षों के लिए मिले एकमात्र आधिकारिक आँकड़े (राज्यसभा, 11 अप्रैल 2017) अलग आधार पर हैं — केवल औषधि-संवेदनशील टीबी की अधिसूचनाएँ — और अलग-अलग आधार मिलाने से रेखा भ्रामक हो जाती। 2025 इसलिए छोड़ा गया है क्योंकि अब तक केवल जनवरी–अक्टूबर का आंशिक आँकड़ा (22.64 लाख) प्रकाशित हुआ है। मुख्य आँकड़ा: 2024 में 26.18 लाख अधिसूचनाएँ, जनवरी 2026 के उपलब्धि दस्तावेज़ से (लिंक)। · लिंक