भारत के रक्षा संबंध लंबे समय तक एक ही आपूर्तिकर्ता से प्रभावित रहे, और अमेरिका के साथ निकट संबंध तीन बिना-हस्ताक्षरित 'आधारभूत' समझौतों से रुके रहे जो 2000 के दशक से चर्चा में थे। लगातार सरकारें हिचकीं, इस चिंता में कि हस्ताक्षर रणनीतिक स्वायत्तता से समझौता होगा। परिणाम यह था कि भारत उपकरण ख़रीदता था पर प्रौद्योगिकी शायद ही पाता था।
रणनीतिक व रक्षा साझेदारियाँ
2014 के बाद भारत के रक्षा व रणनीतिक संबंध रूपांतरित हुए। अमेरिका के साथ तीन 'आधारभूत' समझौते — लेमोआ (2016), कॉमकासा (2018) व बेका (2020) — एक दशक से अधिक अटके थे और चार वर्षों में हस्ताक्षरित हुए। क्वाड पुनर्जीवित हुआ व 2021 में नेता-स्तर पर पहुँचा। जीई ने प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के साथ भारत में F414 जेट इंजन सह-उत्पादन पर सहमति दी, और 2025 में दस-वर्षीय भारत-अमेरिका रक्षा ढाँचा हस्ताक्षरित हुआ — यह सब तब जब भारत ने रूस, फ़्रांस, जापान व खाड़ी के साथ साझेदारियाँ अपनी शर्तों पर बनाए रखीं।

यह क्यों मायने रखता है रणनीतिक स्वायत्तता का अर्थ है हर गुट द्वारा लुभाया जाना और किसी द्वारा न पकड़ा जाना। भारत रूसी एस-400 व अमेरिकी एमक्यू-9बी ख़रीदता है, फ़्रांसीसी राफ़ेल उड़ाता है, इज़राइल व जापान के साथ सह-विकास करता है, और सबसे व्यापार करता है — साथ ही हर साझेदारी से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण व घरेलू उत्पादन निकालता है। यह वह लाभ है जो पिछले किसी दशक ने हासिल नहीं किया।
- लेमोआ (2016), कॉमकासा (2018) व बेका (2020) — एक दशक से अटके तीन आधारभूत समझौते, चार वर्षों में हस्ताक्षरित।
- क्वाड पुनर्जीवित हुआ व 2021 में पहला नेता-शिखर सम्मेलन हुआ।
- जीई एयरोस्पेस व एचएएल ने भारी प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के साथ भारत में F414 जेट इंजन सह-उत्पादन पर सहमति दी।
- 2024 में 31 एमक्यू-9बी दूर-संचालित विमान पर सहमति, भारत में असेंबली व रखरखाव कार्य सहित।
- आई2यू2 (भारत, इज़राइल, यूएई, अमेरिका) 2022 में खाद्य, जल व स्वच्छ ऊर्जा में संयुक्त निवेश हेतु गठित।
- भारत व यूरोपीय संघ ने 27 जनवरी 2026 को अपनी पहली सुरक्षा व रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर किए।

इतिहास
उल्लेखनीय उपलब्धि
तीनों चार वर्षों में हस्ताक्षरित हुए — लेमोआ (2016), कॉमकासा (2018) व बेका (2020) — रसद पहुँच, कूटबद्ध संचार व उच्च-स्तरीय भू-स्थानिक डेटा खोलते हुए। 2023 में जीई एयरोस्पेस व एचएएल ने भारी प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के साथ भारत में F414 जेट इंजन सह-उत्पादन पर सहमति दी, किसी अमेरिकी इंजन हेतु अपनी तरह की पहली व्यवस्था, और 2025 में दस-वर्षीय भारत-अमेरिका रक्षा ढाँचा हस्ताक्षरित हुआ।
यह कैसे काम करता है
सिद्धांत है बहु-संरेखण: हर साझेदारी गहरी करो, किसी को बंद मत करो। भारत रूसी एस-400 प्रणालियाँ व अमेरिकी एमक्यू-9बी विमान संचालित करता है, फ़्रांसीसी राफ़ेल उड़ाता है, इज़राइल के साथ एमआरएसएएम व जापान के साथ अवसंरचना सह-विकसित करता है, अमेरिका, जापान व ऑस्ट्रेलिया के साथ क्वाड चलाता है, और रूस तथा चीन के साथ ब्रिक्स व एससीओ का सदस्य बना रहता है। हर संबंध शेल्फ़-से-ख़रीद के बजाय प्रौद्योगिकी हस्तांतरण व भारतीय उत्पादन-अंश हेतु बातचीत किया जाता है।
आगे की राह
क्वाड आधिकारिक स्तर पर पुनर्जीवित हुआ व 2021 में नेता-शिखर सम्मेलन तक पहुँचा, टीकों, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी, जलवायु व समुद्री जागरूकता पर कार्य-समूहों के साथ। आई2यू2 ने भारत को संयुक्त निवेश हेतु इज़राइल, यूएई व अमेरिका के साथ लाया। महत्वपूर्ण व उभरती प्रौद्योगिकी पर आईसीईटी पहल ने साझेदारी को अर्धचालक, एआई, अंतरिक्ष व क्वांटम तक बढ़ाया — संबंध को हथियार-बिक्री से सह-विकास की ओर ले जाते हुए।
आँकड़ों में
एक दशक की देरी के बाद चार वर्षों में 3 आधारभूत समझौते — लेमोआ (2016), कॉमकासा (2018), बेका (2020) — हस्ताक्षरित। क्वाड 2021 में नेता-स्तर पर। F414 जेट इंजन भारत में सह-उत्पादित होंगे। 2024 में 31 एमक्यू-9बी विमान पर सहमति। 2025 में 10-वर्षीय भारत-अमेरिका रक्षा ढाँचा। 27 जनवरी 2026 को भारत-यूरोपीय संघ सुरक्षा व रक्षा साझेदारी। स्रोत: विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, यूरोपीय आयोग, पीआईबी।
आँकड़े इस तिथि तक: भारत–EU सुरक्षा और रक्षा साझेदारी, 27 जनवरी 2026
स्रोत: विदेश मंत्रालय / रक्षा मंत्रालय — आधारभूत समझौते, क्वाड और साझेदारी की प्रमुख उपलब्धियाँ, 2014→2026। · लिंक