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ग़रीबी में कमी

ग़रीबी में कमी

भारत का राष्ट्रीय बहुआयामी ग़रीबी सूचकांक — जो 12 संकेतकों में स्वास्थ्य, शिक्षा व जीवन-स्तर की वंचनाएँ मापता है — 2013-14 के 29.17% से 2022-23 के 11.28% तक गिरा। NITI आयोग का अनुमान है कि उन नौ वर्षों में लगभग 24.8 करोड़ लोग बहुआयामी ग़रीबी से बाहर निकले, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश व राजस्थान में सबसे बड़ी गिरावट के साथ। काउंटर MPI हेडकाउंट दिखाता है।

A village near the river
A village near the river · Wikimedia Commons
24.8 cr
बहुआयामी गरीबी से बाहर
2013-23
दशक में
Low single digits
अत्यधिक गरीबी
Multidimensional poverty (%)
MPI headcount
वर्षMPI headcount
201429 %
201527 %
201625 %
201722 %
201820 %
201917 %
202016 %
202115 %
202213 %
202311 %
2014
0%
MPI headcount
20142023
Since 2014
Added
+-18 %
2014
29 %
2023
11 %

यह क्यों मायने रखता है ग़रीबी आय से अधिक है — यह कि परिवार के पास स्वच्छ ईंधन, शौचालय, स्कूली शिक्षा व बैंक खाता है या नहीं। यह सूचकांक इन सबको एक साथ मापता है।

  • MPI हेडकाउंट 29.17% → 11.28%
  • ~24.82 करोड़ लोग 9 वर्षों में बहुआयामी ग़रीबी से बाहर
  • UP (5.94 करोड़) व बिहार (3.77 करोड़) में सबसे बड़ी गिरावट
  • आगे का रास्ता: वंचना-आधारित MPI के पूरक हेतु नियमित आय-ग़रीबी सर्वेक्षण
  • स्रोत: NITI आयोग / OPHI-UNDP

इतिहास

भारत आज़ादी से व्यापक ग़रीबी से लड़ रहा है। केवल आय के बजाय, राष्ट्रीय बहुआयामी ग़रीबी सूचकांक — ऑक्सफ़ोर्ड के OPHI व UNDP के साथ बनाया — स्वास्थ्य, शिक्षा व जीवन-स्तर में वंचना मापता है, पोषण व स्कूली शिक्षा से लेकर ईंधन, स्वच्छता, बिजली व बैंक खातों तक 12 संकेतकों से। यह 2013-14 के 29.17% से 2022-23 के 11.28% तक गिरा।

24.8 करोड़ बाहर निकले

NITI आयोग का अनुमान है कि उन नौ वर्षों में लगभग 24.82 करोड़ लोग बहुआयामी ग़रीबी से बाहर निकले — हेडकाउंट में 17.89 प्रतिशत-बिंदु गिरावट। सबसे तीव्र गिरावट उत्तर प्रदेश (5.94 करोड़), बिहार (3.77 करोड़), मध्य प्रदेश व राजस्थान में थी। रसोई गैस, शौचालय, नल का पानी, आवास, बिजली व बैंक खातों की योजनाओं ने ग़रीबी के हर आयाम को कम किया।

यह कैसे काम करता है

भारत ग़रीबी पर एक साथ दो मोर्चों से हमला करता है। प्रत्यक्ष समर्थन लोगों के हाथ में पैसा व आवश्यक वस्तुएँ देता है — 80 करोड़ से अधिक लोगों को निःशुल्क खाद्यान्न, नक़द अंतरण, सब्सिडीयुक्त आवास, रसोई गैस व स्वास्थ्य कवर। सक्षमकर्ता फिर परिवारों को स्थायी रूप से बाहर निकलने में मदद करते हैं — बैंक खाते, शौचालय, बिजली, सड़कें व रोज़गार। ग़रीबी केवल आय से नहीं बल्कि 'बहुआयामी' रूप से मापी जाती है — स्वास्थ्य, शिक्षा व जीवन-स्तर एक साथ गिनते हुए।

आगे की राह

सरकार के बहुआयामी माप से, 2013-14 से 2022-23 के बीच लगभग 24.8 करोड़ लोग ग़रीबी से बाहर निकले, और विश्व बैंक अब भारत की अत्यधिक ग़रीबी को कम एकल-अंकों में रखता है। अगला क़दम इसे बेहतर मापना व काम पूरा करना है — सबसे कठिन-से-मदद परिवारों तक पहुँचना, पलायन को स्थायी बनाना (एक झटके से वापस गिरने की दूरी पर नहीं), और सहायता से स्थिर, बेहतर-वेतन रोज़गार की ओर बढ़ना।

आगे का रास्ता

अगला क़दम इसे बेहतर मापना और काम पूरा करना है — वंचना-आधारित सूचकांक के साथ नियमित आय-ग़रीबी सर्वेक्षण, क्योंकि लगभग 16 करोड़ भारतीय अब भी बहुआयामी रूप से ग़रीब हैं।

आँकड़ों में

MPI हेडकाउंट 29.17% → 11.28%; ~24.82 करोड़ बाहर; UP (5.94 करोड़) व बिहार (3.77 करोड़) आगे; 12 संकेतक। स्रोत: NITI आयोग / OPHI-UNDP।

स्रोत: NITI Aayog / OPHI-UNDP — national MPI headcount (%); ~24.8 cr escaped 2013-14 to 2022-23.