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पोषण · पोषण अभियान

पोषण · पोषण अभियान

बाल कुपोषण भारत की सबसे कठिन चुनौतियों में से एक बना हुआ है। पोषण अभियान (2018) और आंगनवाड़ी केंद्रों का विशाल नेटवर्क, साथ ही 80 करोड़ लोगों के लिए मुफ़्त खाद्यान्न, बौनापन, दुर्बलता और रक्ताल्पता को लक्षित करते हैं। पाँच वर्ष से कम उम्र में बौनापन 38.4% (2015-16) से मामूली रूप से घटकर 35.5% (2019-21) हुआ — वास्तविक पर धीमी प्रगति। एक डिजिटल पोषण ट्रैकर अब रियल-टाइम में पोषण की निगरानी करता है। काउंटर बाल बौनापन दर दिखाता है।

Mid day meals at Karunaram Anganwadi, Nanminda Grama Panchayat, Kozhikode, Kerala.
Mid day meals at Karunaram Anganwadi, Nanminda Grama Panchayat, Kozhikode, Kerala. · Jaisuvyas · CC BY-SA 4.0 · Wikimedia Commons
35.5%
बाल बौनापन (2021)
80 cr
मुफ़्त अनाज पाने वाले
2018
पोषण अभियान
Child stunting (under-5)
Child stunting (under-5)
वर्षChild stunting (under-5)
201638 %
201738 %
201837 %
201937 %
202036 %
202136 %
2016
0%
Child stunting (under-5)
20162021
Since 2016
Added
+-3 %
2016
38 %
2021
36 %

यह क्यों मायने रखता है अच्छा प्रारंभिक-बचपन पोषण आजीवन स्वास्थ्य, सीखने और उत्पादकता को आकार देता है — बौनापन से निपटना एक राष्ट्र का सबसे अधिक-प्रतिफल निवेश है।

  • बाल बौनापन: 38.4% (2016) → 35.5% (2021)
  • पोषण अभियान (2018); पोषण ट्रैकर; 80 करोड़ को मुफ़्त अनाज
  • स्रोत: NFHS-4, NFHS-5

इतिहास

कुपोषण लंबे समय से भारत के बच्चों पर छाया रहा है। पोषण अभियान (2018) ने बौनापन, दुर्बलता व रक्ताल्पता से लड़ने के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों, मध्याह्न भोजन, और 80 करोड़ लोगों के लिए मुफ़्त खाद्यान्न को जोड़ा।

धीमी, वास्तविक प्रगति

पाँच वर्ष से कम में बौनापन 38.4% (2015-16) से 35.5% (2019-21) घटा, और एक डिजिटल पोषण ट्रैकर अब लाखों बच्चों व माताओं की रियल-टाइम निगरानी करता है — पर लाभ मामूली और राज्यों में असमान हैं।

यह कैसे काम करता है

भारत कुपोषण से मुख्यतः आंगनवाड़ी नेटवर्क से लड़ता है — दस लाख से अधिक गाँव केंद्र जो छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं व नई माताओं को पूरक भोजन, वृद्धि-निगरानी, टीकाकरण व पूर्व-स्कूल देखभाल देते हैं। यह पोषण अभियान के तहत चलता है, जो बच्चों की वृद्धि वास्तविक-समय में ट्रैक करने हेतु तकनीक का उपयोग करता है, साथ ही स्कूल मध्याह्न भोजन (PM पोषण)एनीमिया मुक्त भारत अभियान। चूँकि पोषण स्वच्छ पानी व स्वास्थ्य पर भी निर्भर है, प्रयास जानबूझकर बहु-क्षेत्रीय है।

आगे की राह

प्रगति वास्तविक पर धीमी है: बाल बौनापन घटकर 35.5% (38.4% से) नवीनतम सर्वेक्षण में, फिर भी दुबलापन और — चिंताजनक रूप से — एनीमिया बिगड़ा, आधी से अधिक महिलाएँ प्रभावित। अगला क़दम बिंदुओं को जोड़कर गति बढ़ाना है: स्वच्छ पानी, स्वच्छता, विविध आहार व आय एक साथ, क्योंकि कोई एक योजना कुपोषण नहीं सुलझाती। राशन दुकानों में फ़ोर्टिफ़ाइड चावल व मज़बूत आंगनवाड़ी निकट-अवधि लीवर हैं।

आगे का रास्ता

अगला क़दम गति बढ़ाना है — पोषण स्वच्छ पानी, स्वच्छता, आहार व आय पर एक साथ निर्भर है, इसलिए बौनापन व एनीमिया से निपटने के लिए किसी एक योजना से आगे संयुक्त प्रयास चाहिए।

आँकड़ों में

बाल बौनापन 38.4% (2016) → 35.5% (2021); 80 करोड़ को मुफ़्त अनाज; पोषण अभियान (2018)। स्रोत: NFHS-4, NFHS-5।

स्रोत: NFHS-4 & NFHS-5 — stunting among children under 5 (%), 2016–2021.