पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में सशस्त्र समूह दशकों से सक्रिय रहे हैं, और 2014 में क्षेत्र में 824 उग्रवादी घटनाएँ हुईं। 2019 से पहले गृह मंत्रालय ने मेघालय के ANVC समूहों के साथ समझौता (24 सितंबर 2014) किया, जिसके बाद 751 कैडरों ने आत्मसमर्पण किया, और NSCN(IM) के साथ एक रूपरेखा समझौता (3 अगस्त 2015) किया। अफ़स्पा के तहत अशांत क्षेत्र की अधिसूचनाएँ त्रिपुरा से 27 मई 2015 और मेघालय से 1 अप्रैल 2018 से हटाई गईं। इसके बाद 10 अगस्त 2019 को त्रिपुरा के NLFT(SD) के साथ समझौता हुआ, और इसके 88 कैडरों ने 44 हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया।
पूर्वोत्तर शांति समझौते
2014 से केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और पूर्वोत्तर के सशस्त्र समूहों के बीच कई समझौते हुए हैं। गृह मंत्रालय 2014 से 2024 तक नौ शांति समझौतों की सूची देता है, मेघालय के ANVC समझौते से त्रिपुरा के NLFT और ATTF समझौते तक, साथ ही ब्रू पुनर्वास समझौता और दो अंतरराज्यीय सीमा समझौते। क्षेत्र में उग्रवादी घटनाएँ 2014 के 824 से घटकर 2020 में 163 हुईं और 2023 में 243 रहीं; मंत्रालय के अनुसार 2024 में घटनाएँ 2014 से 64% कम थीं। काउंटर हर वर्ष पूर्वोत्तर क्षेत्र में उग्रवादी घटनाएँ दिखाता है।

| वर्ष | पूर्वोत्तर क्षेत्र में उग्रवादी घटनाएँ (प्रति वर्ष) |
|---|---|
| 2014 | 824 incidents |
| 2015 | 574 incidents |
| 2016 | 484 incidents |
| 2017 | 308 incidents |
| 2018 | 252 incidents |
| 2019 | 223 incidents |
| 2020 | 163 incidents |
| 2021 | 209 incidents |
| 2022 | 201 incidents |
| 2023 | 243 incidents |
यह क्यों मायने रखता है हर समझौता कैडरों के हथियार डालकर नागरिक जीवन में लौटने की शर्तें तय करता है, और अक्सर क्षेत्र के लिए विकास पैकेज भी देता है। कम घटनाओं का अर्थ है नागरिकों और सुरक्षा बलों की कम मौतें, और ब्रू जैसे दशकों से विस्थापित परिवार स्थायी रूप से बस सकते हैं।
- बोडो समझौता, 27 जनवरी 2020: NDFB समूहों के 4,881 कैडर मुख्यधारा में लौटे
- कार्बी समझौता, 4 सितंबर 2021: 1,926 कैडर; आदिवासी शांति समझौता, 15 सितंबर 2022: 1,182 कैडर
- उल्फ़ा समझौता, 29 दिसंबर 2023: 852 कैडरों ने आत्मसमर्पण किया; उल्फ़ा 23 जनवरी 2024 को भंग हुआ
- ब्रू समझौता, 16 जनवरी 2020: 6,935 परिवारों (37,584 व्यक्तियों) का ₹793.65 करोड़ के पैकेज से त्रिपुरा में पुनर्वास (अक्टूबर 2025)
- अफ़स्पा के अशांत क्षेत्र: त्रिपुरा (27 मई 2015) और मेघालय (1 अप्रैल 2018) से पूरी तरह, और असम के 3 को छोड़ सभी ज़िलों से हटाए गए (अक्टूबर 2025)
- 2014 की तुलना में 2024 में: उग्रवादी घटनाएँ 64%, सुरक्षा बलों की हताहत संख्या 85% और नागरिकों की मौतें 86% कम (गृह मंत्रालय)

इतिहास
उल्लेखनीय उपलब्धि
जनवरी 2020 में दो समझौते हुए: विस्थापित ब्रू परिवारों को त्रिपुरा में स्थायी रूप से बसाने के लिए ब्रू समझौता (16 जनवरी), और बोडो समझौता (27 जनवरी), जिसके बाद NDFB के 4,881 कैडर मुख्यधारा में लौटे। इसके बाद 4 सितंबर 2021 को कार्बी समझौता, 15 सितंबर 2022 को आदिवासी शांति समझौता और 27 अप्रैल 2023 को DNLA समझौता हुआ। 29 नवंबर 2023 को मणिपुर के सबसे पुराने घाटी-आधारित सशस्त्र समूह UNLF ने शांति समझौता किया; मुख्यधारा में लौटने पर सहमत होने वाला यह ऐसा पहला समूह था। उल्फ़ा समझौता 29 दिसंबर 2023 को और NLFT व ATTF समझौता 4 सितंबर 2024 को हुआ, जिसके बाद 918 कैडरों ने हथियार डाले।
यह कैसे काम करता है
अधिकांश समझौते केंद्र सरकार, राज्य सरकार और सशस्त्र समूह के बीच त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoS) होते हैं। समूह हिंसा छोड़ने, हथियार सौंपने और स्वयं को भंग करने पर सहमत होता है, और सरकारें कैडरों का पुनर्वास करती हैं तथा कई मामलों में विशेष विकास पैकेज देती हैं। ब्रू समझौते में हर पुनर्वासित परिवार को सावधि जमा में ₹4 लाख, दो वर्ष तक मुफ़्त राशन और ₹5,000 प्रति माह, आवास के लिए ₹1.5 लाख और एक भूखंड मिलता है। राज्यों के बीच सीमा विवाद सहमति ज्ञापन (MoU) से सुलझाए जाते हैं: असम और मेघालय के बीच मतभेद के 12 में से 6 क्षेत्रों पर (29 मार्च 2022), और असम व अरुणाचल प्रदेश के बीच 123 गाँवों पर (20 अप्रैल 2023)।
आगे की राह
घटनाएँ 2022 के 201 से बढ़कर 2023 में 243 हुईं; गृह मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार उस वर्ष क्षेत्र की हिंसक घटनाओं में मणिपुर का हिस्सा लगभग 77% था। 2023 में विभिन्न संगठनों के 1,595 कैडरों ने 459 हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया। अक्टूबर 2025 तक अफ़स्पा के अशांत क्षेत्र असम के 3 ज़िलों में, अरुणाचल प्रदेश के 3 ज़िलों और एक अन्य ज़िले के कुछ हिस्सों में, तथा नागालैंड के 9 ज़िलों और 5 अन्य ज़िलों के 21 थानों में बने रहे, जबकि मणिपुर में 5 ज़िलों के 13 थानों से यह क़ानून हटाया गया था। 5 फ़रवरी 2026 को ईस्टर्न नागालैंड पीपल्स ऑर्गनाइज़ेशन के साथ हुए समझौते में छह ज़िलों के लिए 46 विषयों के अधिकारों वाले फ्रंटियर नागालैंड क्षेत्रीय प्राधिकरण का प्रावधान किया गया।
आँकड़ों में
पूर्वोत्तर में 824 → 243 उग्रवादी घटनाएँ (2014 → 2023)। 64% कम घटनाएँ, सुरक्षा बलों की 85% कम हताहत संख्या और 86% कम नागरिक मौतें (2024 बनाम 2014)। गृह मंत्रालय द्वारा सूचीबद्ध 9 शांति समझौते (2014–2024)। 4,881 बोडो, 1,926 कार्बी, 1,182 आदिवासी, 852 उल्फ़ा और 918 NLFT/ATTF कैडर। 6,935 ब्रू परिवारों (37,584 व्यक्तियों) का पुनर्वास। हथियार सौंपने वाले 10,900 कैडर (मार्च 2025)। स्रोत: गृह मंत्रालय (पूर्वोत्तर प्रभाग; वार्षिक रिपोर्ट 2023-24); PIB।
आँकड़े इस तिथि तक: घटनाएँ 2014–2023; समझौते और अफ़स्पा स्थिति अक्टूबर 2025 तक
स्रोत: गृह मंत्रालय — पूर्वोत्तर क्षेत्र में हर कैलेंडर वर्ष की उग्रवादी घटनाएँ: 2014–2022 पूर्वोत्तर प्रभाग के पूर्वोत्तर में उग्रवाद विवरण से, 2023 गृह मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2023-24 से। समझौतों की तिथियाँ, कैडरों की संख्या, ब्रू पुनर्वास और अफ़स्पा की स्थिति पूर्वोत्तर प्रभाग के अक्टूबर 2025 के नोट से हैं। शीर्ष आँकड़ा, हथियार सौंपने वाले 10,900 युवा, 21 मार्च 2025 को राज्यसभा में गृह मंत्री ने बताया (लिंक)। · लिंक