केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2 सितंबर 2020 को राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता निर्माण कार्यक्रम को मंज़ूरी दी, जिसके संस्थागत ढाँचे में प्रधानमंत्री की सार्वजनिक मानव संसाधन परिषद, एक क्षमता निर्माण आयोग, ऑनलाइन प्रशिक्षण प्लेटफ़ॉर्म का स्वामित्व और संचालन करने वाला एक विशेष प्रयोजन वाहन, और कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में एक समन्वय इकाई शामिल थे। इसके लिए पाँच वर्षों, 2020-21 से 2024-25, में लगभग 46 लाख केंद्रीय कर्मचारियों को शामिल करने हेतु ₹510.86 करोड़ रखे गए, जिनका एक हिस्सा 5 करोड़ अमेरिकी डॉलर की बहुपक्षीय सहायता से आना था। मार्च 2021 तक डिजिटल लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म प्री-प्रोडक्शन (प्रायोगिक) चरण में काम करने लगा था। क्षमता निर्माण आयोग 2021 में और कर्मयोगी भारत SPV 2022 में स्थापित हुआ।
मिशन कर्मयोगी
मिशन कर्मयोगी, यानी राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता निर्माण कार्यक्रम (NPCSCB), को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2 सितंबर 2020 को मंज़ूरी दी, ताकि सरकारी मानव संसाधन प्रबंधन 'नियम-आधारित' से 'भूमिका-आधारित' प्रणाली की ओर बढ़े। इसका प्रशिक्षण मुख्य रूप से iGOT कर्मयोगी डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म से दिया जाता है, जिसे कर्मयोगी भारत विशेष प्रयोजन वाहन चलाता है, जबकि क्षमता निर्माण आयोग मंत्रालयों को क्षमता निर्माण योजनाएँ बनाने और लागू करने में मदद करता है। 12 अगस्त 2026 तक प्लेटफ़ॉर्म पर 1.7 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता, 23 भाषाओं में 5,600 से अधिक पाठ्यक्रम और 14.42 करोड़ से अधिक पाठ्यक्रम पूर्णताएँ दर्ज थीं। काउंटर iGOT कर्मयोगी प्लेटफ़ॉर्म पर उपयोगकर्ता दिखाता है।

| वर्ष | iGOT कर्मयोगी प्लेटफ़ॉर्म पर उपयोगकर्ता (करोड़) |
|---|---|
| 2024 | 0.49 करोड़ |
| 2025 | 1.41 करोड़ |
| 2026 | 1.70 करोड़ |
यह क्यों मायने रखता है कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के अनुसार मिशन का उद्देश्य क्षमता निर्माण को नियम-आधारित ढाँचे से भूमिका-आधारित और दक्षता-केंद्रित ढाँचे की ओर ले जाकर भविष्य के लिए तैयार और नागरिक-केंद्रित सिविल सेवा बनाना है। केंद्र और राज्यों के कर्मचारी क्षेत्रीय, कार्यात्मक और व्यवहारगत दक्षताओं के पाठ्यक्रम कभी भी और कहीं भी ऑनलाइन कर सकते हैं। रिपोर्टिंग वर्ष 2025-26 से हर वर्ष पूरे किए गए निर्धारित iGOT पाठ्यक्रम कर्मचारियों की वार्षिक कार्य-निष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट (APAR) में दर्ज होते हैं, जिससे सीखना मूल्यांकन से जुड़ता है।
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2 सितंबर 2020 को मंज़ूरी दी; लगभग 46 लाख केंद्रीय कर्मचारियों को शामिल करने के लिए 2020-21 से 2024-25 के बीच ₹510.86 करोड़ का व्यय
- iGOT उपयोगकर्ता: 49 लाख से अधिक (6 दिसंबर 2024) → 1 करोड़ (मई 2025) → 1.41 करोड़ (दिसंबर 2025) → 1.7 करोड़ (12 अगस्त 2026)
- 14.42 करोड़ से अधिक पाठ्यक्रम पूर्णताएँ और 23 भाषाओं में 5,600 से अधिक पाठ्यक्रम (लोकसभा, 12 अगस्त 2026)
- कर्मयोगी सप्ताह, 19–27 अक्टूबर 2024: 45.6 लाख पाठ्यक्रम नामांकन, 32.6 लाख पूर्णताएँ और 38 लाख से अधिक घंटे की पढ़ाई
- क्षमता निर्माण आयोग 2021 में और कर्मयोगी भारत SPV 2022 में स्थापित; 130 से अधिक क्षमता निर्माण योजनाएँ तैयार (अप्रैल 2026)
- राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन: 14 (6 दिसंबर 2024) → 30 (अगस्त 2026)
इतिहास
उल्लेखनीय उपलब्धि
प्रधानमंत्री ने सिविल सेवकों के लिए राष्ट्रीय शिक्षण सप्ताह, पहले कर्मयोगी सप्ताह, का शुभारंभ 19 अक्टूबर 2024 को किया; यह 27 अक्टूबर तक चला। इस सप्ताह में प्लेटफ़ॉर्म पर 45.6 लाख पाठ्यक्रम नामांकन, 32.6 लाख पूर्णताएँ और 38 लाख से अधिक घंटे की पढ़ाई दर्ज हुई, और 4.3 लाख प्रतिभागियों ने कम से कम चार घंटे पढ़ाई की। 21 मई 2025 को प्लेटफ़ॉर्म ने 1 करोड़ पंजीकृत उपयोगकर्ताओं का आँकड़ा पार किया, जिनमें 60% से अधिक राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से थे। इसके बाद DoPT, क्षमता निर्माण आयोग और कर्मयोगी भारत ने 2 से 8 अप्रैल 2026 तक एक और शिक्षण सप्ताह, साधना सप्ताह, आयोजित किया।
यह कैसे काम करता है
कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के तहत गैर-लाभकारी कंपनी कर्मयोगी भारत iGOT कर्मयोगी प्लेटफ़ॉर्म का स्वामित्व और संचालन करती है, जो क्षेत्रीय, कार्यात्मक और व्यवहारगत दक्षताओं के पाठ्यक्रम उपलब्ध कराता है। क्षमता निर्माण आयोग मंत्रालयों, विभागों और संगठनों को उनकी क्षमता निर्माण योजनाएँ बनाने और लागू करने में मदद करता है, और इसे वार्षिक क्षमता निर्माण योजनाओं की स्वीकृति में प्रधानमंत्री की सार्वजनिक मानव संसाधन परिषद की सहायता के लिए बनाया गया था। राज्य आयोग और कर्मयोगी भारत के साथ त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापनों के ज़रिये जुड़ते हैं, जो अगस्त 2026 तक 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ हो चुके थे। रिपोर्टिंग वर्ष 2025-26 से केंद्र सरकार के सभी कर्मचारियों और अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों को हर वर्ष निर्धारित iGOT पाठ्यक्रम पूरे करने होते हैं, जो उनकी वार्षिक कार्य-निष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट में दर्ज होते हैं।
आगे की राह
सरकार के अनुसार अगले चरण में भूमिका-आधारित दक्षता ढाँचों को और गहरा किया जाएगा, बहुभाषी सामग्री बढ़ाई जाएगी और भूमिका-विशिष्ट क्षमता निर्माण योजनाओं को मज़बूत किया जाएगा। अगस्त 2026 में प्लेटफ़ॉर्म के 5,600 से अधिक पाठ्यक्रमों में से 1,433 हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में उपलब्ध थे, और 218 कृत्रिम बुद्धिमत्ता व उभरती प्रौद्योगिकियों पर थे। क्रियान्वयन की निगरानी कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली कैबिनेट सचिवालय समन्वय इकाई और सचिव (कार्मिक) की अध्यक्षता वाली संचालन समिति करती है, और कार्यक्रम का तृतीय-पक्ष मूल्यांकन व प्रभाव आकलन किया जा चुका है। पाठ्यक्रमों की संख्या 1,500 से अधिक (दिसंबर 2024) से बढ़कर 5,600 से अधिक (अगस्त 2026) हो गई।
आँकड़ों में
iGOT कर्मयोगी पर 1.7 करोड़+ पंजीकृत उपयोगकर्ता (12 अगस्त 2026), जो 49 लाख+ (6 दिसंबर 2024) और 1.41 करोड़+ (10 दिसंबर 2025) से बढ़े। 14.42 करोड़+ पाठ्यक्रम पूर्णताएँ और 23 भाषाओं में 5,600+ पाठ्यक्रम (अगस्त 2026)। 2020-21 से 2024-25 के लिए ₹510.86 करोड़ स्वीकृत, लगभग 46 लाख केंद्रीय कर्मचारियों के लिए। कर्मयोगी सप्ताह (19–27 अक्टूबर 2024) में 32.6 लाख पाठ्यक्रम पूर्णताएँ। 130+ क्षमता निर्माण योजनाएँ तैयार (अप्रैल 2026)। स्रोत: कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (लोकसभा उत्तर, 11 दिसंबर 2024 और 12 अगस्त 2026); PIB PRID 1650633, 2071690, 2130180, 2201532, 2248940 और 2294777।
आँकड़े इस तिथि तक: 12 अगस्त 2026
स्रोत: कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, लोकसभा उत्तर और PIB — iGOT कर्मयोगी प्लेटफ़ॉर्म पर पंजीकृत या जोड़े गए उपयोगकर्ता, करोड़, हर वर्ष बताई गई नवीनतम तिथि पर: 49 लाख से अधिक (6 दिसंबर 2024, लोकसभा), 1.41 करोड़ से अधिक (10 दिसंबर 2025, PIB) और 1.7 करोड़ से अधिक (12 अगस्त 2026, लोकसभा; लिंक की गई 5 अगस्त 2026 की PIB विज्ञप्ति में 1.70 करोड़)। DoPT एक ही गिनती के लिए 'पंजीकृत' और 'जोड़े गए' दोनों शब्दों का प्रयोग करता है। 2021–2023 के वर्षांत आँकड़े नहीं मिले। · लिंक