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बीमा और पेंशन

बीमा और पेंशन

जन सुरक्षा योजनाओं (2015) ने लाखों लोगों को बुनियादी बीमा व पेंशन दिया जिनके पास यह कभी नहीं था। पीएम जीवन ज्योति बीमा (₹436/वर्ष में जीवन कवर), पीएम सुरक्षा बीमा (₹20/वर्ष में दुर्घटना कवर) और अटल पेंशन योजना ने मिलकर लगभग 80 करोड़ सकल नामांकन पार किए, जन धन खातों से ऑटो-डेबिट। काउंटर संचयी जन सुरक्षा नामांकन दिखाता है।

LIC Of India Branch office at w:en:savda , dist-Jalgaon, Maharashtra, India
LIC Of India Branch office at w:en:savda , dist-Jalgaon, Maharashtra, India · AbhiRiksh · CC BY-SA 3.0 · Wikimedia Commons
0 → 80 cr
जन सुरक्षा नामांकन
₹20–436
वार्षिक प्रीमियम
~7.6 cr
अटल पेंशन ग्राहक
Jan Suraksha enrollments
Jan Suraksha enrollments
वर्षJan Suraksha enrollments
201510 crore
201615 crore
201720 crore
201825 crore
201930 crore
202035 crore
202145 crore
202255 crore
202365 crore
202475 crore
202580 crore
2015
0crore
Jan Suraksha enrollments
20152025
Since 2015
Added
+70 crore
2015
10 crore
2025
80 crore

यह क्यों मायने रखता है सस्ता, बड़े पैमाने का बीमा व पेंशन ग़रीब और अनौपचारिक-क्षेत्र परिवारों को मृत्यु, दुर्घटना व बुढ़ापे के विरुद्ध सुरक्षा-जाल देता है — नाममात्र लागत पर सामाजिक सुरक्षा।

  • जन सुरक्षा: 0 → ~80 करोड़ सकल नामांकन (2015→2025)
  • APY ~7.6 करोड़ ग्राहक; प्रीमियम ₹20–₹436/वर्ष
  • स्रोत: वित्त मंत्रालय

इतिहास

2015 में, केवल लगभग पाँचवें भारतीयों के पास कोई बीमा था, और अनौपचारिक-क्षेत्र कार्यबल के पास लगभग कोई पेंशन नहीं थी। इसे ठीक करने के लिए उस वर्ष तीन जन सुरक्षा योजनाएँ शुरू हुईं: PMJJBY (जीवन कवर), PMSBY (दुर्घटना कवर) व अटल पेंशन योजना। साल में केवल ₹20 जितनी कम क़ीमत पर और जन धन खातों से ऑटो-डेबिट, इन्होंने लगभग 80 करोड़ सकल नामांकन पार किए।

प्रमुख प्रभाव

इन योजनाओं ने उन परिवारों को बुनियादी सुरक्षा-जाल दिया जिनके पास कभी नहीं था। PMJJBY व PMSBY ने शोकग्रस्त परिवारों को लाखों दावे भुगतान किए, और अटल पेंशन योजना ने 7.6 करोड़ ग्राहक पार किए, गिग श्रमिकों, किसानों व दैनिक-मज़दूरों के लिए सेवानिवृत्ति बचत बनाते हुए। ये दुनिया के सबसे बड़े कम-लागत सामाजिक-सुरक्षा कार्यक्रमों में हैं।

यह कैसे काम करता है

भारत परतों में एक सुरक्षा जाल बना रहा है। आधार पर छोटी, सस्ती सरकारी सूक्ष्म-योजनाएँ हैं — कुछ रुपये प्रति वर्ष में ₹2 लाख जीवन कवर व ₹2 लाख दुर्घटना कवर, और अनौपचारिक श्रमिकों हेतु अटल पेंशन योजना। उसके ऊपर वाणिज्यिक बाज़ार है — निजी व राज्य बीमाकर्ता (LIC के नेतृत्व में), और बाज़ार-सम्बद्ध राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली। नियामक IRDAI बीमाकर्ताओं की देखरेख 'सबके लिए बीमा' के घोषित मिशन से करता है।

आगे की राह

बीमा अब भी भारतीयों के केवल एक पतले हिस्से तक पहुँचता है — पैठ GDP के 4% से कम — और अधिकांश लोगों के पास कम या कोई पेंशन नहीं। अगला क़दम कवर गहरा करना है: नियामक का '2047 तक सबके लिए बीमा' लक्ष्य, बैंकों व डिजिटल ऐप्स से बेचे जाने वाले सरल उत्पाद, क्षेत्र को अधिक विदेशी निवेश हेतु खोलना, और भारत के विशाल अनौपचारिक कार्यबल को औपचारिक पेंशन में लाना इससे पहले कि वृद्ध होती आबादी इसे तत्काल बना दे।

आगे का रास्ता

अगला क़दम कवरेज को गहरा करना है — बुनियादी नामांकन से वास्तव में पर्याप्त सुरक्षा की ओर बढ़ना, बेहतर भुगतान व दावा-प्रक्रिया की जागरूकता के साथ।

आँकड़ों में

0 → ~80 करोड़ सकल जन सुरक्षा नामांकन (2015→2025)। APY ~7.6 करोड़ ग्राहक। प्रीमियम ₹20–₹436/वर्ष; कवर ₹2 लाख तक। स्रोत: वित्त मंत्रालय।

स्रोत: Ministry of Finance — gross enrollments under PMJJBY, PMSBY & APY (crore), 2015–2025.