भारत 1970 के दशक से उपग्रह प्रक्षेपित करता आया है व 2023 में चंद्रमा पर उतरा — पर उसने कभी अपने रॉकेट से अपने अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष नहीं भेजे। गगनयान, 2018 में घोषित, इसे बदलने का कार्यक्रम है: एक मानव-रेटेड भारतीय प्रक्षेपण यान से मानवयुक्त कक्षीय मिशन।
गगनयान · मानव अंतरिक्ष उड़ान
गगनयान इसरो का कार्यक्रम है जो भारतीयों को भारतीय रॉकेट से भारतीय धरती से अंतरिक्ष भेजता है। मानवरहित परीक्षणों के बाद, पहली मानवयुक्त कक्षीय उड़ान 2027 के लिए लक्षित है — 2035 तक राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की ओर एक कदम। काउंटर कार्यक्रम की उपलब्धियाँ दर्शाता है (सांकेतिक)।

| वर्ष | Programme milestones |
|---|---|
| 2018 | 0 |
| 2019 | 1 |
| 2020 | 1 |
| 2021 | 2 |
| 2022 | 2 |
| 2023 | 3 |
| 2024 | 4 |
| 2025 | 4 |
| 2026 | 5 |
| 2027 | 6 |
यह क्यों मायने रखता है मानव अंतरिक्ष उड़ान बहुत कम देशों ने साधी है। सफल होने पर भारत स्वतंत्र रूप से अपने अंतरिक्ष यात्री भेजने वाला चौथा देश बनेगा, जीवन-रक्षक व पुनः-प्रवेश विशेषज्ञता बनाएगा, व एक पीढ़ी को प्रेरित करेगा — चंद्रयान व आदित्य का मानव पूरक।
- पहला मानवयुक्त गगनयान मिशन 2027 के लिए लक्षित, पृथ्वी की निम्न कक्षा तक।
- चार वायुसेना परीक्षण पायलट भारत के पहले अंतरिक्ष-यात्री उम्मीदवार (गगनयात्री) चुने गए।
- यह मानव-रेटेड LVM-3 रॉकेट का उपयोग करता है; मानवरहित व रोबोटिक (व्योममित्रा) परीक्षण पहले।
- दीर्घकालिक लक्ष्य: 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन, 2040 तक मानवयुक्त चंद्र मिशन।
इतिहास
उल्लेखनीय उपलब्धि
चार भारतीय वायुसेना परीक्षण पायलट पहले गगनयात्री के रूप में चयनित व प्रशिक्षित हुए हैं। इसरो मानवरहित परीक्षण उड़ानों की एक शृंखला चला रहा है — रोबोटिक अंतरिक्ष यात्री व्योममित्रा सहित — ताकि पहली मानव उड़ान से पहले चालक-दल सुरक्षा सिद्ध हो, जो अब 2027 के लिए लक्षित है।
यह कैसे काम करता है
एक मानव-रेटेड LVM-3 रॉकेट चालक-दल मॉड्यूल को पृथ्वी की निम्न कक्षा तक ले जाता है, जहाँ अंतरिक्ष यात्री पैराशूट-सहायित समुद्री लैंडिंग से पहले तीन दिन तक परिक्रमा करते हैं। नई प्रणालियाँ शून्य से बनानी पड़ीं: जीवन-रक्षा, निरस्तीकरण हेतु चालक-दल-निकास प्रणाली, व पुनः-प्रवेश हेतु ताप-कवच — मानव अंतरिक्ष उड़ान के सबसे कठिन हिस्से।
आगे की राह
केवल अमेरिका, रूस व चीन ने मनुष्यों को अपने रॉकेट से भेजा है; गगनयान भारत को चौथा बनाने का लक्ष्य रखता है। यह एक बड़े रोडमैप का मानव-आधार है — 2035 तक एक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन) व 2040 तक चंद्रमा पर एक भारतीय।
आगे का रास्ता
मानव अंतरिक्ष उड़ान में कोई शॉर्टकट नहीं — किसी व्यक्ति के उड़ने से पहले हर निरस्तीकरण परिदृश्य व जीवन-रक्षा विफलता का परीक्षण आवश्यक, इसीलिए समयरेखा 2022 से 2027 हुई। पहली उड़ान से परे, चुनौती एक बार के मिशन को एक निरंतर मानव-अंतरिक्ष क्षमता में बदलना है जिसकी एक अंतरिक्ष स्टेशन को आवश्यकता है।
आँकड़ों में
2027 — पहली मानवयुक्त उड़ान का लक्ष्य। 4 गगनयात्री चयनित। LVM-3 — मानव-रेटेड प्रक्षेपण यान। 2035 अंतरिक्ष स्टेशन व 2040 मानवयुक्त चंद्र मिशन — लंबा रोडमैप। स्रोत: इसरो, अंतरिक्ष विभाग, PIB।
स्रोत: ISRO — Gaganyaan human spaceflight programme, 2018→2027. Milestone count illustrative.