दशकों तक, सब्सिडी बिचौलियों व फ़र्ज़ी लाभार्थियों से लीक होती थी। 2013 से, और 2014 के बाद JAM त्रिमूर्ति से तेज़ी से बढ़ते हुए, भारत ने लाभ सीधे नागरिकों के बैंक खातों में देना शुरू किया।
प्रत्यक्ष लाभ अंतरण
प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) JAM त्रिमूर्ति — जन धन खाते, आधार व मोबाइल — का उपयोग सब्सिडी व कल्याण सीधे लोगों के बैंक खातों में भेजने के लिए करता है, बिचौलियों व 'भूत' लाभार्थियों को हटाते हुए। 2013 में DBT शुरू होने के बाद से, मार्च 2026 तक 320 केंद्रीय योजनाओं में संचयी अंतरण लगभग ₹51 लाख करोड़ तक पहुँचा, और DBT मिशन का अनुमान है कि DBT व संबंधित शासन सुधारों से मार्च 2025 तक लगभग ₹5.14 लाख करोड़ की बचत हुई। काउंटर संचयी DBT दिखाता है।

| वर्ष | संचयी DBT अंतरण (मार्च 2026 तक) |
|---|---|
| 2014 | 0.07 ₹ लाख करोड़ |
| 2015 | 0.46 ₹ लाख करोड़ |
| 2016 | 1.08 ₹ लाख करोड़ |
| 2017 | 1.83 ₹ लाख करोड़ |
| 2018 | 3.74 ₹ लाख करोड़ |
| 2019 | 7.04 ₹ लाख करोड़ |
| 2020 | 10.85 ₹ लाख करोड़ |
| 2021 | 16.38 ₹ लाख करोड़ |
| 2022 | 22.68 ₹ लाख करोड़ |
| 2023 | 29.84 ₹ लाख करोड़ |
| 2024 | 36.76 ₹ लाख करोड़ |
| 2025 | 43.65 ₹ लाख करोड़ |
| 2026 | 51.17 ₹ लाख करोड़ |
यह क्यों मायने रखता है लोगों को सीधे भुगतान का अर्थ है कम भ्रष्टाचार, तेज़ राहत और गरिमा — पैसा बिचौलियों की श्रृंखला नहीं, सही व्यक्ति तक पहुंचता है।
- संचयी DBT ₹0.07 → ₹51.2 लाख करोड़ (2013-14 → 2025-26)
- 320 योजनाएँ; DBT व संबंधित सुधारों से ~₹5.14 लाख करोड़ अनुमानित लाभ (मार्च 2025 तक)
- स्रोत: DBT मिशन (DBT भारत पोर्टल)


इतिहास
लीक रोकना
DBT अब 320 केंद्रीय योजनाओं — रसोई गैस सब्सिडी से पेंशन, छात्रवृत्ति, मज़दूरी व किसान आय (PM-KISAN) — को कवर करता है। मार्च 2026 तक संचयी अंतरण लगभग ₹51 लाख करोड़ तक पहुँचा, और DBT मिशन का अनुमान है कि DBT व संबंधित शासन सुधारों से मार्च 2025 तक लगभग ₹5.14 लाख करोड़ की बचत हुई।
यह कैसे काम करता है
DBT JAM त्रिमूर्ति पर चलता है — एक जन धन बैंक खाता, एक आधार संख्या और एक मोबाइल फ़ोन, आपस में जुड़े। जब सरकार किसी को सब्सिडी, पेंशन या मज़दूरी देती है, तो पैसा अधिकारियों की परतों से गुज़रने के बजाय सीधे उसके आधार-लिंक्ड खाते में पहुँचता है। चूँकि आधार दोहरे व 'फ़र्ज़ी' लाभार्थियों को हटाता है, पुरानी योजनाओं का रिसाव तेज़ी से घटता है।
आगे की राह
दिशा यह है कि भारत के अधिक कल्याण को एक एकल, वास्तविक-समय रेल से भेजा जाए। मार्च 2026 तक 320 केंद्रीय योजनाओं में लगभग ₹51 लाख करोड़ DBT से बह चुका था; अगले क़दम हैं अधिक राज्य योजनाओं को शामिल करना, बहिष्करण त्रुटियाँ घटाना ताकि कोई वास्तविक लाभार्थी न छूटे, और उसी रेल से तुरंत आपदा व फ़सल-हानि भुगतान।
आंकड़ों में
संचयी DBT ₹0.07 → ₹51.2 लाख करोड़ (2013-14 → 2025-26); 320 योजनाएँ; DBT व संबंधित सुधारों से मार्च 2025 तक ~₹5.14 लाख करोड़ अनुमानित लाभ। स्रोत: DBT मिशन (DBT भारत पोर्टल)।
आँकड़े इस तिथि तक: वित्त वर्ष 2025-26 (DBT भारत पोर्टल, 14 सितंबर 2026 को देखा गया)
स्रोत: DBT मिशन, मंत्रिमंडल सचिवालय — केंद्रीय प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, नकद व वस्तु रूप में (₹ लाख करोड़): DBT भारत पोर्टल के वर्ष-वार आँकड़ों का संचयी योग (लिंक), वित्त वर्ष 2013-14 से 2025-26। सितंबर 2026 में पोर्टल 320 योजनाओं में ₹53.26 लाख करोड़ का संचयी अंतरण दिखा रहा था। · लिंक