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प्रत्यक्ष लाभ अंतरण

प्रत्यक्ष लाभ अंतरण

प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) JAM त्रिमूर्ति — जन धन खाते, आधार व मोबाइल — का उपयोग सब्सिडी व कल्याण सीधे लोगों के बैंक खातों में भेजने के लिए करता है, बिचौलियों व 'भूत' लाभार्थियों को हटाते हुए। 2014 से, संचयी अंतरण 1,200+ योजनाओं में ₹42 लाख करोड़ से अधिक हो गए, और सरकार का अनुमान है कि लीकेज रोककर लगभग ₹3.5 लाख करोड़ बचाए गए। काउंटर संचयी DBT दिखाता है।

100 ruppees note and 2000 ruppees note
100 ruppees note and 2000 ruppees note · Monito - Money Transfer Comparison · CC BY 2.0 · Wikimedia Commons
₹42 L cr
संचयी DBT अंतरण
1,200+
DBT पर योजनाएँ
₹3.5 L cr
लीकेज बचत
Cumulative DBT transferred
Cumulative DBT
वर्षCumulative DBT
20141 ₹ lakh cr
20152 ₹ lakh cr
20164 ₹ lakh cr
20177 ₹ lakh cr
201811 ₹ lakh cr
201916 ₹ lakh cr
202022 ₹ lakh cr
202128 ₹ lakh cr
202233 ₹ lakh cr
202338 ₹ lakh cr
202442 ₹ lakh cr
202544 ₹ lakh cr
2014
0₹ lakh cr
Cumulative DBT
20142025
Since 2014
Added
+43 ₹ lakh cr
2014
1 ₹ lakh cr
2025
44 ₹ lakh cr

यह क्यों मायने रखता है लोगों को सीधे भुगतान का अर्थ है कम भ्रष्टाचार, तेज़ राहत और गरिमा — पैसा बिचौलियों की श्रृंखला नहीं, सही व्यक्ति तक पहुंचता है।

  • संचयी DBT ~₹1 → ~₹42 लाख करोड़
  • 1,200+ योजनाएं; ~₹3.5 लाख करोड़ लीकेज बचत
  • स्रोत: DBT मिशन

इतिहास

दशकों तक, सब्सिडी बिचौलियों व फ़र्ज़ी लाभार्थियों से लीक होती थी। 2013 से, और 2014 के बाद JAM त्रिमूर्ति से तेज़ी से बढ़ते हुए, भारत ने लाभ सीधे नागरिकों के बैंक खातों में देना शुरू किया।

लीक रोकना

DBT अब 1,200+ योजनाओं — रसोई गैस सब्सिडी से पेंशन, छात्रवृत्ति, मज़दूरी व किसान आय (PM-KISAN) — को कवर करता है। संचयी अंतरण ₹42 लाख करोड़ पार, और भूत/डुप्लिकेट लाभार्थी हटाकर ~₹3.5 लाख करोड़ बचत का अनुमान।

यह कैसे काम करता है

DBT JAM त्रिमूर्ति पर चलता है — एक जन धन बैंक खाता, एक आधार संख्या और एक मोबाइल फ़ोन, आपस में जुड़े। जब सरकार किसी को सब्सिडी, पेंशन या मज़दूरी देती है, तो पैसा अधिकारियों की परतों से गुज़रने के बजाय सीधे उसके आधार-लिंक्ड खाते में पहुँचता है। चूँकि आधार दोहरे व 'फ़र्ज़ी' लाभार्थियों को हटाता है, पुरानी योजनाओं का रिसाव तेज़ी से घटता है।

आगे की राह

दिशा यह है कि भारत के अधिक कल्याण को एक एकल, वास्तविक-समय रेल से भेजा जाए। 300 से अधिक योजनाओं में ₹40 लाख करोड़ से अधिक पहले ही DBT से बह चुका है; अगले क़दम हैं अधिक राज्य योजनाओं को शामिल करना, बहिष्करण त्रुटियाँ घटाना ताकि कोई वास्तविक लाभार्थी न छूटे, और उसी रेल से तुरंत आपदा व फ़सल-हानि भुगतान।

आगे का रास्ता

अगला क़दम आख़िरी दूरियाँ पाटना है — सटीक डेटा, कार्यशील बैंक लिंक व कनेक्टिविटी ताकि अंतरण सबको मिलें, सबसे ग़रीब व दूरदराज़ सहित, बिना बहिष्करण त्रुटियों के।

आंकड़ों में

संचयी DBT ~₹1 → ~₹42 लाख करोड़; 1,200+ योजनाएं; ~₹3.5 लाख करोड़ बचत। स्रोत: DBT मिशन।

स्रोत: DBT Mission — cumulative direct benefit transfers (₹ lakh crore), 2014–2025.