जब कोविड-19 आया, भारत ने दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चलाया। 16 जनवरी 2021 को शून्य से शुरू होकर, इसने लगभग दो वर्षों में लगभग 220 करोड़ ख़ुराकें दीं, अधिकांश नि:शुल्क। दो मुख्य टीके — कोविशील्ड (सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा निर्मित) व स्वदेशी कोवैक्सिन — भारत में बने, जिसने दर्जनों देशों को टीके भी निर्यात किए।
कोविड टीकाकरण · को-विन
भारत ने दुनिया का सबसे बड़ा कोविड-19 टीकाकरण अभियान चलाया। जनवरी 2021 में शून्य से शुरू होकर, इसने दो वर्षों में लगभग 220 करोड़ ख़ुराकें दीं — काफ़ी हद तक नि:शुल्क — पंजीकरण, समय-निर्धारण व प्रमाणपत्रों के लिए घर में बने को-विन डिजिटल मंच के माध्यम से समन्वित। काउंटर संचयी टीका ख़ुराकें दिखाती है।

| वर्ष | दी गई वैक्सीन खुराकें |
|---|---|
| 2020 | 0 करोड़ |
| 2021 | 145 करोड़ |
| 2023 | 221 करोड़ |
| बिंदुदार पट्टियाँ वे वर्ष हैं जिनके आँकड़े स्रोत प्रकाशित नहीं करता; प्रकाशित वर्षों के बीच का आकार खींचा गया है, मापा नहीं गया। | |
यह क्यों मायने रखता है बड़े पैमाने पर, तेज़, नि:शुल्क टीकाकरण ने जानें बचाईं और अर्थव्यवस्था फिर खोली, और को-विन ने आबादी-पैमाने पर सार्वजनिक स्वास्थ्य चलाने की भारत की क्षमता दिखाई।
- टीका ख़ुराकें: 0 → ~220 करोड़ (2021→2023)
- दुनिया का सबसे बड़ा अभियान; को-विन मंच; दो स्वदेशी टीके
- स्रोत: स्वास्थ्य मंत्रालय / को-विन
इतिहास
प्रमुख विशेषता
अभियान को-विन पर चला, एक घर में बना डिजिटल मंच जिसने एक अरब से अधिक लोगों के लिए पंजीकरण, अपॉइंटमेंट समय-निर्धारण व QR-सत्यापित प्रमाणपत्र संभाले — डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का एक कारनामा जिसे दुनिया भर में देखा गया। भारत ने को-विन सॉफ्टवेयर को वैश्विक सार्वजनिक वस्तु के रूप में अन्य देशों के साथ साझा करने की पेशकश की।
यह कैसे काम करता है
भारत ने महामारी टीकाकरण एक डिजिटल-प्रथम, निःशुल्क, सरकार-नेतृत्व अभियान के रूप में चलाया। को-विन प्लेटफ़ॉर्म ने पंजीकरण, अपॉइंटमेंट और, अहम, हर खुराक हेतु QR-सत्यापित डिजिटल प्रमाणपत्र संभाला — एक अरब+ लोगों को दो (और बाद में बूस्टर) खुराकों में ट्रैक करते हुए। टीके, अधिकांश भारत में बने (कोविशील्ड व स्वदेशी कोवैक्सिन), सरकारी केंद्रों पर निःशुल्क दिए गए।
आगे की राह
अभियान ने 220 करोड़ से अधिक खुराकें दीं — इतिहास का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान — और को-विन एक मॉडल बना जिसे भारत अब अन्य देशों को स्वास्थ्य हेतु 'डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना' के रूप में प्रदान करता है। इसका स्थायी लाभ राष्ट्रव्यापी स्वास्थ्य अभियान डिजिटल रूप से चलाने की सिद्ध क्षमता है — भविष्य के टीकाकरण व जन-स्वास्थ्य आपात स्थितियों हेतु एक आदर्श।
आँकड़ों में
0 → ~220 करोड़ ख़ुराकें (2021→2023)। दुनिया का सबसे बड़ा अभियान; को-विन पर चला। दो भारत-निर्मित टीके; 90+ देशों को निर्यात। स्रोत: स्वास्थ्य मंत्रालय, को-विन।
आँकड़े इस तिथि तक: 19 मई 2023 तक
स्रोत: स्वास्थ्य मंत्रालय / Co-WIN, PIB के माध्यम से (आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23) — COVID-19 वैक्सीन की संचयी खुराकें (करोड़), 2021–2023: 31 दिसंबर 2021 को शाम 7 बजे तक 145,09,24,269 खुराकें (PIB); 6 जनवरी 2023 तक 220 करोड़ से अधिक खुराकें; 19 मई 2023 तक 220.66 करोड़, PIB पर मिला स्वास्थ्य मंत्रालय का नवीनतम बुलेटिन (लिंक)। 2022 के अंत का कोई आधिकारिक कुल आँकड़ा नहीं मिला, इसलिए चार्ट में 2022 का बिंदु नहीं है। · लिंक