भारत 1881 से हर दस वर्ष में अपने लोगों की गणना करता आया है — अकाल, युद्ध व विभाजन के बीच एक अटूट शृंखला। 2021 की जनगणना इसे तोड़ने वाली पहली थी, कोविड-19 से विलंबित व फिर वर्षों टली। भारत एक दशक से अधिक 2011 के आँकड़ों पर योजना बनाता रहा।
जनगणना एवं जनसांख्यिकी
भारत की दशवार्षिक जनगणना दुनिया के सबसे बड़े शांतिकालीन कार्यों में से एक है — हर व्यक्ति की पूरी गिनती। अंतिम 2011 में थी; अगली, 1 मार्च 2027 की संदर्भ तिथि हेतु अधिसूचित, भारत की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना व 1931 के बाद जाति गिनने वाली पहली होगी। काउंटर भारत की अनुमानित जनसंख्या दिखाता है (सांकेतिक)।

| वर्ष | Population (est.) |
|---|---|
| 2011 | 121 crore |
| 2014 | 127 crore |
| 2017 | 132 crore |
| 2020 | 138 crore |
| 2023 | 141 crore |
| 2027 | 142 crore |
यह क्यों मायने रखता है लगभग हर चीज़ जनगणना के आँकड़ों पर निर्भर है — कल्याण लक्ष्यीकरण, योजना, किसी राज्य को मिलने वाली सीटों का हिस्सा, व अंततः निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन। एक दशक से अधिक 2011 के डेटा पर चलने से नीति देश के पुराने नक्शे के साथ काम करती रही; एक ताज़ा, डिजिटल, जाति-गणना जनगणना उस आधार को नया करती है।
- अगली जनगणना की संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 है (हिम-आच्छादित क्षेत्रों हेतु 1 अक्टूबर 2026)।
- यह दो चरणों में चलेगी, कुल ~₹11,718 करोड़ परिव्यय के साथ।
- यह भारत की पहली डिजिटल जनगणना है, ऐप से स्व-गणना विकल्प के साथ।
- 1931 के बाद पहली बार, यह SC/ST श्रेणियों से परे जाति की गणना करेगी।

इतिहास
उल्लेखनीय उपलब्धि
2025 में सरकार ने अगली जनगणना अधिसूचित की, 1 मार्च 2027 की संदर्भ तिथि के साथ (हिम-आच्छादित हिमालयी क्षेत्रों हेतु 1 अक्टूबर 2026)। यह भारत की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना होगी — व 1931 के बाद पहली बार, यह SC/ST श्रेणियों से परे जाति की गणना करेगी।
यह कैसे काम करता है
गणना दो चरणों में चलती है: गृह-सूचीकरण (हर आवास व उसकी सुविधाओं का मानचित्रण), फिर जनसंख्या गणना (हर व्यक्ति की गिनती)। गणनाकार एक मोबाइल ऐप उपयोग करते हैं, व परिवार ऑनलाइन स्व-गणना चुन सकते हैं — कागज़ी अनुसूचियों से एक बड़ा बदलाव — कुल ~₹11,718 करोड़ परिव्यय के साथ।
आगे की राह
जनगणना डेटा लगभग हर चीज़ का आधार है: किसी राज्य को कितनी सीटें मिलती हैं, कल्याण व अवसंरचना कहाँ जाती है, व — अंततः — निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन तथा महिला आरक्षण। ताज़ा, सूक्ष्म डेटा योजना को 15-वर्ष पुराने चित्र के बजाय वास्तविकता से मिलाने देता है।
आगे का रास्ता
~140 करोड़ लोगों की गणना एक विशाल कार्य है, व इसे पहली बार डिजिटल रूप से करना — साथ ही एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील जाति-गणना जोड़ना — सटीकता व भरोसे पर दांव बढ़ाता है। जाति डेटा कैसे एकत्र, सत्यापित व उपयोग होता है, ध्यान से देखा जाएगा, वैसे ही अंततः इससे जुड़ा परिसीमन।
आँकड़ों में
1 मार्च 2027 — जनगणना संदर्भ तिथि। ~₹11,718 करोड़ कुल परिव्यय। दो चरण — गृह-सूचीकरण, फिर जनसंख्या गणना। पहली डिजिटल जनगणना, स्व-गणना के साथ। 1931 के बाद पहली जाति गणना। स्रोत: भारत के महापंजीयक, PIB।
स्रोत: Registrar General of India / UN projections — population estimate; next census reference date 1 Mar 2027. Curve illustrative.