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सीमा सुरक्षा व स्मार्ट फ़ेंसिंग

सीमा सुरक्षा व स्मार्ट फ़ेंसिंग

भारत की ज़मीनी सीमाएँ रेगिस्तानों, पहाड़ों, दलदलों और नदियों से होकर हज़ारों किलोमीटर तक फैली हैं, और इनका बड़ा हिस्सा केवल बाड़ से नहीं घेरा जा सकता। 2018 से इसका उत्तर बाड़ के ऊपर तकनीक रहा है: व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली के तहत स्मार्ट फ़ेंसिंग सेंसर, रडार और फ़ाइबर-ऑप्टिक लाइनों को एक नियंत्रण कक्ष से जोड़ती है, और DRDO ने भारत की अपनी ड्रोन-रोधी प्रणालियाँ बनाई हैं, जिनमें 2025 में ड्रोन झुंड को गिराने वाला 30 kW लेज़र भी है। फ़रवरी 2025 तक 4,096.7 किमी लंबी भारत–बांग्लादेश सीमा में से 3,232 किमी पर बाड़ लग चुकी थी। टाइमलाइन प्रमुख पड़ाव दिखाती है।

रात में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से दिखती, रोशनी से जगमगाती भारत–पाकिस्तान सीमा।
रात में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से दिखती, रोशनी से जगमगाती भारत–पाकिस्तान सीमा। · ISS Expedition 28 crew · Public domain · Wikimedia Commons
~71 किमी
स्मार्ट-फ़ेंस पायलट (2018–19)
30 kW
ड्रोन झुंड गिराने वाला DRDO लेज़र
1,954
VVP-II के तहत सीमावर्ती गाँव
भारत–बांग्लादेश सीमा पर बाड़ (फ़रवरी 2025)
2018
सीमा पर स्मार्ट फेंसिंग की शुरुआत
व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली (CIBMS) के तहत जम्मू में भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्मार्ट फेंसिंग की पहली दो पायलट परियोजनाएँ शुरू हुईं।
2019
BOLD-QIT से नदी सीमा की निगरानी
2021
भारत की अपनी ड्रोन-रोधी प्रणाली
2023
वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम
2025
30 किलोवाट का लेजर, और हर भूमि सीमा पर गाँव
2026
असम में VVP-II की शुरुआत
2018
1उपलब्धियाँ
20182026
नवीनतम
सीमा पर स्मार्ट फेंसिंग की शुरुआत
व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली (CIBMS) के तहत जम्मू में भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्मार्ट फेंसिंग की पहली दो पायलट परियोजनाएँ शुरू हुईं।

यह क्यों मायने रखता है सुरक्षित सीमाएँ घुसपैठ, तस्करी, मानव तस्करी और सीमा-पार आतंकवाद को रोकती हैं, और सीमावर्ती गाँवों को खाली होने के बजाय बढ़ने देती हैं। तकनीक सुरक्षा बलों को लंबे, कठिन इलाक़ों पर चौबीसों घंटे नज़र रखने देती है, और देश में बनी ड्रोन-रोधी प्रणालियाँ उस ख़तरे का जवाब देती हैं जिसे अकेली बाड़ नहीं रोक सकती।

  • फ़रवरी 2025 तक 4,096.7 किमी लंबी भारत–बांग्लादेश सीमा में से 3,232 किमी पर बाड़ लग चुकी थी।
  • स्मार्ट फ़ेंसिंग (CIBMS) थर्मल इमेजर, रडार, ज़मीनी सेंसर, नदियों के लिए सोनार और फ़ाइबर-ऑप्टिक सेंसर को एक कमांड-एवं-नियंत्रण प्रणाली से जोड़ती है।
  • पहले स्मार्ट-फ़ेंस पायलट लगभग 71 किमी में थे; अगले चरणों में लगभग 1,955 किमी ऐसी सीमा की योजना है जिस पर भौतिक बाड़ नहीं लग सकती।
  • DRDO के 30 kW लेज़र (Mk-II(A)) ने अप्रैल 2025 में कुरनूल में एक फ़िक्स्ड-विंग ड्रोन और ड्रोन झुंड को गिराया।
  • वाइब्रेंट विलेजेज़ प्रोग्राम-II (₹6,839 करोड़) भारत की ज़मीनी सीमाओं के 1,954 गाँवों को शामिल करता है।

इतिहास

भारत की ज़मीनी सीमाएँ सात पड़ोसियों के साथ 15,106.7 किमी तक रेगिस्तानों, पहाड़ों, जंगलों, दलदलों और नदियों से होकर फैली हैं। दशकों तक इनकी रखवाली मुख्यतः जवानों और भौतिक बाड़ से होती रही, और बाड़ नदी, दलदल या भूस्खलन वाली ढलान पर नहीं टिक सकती। इन खाली हिस्सों का इस्तेमाल घुसपैठ, तस्करी और मानव तस्करी के लिए होता रहा, और हाल में हथियार व नशीले पदार्थ ले जाने वाले ड्रोन भी आए।

उल्लेखनीय उपलब्धि

सितंबर 2018 में जम्मू में भारत–पाकिस्तान सीमा पर पहले स्मार्ट फ़ेंस पायलट शुरू हुए, और मार्च 2019 में असम के धुबरी में BOLD-QIT ने भारत–बांग्लादेश सीमा के 61 किमी नदी-क्षेत्र की निगरानी शुरू की। दोनों पायलट मिलकर लगभग 71 किमी में थे और उन्होंने इस प्रणाली को लगभग 1,955 किमी ऐसी सीमा तक ले जाने का रास्ता बनाया जिस पर भौतिक बाड़ नहीं लग सकती।

यह कैसे काम करता है

व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली (CIBMS) बाड़ के ऊपर तकनीक की परत जोड़ती है: थर्मल इमेजर, इन्फ़्रारेड व लेज़र घुसपैठ-अलार्म, एयरोस्टैट, ज़मीनी सेंसर, रडार, नदी-क्षेत्रों के लिए सोनार और फ़ाइबर-ऑप्टिक सेंसर, सब एक कमांड-एवं-नियंत्रण केंद्र से जुड़े हैं, ताकि कुछ भी पार होते ही त्वरित प्रतिक्रिया दल हरकत में आ सके। ड्रोन के विरुद्ध, DRDO की स्वदेशी प्रणाली ड्रोन का पता लगाती है, उसके लिंक जाम करती है (सॉफ़्ट किल) या लेज़र से उसे नष्ट करती है (हार्ड किल)।

आगे की राह

भारत–बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगातार बढ़ रही है, और अप्रैल 2025 में DRDO के 30 kW Mk-II(A) लेज़र ने दिखाया कि वह ड्रोन झुंडों को गिरा सकता है, जिससे भारत अमेरिका, चीन और रूस की पंक्ति में आ गया। सुरक्षा के साथ, वाइब्रेंट विलेजेज़ प्रोग्राम-II (₹6,839 करोड़) 17 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के 1,954 सीमावर्ती गाँवों में सड़कें, स्कूल, आजीविका और कनेक्टिविटी बना रहा है, ताकि लोग सीमा पर बसे रहें और आगे बढ़ें।

आँकड़ों में

4,096.7 किमी भारत–बांग्लादेश सीमा में से 3,232 किमी पर बाड़ (फ़रवरी 2025)। ~71 किमी स्मार्ट-फ़ेंस पायलट (2018–19), और जहाँ बाड़ संभव नहीं वहाँ ~1,955 किमी की योजना। ड्रोन झुंड गिराने वाला 30 kW DRDO लेज़र (अप्रैल 2025)। वाइब्रेंट विलेजेज़ प्रोग्राम-II के तहत 1,954 गाँव (₹6,839 करोड़)। स्रोत: गृह मंत्रालय, DRDO, पीआईबी, आकाशवाणी।

आँकड़े इस तिथि तक: 4 फ़रवरी 2025 को लोकसभा में दिए गए उत्तर के अनुसार

स्रोत: गृह मंत्रालय / DRDO / PIB — सीमा पर बाड़बंदी, स्मार्ट बाड़बंदी (CIBMS), ड्रोन-रोधी और सीमावर्ती गाँवों से जुड़ी उपलब्धियाँ, 2018–2026। · लिंक