अनुच्छेद 370 संविधान में 1949 में जम्मू-कश्मीर हेतु एक अस्थायी प्रावधान के रूप में आया, और अनुच्छेद 35A 1954 में राष्ट्रपति के आदेश से जोड़ा गया। दोनों ने राज्य को अपना संविधान व ध्वज दिया, और अन्य भारतीयों को वहाँ संपत्ति ख़रीदने या कुछ नौकरियाँ रखने से रोका। केंद्रीय क़ानून — शिक्षा का अधिकार व कई भ्रष्टाचार-रोधी तथा कल्याण क़ानून सहित — स्वतः लागू नहीं होते थे। जो अस्थायी के रूप में लिखा गया, वह सात दशक चला।
अनुच्छेद 370 व जम्मू-कश्मीर एकीकरण
5 अगस्त 2019 को सरकार ने वह विशेष संवैधानिक दर्जा समाप्त किया जो 1954 से जम्मू-कश्मीर पर लागू था। अनुच्छेद 370 निरस्त हुआ और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम ने दो केंद्रशासित प्रदेश बनाए — जम्मू-कश्मीर, और लद्दाख। शिक्षा का अधिकार, भ्रष्टाचार-रोधी क़ानून व अनुसूचित जाति/जनजाति संरक्षण सहित 890 से अधिक केंद्रीय क़ानून पहली बार इस क्षेत्र पर लागू हुए। दिसंबर 2023 में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से इस निर्णय को बरक़रार रखा। यह टाइमलाइन एकीकरण व उसके बाद की यात्रा दिखाती है।

यह क्यों मायने रखता है एक राष्ट्र, एक संविधान 1950 से एक संस्थापक आकांक्षा रही थी। एकीकरण ने जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को वही अधिकार दिए जो हर दूसरे भारतीय के पास हैं — शिक्षा, आरक्षण, भ्रष्टाचार-रोधी क़ानून व केंद्रीय कल्याण योजनाएँ — और क्षेत्र को उस निवेश, पर्यटन तथा राष्ट्रीय रेल व सड़क संपर्क के लिए खोला जिसे अलग दर्जे ने सात दशकों तक रोके रखा था।
- 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 निरस्त व जम्मू-कश्मीर दो केंद्रशासित प्रदेशों में पुनर्गठित।
- 890 से अधिक केंद्रीय क़ानून जम्मू-कश्मीर तक विस्तारित, शिक्षा का अधिकार व अनुसूचित जाति/जनजाति संरक्षण सहित।
- सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने दिसंबर 2023 में सर्वसम्मति से निरसन बरक़रार रखा।
- 2024 में दशकों की सर्वाधिक मतदान दर व पुनर्गठन के बाद पहले विधानसभा चुनाव।
- चिनाब पुल — दुनिया का सबसे ऊँचा रेल आर्च — ने 2025 में कश्मीर को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क पर लाया।




इतिहास
उल्लेखनीय उपलब्धि
5 अगस्त 2019 को सरकार एक संकल्प व जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम लाई। अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी हुआ, अनुच्छेद 35A उसके साथ गिरा, और राज्य दो केंद्रशासित प्रदेशों में पुनर्गठित हुआ — जम्मू-कश्मीर (विधायिका सहित) व लद्दाख। श्रीनगर के प्रशासन से अलग होने की लद्दाख की पुरानी माँग उसी क़दम में पूरी हुई।
यह कैसे काम करता है
विशेष दर्जा हटने के बाद, 890 से अधिक केंद्रीय क़ानून अब जम्मू-कश्मीर में लागू हैं। इसमें शिक्षा का अधिकार, सूचना का अधिकार, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, अनुसूचित जाति/जनजाति व अन्य कमज़ोर वर्गों हेतु आरक्षण, तथा आयुष्मान भारत व पीएम-किसान जैसी केंद्रीय कल्याण योजनाएँ शामिल हैं। भूमि व औद्योगिक नीति पहली बार शेष भारत से निवेश हेतु खुली, और परिसीमन आयोग ने जम्मू तथा पहले अप्रतिनिधित समुदायों को उचित भार देने हेतु निर्वाचन क्षेत्र पुनर्निर्धारित किए।
आगे की राह
दिसंबर 2023 में सर्वोच्च न्यायालय की पाँच-न्यायाधीश संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से निरसन बरक़रार रखा, यह मानते हुए कि जम्मू-कश्मीर ने संघ से अलग आंतरिक संप्रभुता का कोई तत्व नहीं रखा। 2024 में केंद्रशासित प्रदेश ने लोकसभा व विधानसभा चुनावों में दशकों की सर्वाधिक मतदान दर के साथ मतदान किया, बिना किसी चुनाव-संबंधी हिंसा के — पुनर्गठन के बाद पहले विधानसभा चुनाव। 2025 में उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक पूरा हुआ, चिनाब पुल सहित, दुनिया का सबसे ऊँचा रेल आर्च।
आँकड़ों में
5 अगस्त 2019 — अनुच्छेद 370 निरस्त। 890+ केंद्रीय क़ानून जम्मू-कश्मीर तक विस्तारित। 2 केंद्रशासित प्रदेश सृजित। दिसंबर 2023 — सर्वोच्च न्यायालय ने सर्वसम्मति से बरक़रार रखा। 2024 — दशकों की सर्वाधिक मतदान दर। चिनाब पुल — दुनिया का सबसे ऊँचा रेल आर्च, 2025 में खुला। स्रोत: गृह मंत्रालय, पीआईबी, भारत का सर्वोच्च न्यायालय।
आँकड़े इस तिथि तक: 5 अगस्त 2019
स्रोत: MHA / PIB / भारत का सर्वोच्च न्यायालय — जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 और उसके बाद विकास की प्रमुख उपलब्धियाँ। · लिंक