एक रैंक एक पेंशन — समान रैंक व समान सेवा-अवधि हेतु समान पेंशन, चाहे सैनिक कभी भी सेवानिवृत्त हुआ हो — 1970 के दशक से माँगी जा रही थी। इसके बिना, 1990 में सेवानिवृत्त एक जवान 2010 में सेवानिवृत्त समान रैंक व सेवा वाले से काफ़ी कम पाता था। लगातार सरकारों ने सिद्धांत स्वीकारा पर लागू नहीं किया।
सशस्त्र बल कल्याण
एक रैंक एक पेंशन — चार दशकों से लंबित माँग — 2015 में स्वीकृत व जुलाई 2014 से लागू हुई, जिसने समान रैंक व सेवा-अवधि के पूर्व सैनिकों को सेवानिवृत्ति तिथि की परवाह किए बिना समान पेंशन दी। इससे 25 लाख से अधिक पूर्व सैनिकों व उनके परिवारों को लाभ हुआ, जुलाई 2019 और जुलाई 2024 से संशोधनों के साथ। इसके साथ आया राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (2019), प्रमुख रक्षा अध्यक्ष का पद (दिसंबर 2019 में सृजित) व अग्निपथ भर्ती योजना।

यह क्यों मायने रखता है 1990 में सेवानिवृत्त एक सैनिक 2010 में सेवानिवृत्त समान रैंक वाले से कहीं कम पा रहा था। ओआरओपी ने इसे समाप्त किया। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक ने भारत को, स्वतंत्रता के बाद पहली बार, एक राष्ट्रीय स्मारक दिया जो 1947 से युद्ध में मारे गए हर सैनिक का नाम अंकित करता है — एक ऋण जो सात दशकों तक अदत्त रहा।
- ओआरओपी से 25 लाख से अधिक पूर्व सैनिकों व उनके परिवारों को लाभ; पहले आदेश के तहत बकाया ₹10,795 करोड़।
- ओआरओपी के तीसरे संशोधन (जुलाई 2024) के तहत 15 दिनों के भीतर 20.17 लाख लाभार्थियों को ₹1,224.76 करोड़ का भुगतान हुआ (रक्षा मंत्रालय, दिसंबर 2025)।
- राष्ट्रीय युद्ध स्मारक 25 फ़रवरी 2019 को राष्ट्र को समर्पित, 1947 से शहीद सैनिकों के नाम सहित।
- प्रमुख रक्षा अध्यक्ष का पद 24 दिसंबर 2019 को सृजित; तीसरे CDS ने 31 मई 2026 को पदभार संभाला।
- रक्षा बजट लगभग ₹2.3 लाख करोड़ (2014-15) से बढ़कर ₹6.8 लाख करोड़ से अधिक (2025-26)।




इतिहास
उल्लेखनीय उपलब्धि
ओआरओपी नवंबर 2015 में स्वीकृत व 1 जुलाई 2014 से प्रभावी हुई। इससे 25 लाख से अधिक पूर्व सैनिकों व उनके परिवारों को लाभ हुआ, और पेंशन 1 जुलाई 2019 से और फिर जुलाई 2024 से संशोधित हुई; इस तीसरे संशोधन के तहत 15 दिनों के भीतर 20.17 लाख लाभार्थियों को ₹1,224.76 करोड़ का भुगतान हुआ। एक चार-दशक पुरानी माँग बंद हुई।
यह कैसे काम करता है
ओआरओपी के तहत, पेंशन एक आधार वर्ष में समान रैंक व सेवा-अवधि पर सेवानिवृत्त होने वालों की न्यूनतम व अधिकतम पेंशन के औसत पर तय होती है, और आवधिक रूप से संशोधित होती है ताकि अंतर फिर न खुले। बकाया क़िस्तों में चुकाया गया, पारिवारिक पेंशनभोगियों व वीरता-पुरस्कार विजेताओं को पूरी राशि एक साथ।
आगे की राह
अन्य लंबे-लंबित काम भी हुए। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक 2019 में इंडिया गेट पर खुला, 1947 से युद्ध में मारे गए सैनिकों के नाम अंकित करते हुए — स्वतंत्रता के बाद अपनी तरह का पहला राष्ट्रीय स्मारक। प्रमुख रक्षा अध्यक्ष का पद 24 दिसंबर 2019 को सृजित हुआ। रक्षा बजट 2014-15 के लगभग ₹2.3 लाख करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹6.8 लाख करोड़ से अधिक हुआ।
आँकड़ों में
ओआरओपी से 25 लाख+ पूर्व सैनिक व परिवार लाभान्वित, 1 जुलाई 2014 से प्रभावी। पहले आदेश के तहत ₹10,795 करोड़ बकाया; ओआरओपी-III (जुलाई 2024 का संशोधन) के तहत 20.17 लाख लाभार्थियों को ₹1,224.76 करोड़ का भुगतान। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक 25 फ़रवरी 2019 को समर्पित। प्रमुख रक्षा अध्यक्ष का पद 24 दिसंबर 2019 को सृजित। रक्षा बजट ₹2.3 → ₹6.8 लाख करोड़। स्रोत: रक्षा मंत्रालय, डीईएसडब्ल्यू, पीआईबी।
आँकड़े इस तिथि तक: 7 नवंबर 2024
स्रोत: रक्षा मंत्रालय (PIB के माध्यम से) — एक रैंक एक पेंशन, 7 नवंबर 2015 को 1 जुलाई 2014 से प्रभावी रूप में आदेशित, से 25 लाख से अधिक पूर्व सैनिकों व उनके परिवारों को लाभ हुआ है (नवंबर 2024, लिंक); पेंशन जुलाई 2019 और जुलाई 2024 से फिर संशोधित हुई। पहले आदेश के तहत बकाया ₹10,795.4 करोड़ रहा; तीसरे संशोधन (ओआरओपी-III, जुलाई 2024) के तहत 15 दिनों के भीतर 20.17 लाख लाभार्थियों को ₹1,224.76 करोड़ का भुगतान हुआ (वर्षांत समीक्षा, 31 दिसंबर 2025)। ओआरओपी भुगतान का कोई आधिकारिक वर्षवार योग प्रकाशित नहीं होता, इसलिए चार्ट नहीं दिखाया गया है। · लिंक