भारत का पहला अंटार्कटिक अभियान 1981 में रवाना हुआ और 8 जनवरी 1982 को अंटार्कटिका पहुँचा। पहला स्टेशन दक्षिण गंगोत्री 1983 में स्थापित हुआ; उसी वर्ष भारत ने अंटार्कटिक संधि पर हस्ताक्षर किए (19 अगस्त) और परामर्शदात्री दर्जा पाया (12 सितंबर)। मैत्री 1989 में और भारती 18 मार्च 2012 को शुरू हुआ, जबकि आर्कटिक स्टेशन हिमाद्रि 1 जुलाई 2008 को स्वालबार्ड के नी-आलेसुंड में शुरू हुआ। 5 अप्रैल 2000 को स्थापित NCPOR ने 2004 में दक्षिणी महासागर अभियान, 2007 में आर्कटिक अनुसंधान और 2013 में हिमालयी क्रायोस्फ़ीयर अनुसंधान जोड़ा।
ध्रुवीय एवं हिमालयी अनुसंधान
भारत का ध्रुवीय कार्यक्रम 1981 में अंटार्कटिका के पहले अभियान से शुरू हुआ और इसे पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं समुद्री अनुसंधान केंद्र (NCPOR), गोवा चलाता है। भारत अंटार्कटिका में दो वर्षभर चलने वाले स्टेशन, मैत्री (1989) और भारती (2012), स्वालबार्ड में आर्कटिक स्टेशन हिमाद्रि (2008) और हिमालयी स्टेशन हिमांश (2016) चलाता है, और 2004 से दक्षिणी महासागर में अभियान भेजता रहा है। भारतीय अंटार्कटिक अधिनियम, 2022 7 अगस्त 2023 से लागू हुआ, और भारत ने मई 2024 में कोच्चि में 46वीं अंटार्कटिक संधि परामर्शदात्री बैठक की मेज़बानी की। मैत्री की जगह लेने वाले नए स्टेशन मैत्री-II को सैद्धांतिक स्वीकृति मिल चुकी है और इसके 2032 तक पूरा होने की उम्मीद है।

यह क्यों मायने रखता है ध्रुवों और हिमालय में होने वाले बदलाव भारत तक पहुँचते हैं: पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अनुसार समुद्री बर्फ़ और महासागरीय परिसंचरण जैसी आर्कटिक प्रक्रियाएँ मानसून सहित उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के मौसम और जलवायु को प्रभावित करती हैं। हिमालयी हिमनद उत्तर भारत की नदियों को जल देते हैं; NCPOR के अनुमान के अनुसार सिंधु बेसिन के प्रवाह में हिमनदों के पिघलने का योगदान लगभग 44% और चंद्रा बेसिन में 70–80% है। 1983 से अंटार्कटिक संधि का परामर्शदात्री पक्षकार होने के नाते भारत अंटार्कटिका के शासन से जुड़े निर्णयों में भी भाग लेता है।
- अंटार्कटिक स्टेशन: दक्षिण गंगोत्री (1983), मैत्री (1989 में शुरू) और भारती (18 मार्च 2012 को शुरू); मैत्री और भारती वर्षभर चलते हैं
- भारत ने 19 अगस्त 1983 को अंटार्कटिक संधि पर हस्ताक्षर किए और 12 सितंबर 1983 को परामर्शदात्री दर्जा प्राप्त किया
- स्वालबार्ड के नी-आलेसुंड में भारत का पहला आर्कटिक अनुसंधान स्टेशन हिमाद्रि 1 जुलाई 2008 को शुरू हुआ
- भारतीय अंटार्कटिक अधिनियम, 2022 (2022 का संख्या 13): 6 अगस्त 2022 को स्वीकृति, 7 अगस्त 2023 से लागू
- ATCM-46, कोच्चि (20–30 मई 2024): 56 देशों के 400+ प्रतिनिधि; पक्षकारों ने अंटार्कटिक विशेष संरक्षित क्षेत्रों की 17 संशोधित और नई प्रबंधन योजनाएँ अपनाईं
- 2013 से NCPOR की निगरानी वाले चंद्रा बेसिन के हिमनदों का क्षेत्रफल 20 वर्षों में लगभग 6% घटा है (राज्यसभा उत्तर, जुलाई 2025)

इतिहास
उल्लेखनीय उपलब्धि
20 से 30 मई 2024 तक भारत ने NCPOR के माध्यम से कोच्चि में 46वीं अंटार्कटिक संधि परामर्शदात्री बैठक (ATCM-46) और पर्यावरण संरक्षण समिति की 26वीं बैठक की मेज़बानी की। इसमें 56 देशों के 400 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए। पक्षकारों ने अंटार्कटिक विशेष संरक्षित क्षेत्रों की 17 संशोधित और नई प्रबंधन योजनाएँ अपनाईं और अंटार्कटिका में पर्यटन और गैर-सरकारी गतिविधियों के नियमन का ढाँचा विकसित करने का निर्णय लिया। बैठक में पृथ्वी विज्ञान मंत्री ने नया अनुसंधान स्टेशन मैत्री-II स्थापित करने की भारत की योजना घोषित की।
यह कैसे काम करता है
NCPOR पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की PACER (ध्रुवीय एवं क्रायोस्फ़ीयर) योजना के तहत अंटार्कटिका और आर्कटिक के भारतीय अभियान चलाता है। हर अंटार्कटिक अभियान मैत्री और भारती तक भोजन, ईंधन और कल-पुर्ज़े पहुँचाता है और शीतकालीन दल बदलता है; भारती के मुख्य भवन में 47 लोग रह सकते हैं, और गर्मियों में आपात आश्रयों व शिविरों सहित 72। भारतीय अंटार्कटिक अधिनियम, 2022 अंटार्कटिक अनुसंधान और अभियानों की निगरानी के लिए भारतीय अंटार्कटिक प्राधिकरण का प्रावधान करता है, जिसके अध्यक्ष मंत्रालय के सचिव हैं। चंद्रा बेसिन में 4,080 मीटर पर स्थित हिमांश में वैज्ञानिक छह हिमनदों के द्रव्यमान, ऊर्जा और जल संतुलन की निगरानी करते हैं।
आगे की राह
मंत्रालय मौजूदा मैत्री स्टेशन की जगह मैत्री-II बनाने की योजना बना रहा है: इसने वास्तुशिल्प डिज़ाइन और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के लिए ₹29.2 करोड़ स्वीकृत किए हैं, और स्टेशन के लगभग सात वर्षों में, 2032 तक, चालू होने का अनुमान है। NCPOR के निदेशक ने दिसंबर 2025 में बताया कि सरकार ने भारत के पहले स्वदेशी आइस-क्लास अनुसंधान पोत को भी सैद्धांतिक स्वीकृति दी है। दिसंबर 2023 में शुरू हुए हिमाद्रि के शीतकालीन अभियान आर्कटिक कार्य को अप्रैल–अक्टूबर के ग्रीष्मकाल से आगे ले जाते हैं। हिमालय में चंद्रा बेसिन के हिमनदों का क्षेत्रफल 20 वर्षों में लगभग 6% घटा है और पिछले दशक में वे हर वर्ष 13 से 33 मीटर पीछे हटे हैं।
आँकड़ों में
43वाँ अंटार्कटिक अभियान केप टाउन से रवाना (23 दिसंबर 2023); 1981 से हर वर्ष अभियान। 2 वर्षभर चलने वाले अंटार्कटिक स्टेशन, मैत्री (1989) और भारती (2012), साथ ही आर्कटिक में हिमाद्रि (2008) और हिमालय में हिमांश (2016)। ATCM-46, कोच्चि में 56 देशों के 400+ प्रतिनिधि (मई 2024)। मैत्री-II के डिज़ाइन के लिए ₹29.2 करोड़, 2032 तक पूरा होने की उम्मीद। चंद्रा बेसिन के हिमनद क्षेत्र का लगभग 6% 20 वर्षों में घटा। स्रोत: पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और NCPOR (PIB के माध्यम से); NCPOR; राज्यसभा उत्तर (31 जुलाई 2025); संसद उत्तर (10 दिसंबर 2025)।
आँकड़े इस तिथि तक: अगस्त 2026 की स्थिति
स्रोत: पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और NCPOR (PIB के माध्यम से), NCPOR तथा संसद में दिए गए उत्तर — समयरेखा में हिमांश स्टेशन (2016), अंटार्कटिका के 40वें अभियान की वापसी (2021), भारतीय अंटार्कटिक अधिनियम (2022 में पारित, 2023 में लागू), पहले शीतकालीन आर्कटिक अभियान और 43वें अंटार्कटिक अभियान (2023), कोच्चि में 46वीं अंटार्कटिक संधि परामर्शदात्री बैठक (2024), मैत्री-II (2025) और मैत्री से टेली-रोबोटिक अल्ट्रासाउंड संपर्क (2026) की तिथियाँ हैं। शीर्ष आँकड़ा: PIB, 6 जनवरी 2024 — अंटार्कटिका के लिए 43वें भारतीय वैज्ञानिक अभियान का जहाज़ 23 दिसंबर 2023 को केप टाउन से रवाना हुआ (लिंक)। NCPOR ने बाद में 44वें और 45वें अभियानों के लिए अनुसंधान प्रस्ताव आमंत्रित किए, पर उनके रवाना होने की कोई आधिकारिक रिपोर्ट नहीं मिली, इसलिए शीर्ष आँकड़ा 43वें अभियान पर है। · लिंक