भारत का गैस ग्रिड कभी पैचदार व पश्चिम में केंद्रित था। 2030 तक प्राकृतिक गैस को ऊर्जा मिश्रण का 15% बनाने का राष्ट्रीय प्रयास — ~6.5% से — ने चालू पाइपलाइन नेटवर्क को 2014 के 15,340 किमी से बढ़ाकर 2024 तक 24,945 किमी किया, 62.6% वृद्धि, कुल लगभग 33,500 किमी अधिकृत।
प्राकृतिक गैस और पाइपलाइन
भारत स्वच्छ प्राकृतिक गैस देश भर में पहुँचाने के लिए राष्ट्रीय गैस ग्रिड बना रहा है। चालू पाइपलाइनें 2014 के 15,340 किमी से बढ़कर 2024 तक 24,945 किमी हुईं — 62.6% वृद्धि — लगभग 33,500 किमी अधिकृत व अधिक निर्माणाधीन। सिटी गैस वितरण 307 भौगोलिक क्षेत्रों में अधिकृत है जो लगभग पूरी आबादी को कवर करते हैं, और 2024 में एक-राष्ट्र-एक-ग्रिड-एक-टैरिफ़ संरचना आई। भारत 2030 तक गैस को ऊर्जा मिश्रण में ~6.5% से 15% तक बढ़ाने का लक्ष्य रखता है। काउंटर चालू पाइपलाइन लंबाई दिखाता है।

| वर्ष | Gas pipeline |
|---|---|
| 2014 | 15,340 km |
| 2015 | 15,500 km |
| 2016 | 16,800 km |
| 2017 | 17,200 km |
| 2018 | 18,000 km |
| 2019 | 19,500 km |
| 2020 | 20,200 km |
| 2021 | 21,500 km |
| 2022 | 22,600 km |
| 2023 | 23,600 km |
| 2024 | 24,945 km |
| 2025 | 25,400 km |
यह क्यों मायने रखता है पाइप गैस घरों, परिवहन व उद्योग के लिए तेल से स्वच्छ व सस्ती है — और ग्रिड का हर किलोमीटर आयात बिल व प्रदूषण घटाता है।
- पाइपलाइनें: 15,340 → 24,945 किमी; +62.6%
- 307 सिटी गैस वितरण क्षेत्र — लगभग सर्व-कवरेज
- एकीकृत टैरिफ़ (एक राष्ट्र, एक ग्रिड, एक टैरिफ़) 2024 से
- आगे का रास्ता: घरेलू गैस उत्पादन को माँग के ~50% से ऊपर ले जाकर LNG आयात घटाना
- स्रोत: PNGRB / MoP&NG
इतिहास
एक ग्रिड, एक टैरिफ़
प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा (जगदीशपुर-हल्दिया-बोकारो-धामरा) जैसी बड़ी ट्रंक लाइनें पहली बार पूर्वी भारत तक गैस ले गईं। 2024 में एकीकृत एक-राष्ट्र-एक-ग्रिड-एक-टैरिफ़ संरचना आई, और सिटी गैस वितरण 307 भौगोलिक क्षेत्रों में अधिकृत है जो लगभग पूरी आबादी को कवर करते हैं।
यह कैसे काम करता है
प्राकृतिक गैस एक बढ़ते राष्ट्रीय पाइपलाइन ग्रिड से चलती है जो आयात टर्मिनलों व गैस क्षेत्रों को बिजलीघरों, कारखानों, घरों व वाहनों से जोड़ती है। भारत इन क्षेत्रीय नेटवर्कों को 'एक राष्ट्र, एक गैस ग्रिड' में एक एकीकृत टैरिफ़ के साथ सिल रहा है — एक एकल, दूरी-निरपेक्ष मूल्य — ताकि गैस दूर राज्य में भी टर्मिनल के पास जितनी आसानी से ख़रीदी जा सके। सिटी गैस वितरण फिर इसे पाइप्ड रसोई गैस (PNG) व वाहन ईंधन (CNG) के रूप में पहुँचाता है।
आगे की राह
लक्ष्य कोयले व नवीकरणीय के बीच एक स्वच्छ सेतु के रूप में गैस को लगभग 6% से 2030 तक भारत के ऊर्जा-मिश्रण के 15% तक बढ़ाना है। अगला क़दम घरेलू गैस उत्पादन बढ़ाना, पाइपलाइन ग्रिड को अन्य ~10,000 किमी बढ़ाना, LNG आयात टर्मिनल जोड़ना, और सिटी-गैस कनेक्शन को सैकड़ों और ज़िलों में ले जाना है — ताकि स्वच्छ रसोई व परिवहन ईंधन कहीं अधिक घरों व वाहनों तक पहुँचे।
आगे का रास्ता
अगला क़दम घरेलू गैस उत्पादन को माँग के लगभग आधे से ऊपर ले जाना है ताकि महँगी LNG आयात घटे, पूर्व व पूर्वोत्तर तक पाइपलाइन बढ़ाना, और गैस को 2030 के 15% ऊर्जा-मिश्रण लक्ष्य की ओर बढ़ाना।
आँकड़ों में
चालू पाइपलाइनें 15,340 → 24,945 किमी (2014→2024, +62.6%); ~33,500 किमी अधिकृत; 307 सिटी गैस वितरण क्षेत्र; एकीकृत टैरिफ़ (2024); 2030 तक गैस 15% लक्ष्य। स्रोत: PNGRB / MoP&NG।
स्रोत: PNGRB / MoP&NG — operational natural gas pipeline length (km), 2014–2025.