गंगा की सफ़ाई दशकों से सीमित सफलता के साथ की जाती रही। जून 2014 में ₹20,000 करोड़ के परिव्यय (बाद में 2026 तक लगभग ₹22,500 करोड़ तक विस्तारित) से शुरू हुए नमामि गंगे ने अधिक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया — सीवेज उपचार, औद्योगिक प्रवाह से निपटना, रिवरफ्रंट विकास और पारिस्थितिकी बहाली एक मिशन, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) के तहत। कुल स्वीकृत परिव्यय तब से ₹40,000 करोड़ पार कर गया है।
नमामि गंगे
गंगा भारत की सबसे पवित्र और सबसे प्रदूषित प्रमुख नदी है, जिसके बेसिन में 40 करोड़ से अधिक लोग रहते हैं। 2014 में ₹20,000 करोड़ के परिव्यय (बाद में विस्तारित) से शुरू हुए नमामि गंगे ने इसे साफ़ करने का लक्ष्य रखा — मुख्यतः सीवेज-उपचार क्षमता बनाकर ताकि अनुपचारित कचरा बहना बंद हो। यह मानचित्र हिमालय से समुद्र तक नदी गलियारे को दर्शाता है, हर हिस्से को उस वर्ष रोशन करते हुए जब उसकी सफ़ाई परियोजनाएँ चालू हुईं।

यह क्यों मायने रखता है गंगा एक विशाल आबादी के लिए कृषि, पेयजल, संस्कृति और पारिस्थितिकी का आधार है, इसलिए इसका स्वास्थ्य राष्ट्रीय प्राथमिकता है।
- सीवेज-उपचार क्षमता: 3,806 MLD पूर्ण व चालू (दिसंबर 2025)
- गांगेय डॉल्फ़िन ~3,330 (2018) से बढ़कर ~3,936 (2024)
- स्रोत: राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG)

इतिहास
प्रमुख परियोजनाएँ
मुख्य कार्य सीवेज-उपचार संयंत्र (STP) रहे हैं। लगभग 355 परियोजनाएँ पूरी हुईं और दिसंबर 2025 तक 3,806 MLD सीवेज-उपचार क्षमता पूर्ण व चालू। वाराणसी की क्षमता 100 से 420 MLD चौगुनी हुई; प्रयागराज, कानपुर, पटना और दिल्ली व आगरा के पास यमुना शहरों को बड़े संयंत्र मिले। पारिस्थितिक संकेत उत्साहजनक हैं: गांगेय डॉल्फ़िन की आबादी लगभग 3,330 (2018) से बढ़कर 3,936 (2024) हुई, और कार्यक्रम को UN विश्व बहाली फ्लैगशिप नामित किया गया।
यह कैसे काम करता है
गंगा जैसी विशाल नदी साफ़ करने का अर्थ है प्रदूषण स्रोत पर रोकना, केवल पानी शोधना नहीं। नमामि गंगे का मूल नदी के किनारे शहरों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) बनाना है, ताकि अनुपचारित नाले इसमें न गिरें। साथ आते हैं रिवरफ्रंट विकास, औद्योगिक अपशिष्ट नियंत्रण, तटों पर वृक्षारोपण, व जैव-विविधता कार्य (गंगेय डॉल्फिन को पुनर्जीवित करना) — एक राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा समन्वित।
आगे की राह
कई खंडों में पानी की गुणवत्ता सुधरी है व गंगेय डॉल्फिन लौट रही है — स्पष्ट संकेत कि मिशन काम कर रहा है। अगला कदम हर ट्रीटमेंट प्लांट को पूरी क्षमता पर चालू रखना, मॉडल को यमुना जैसी सहायक नदियों तक बढ़ाना, और वह जन-भागीदारी बनाना है जो नदी को स्थायी रूप से स्वच्छ रखे।
आँकड़ों में
~524 स्वीकृत में से ~355 परियोजनाएँ पूर्ण। 3,806 MLD STP क्षमता पूर्ण व चालू (दिसंबर 2025)। 2014 से ₹40,000 करोड़+ स्वीकृत। डॉल्फ़िन: ~3,330 (2018) → ~3,936 (2024)। स्रोत: राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, CPCB, WII।
आँकड़े इस तिथि तक: 8 दिसंबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार
स्रोत: राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन — गंगा गलियारे की सफ़ाई, परियोजना पूर्ण होने के वर्ष के अनुसार रोशन होते शहर, 2014–2025। PIB, दिसंबर 2025: 3,806 MLD क्षमता वाली 138 सीवेज-शोधन परियोजनाएँ पूर्ण और चालू, 6,561 MLD के लिए शुरू की गई 216 परियोजनाओं में से (लिंक)। · लिंक