जेट-ईंधन (ATF) मूल्य-निर्धारण 2001 में प्रशासित तंत्र से मुक्त हुआ। जैसे बजट एयरलाइंस व विमानन उछाल बढ़ा, माँग 2014-15 के लगभग 5.5 मिलियन टन से बढ़कर 2025-26 के अनुमानित रिकॉर्ड 9.8 MMT की ओर बढ़ी — 2020 महामारी में तेज़ गिरावट के बाद कोविड-पूर्व स्तरों से ऊपर सुधार।
जेट ईंधन (ATF)
जेट ईंधन — एविएशन टर्बाइन फ़्यूल, या ATF — भारत के हवाई-यात्रा उछाल का ईंधन है। खपत 2014-15 के लगभग 5.5 मिलियन टन से बढ़कर 2025-26 के अनुमानित रिकॉर्ड 9.8 MMT की ओर बढ़ी, 2020 की महामारी में तेज़ गिरावट के बाद मज़बूत सुधार के साथ। भारत वास्तव में उपयोग से अधिक जेट ईंधन बनाता है, इसलिए अधिशेष निर्यात करता है। काउंटर ATF खपत दिखाता है; आँकड़े अनुमान हैं और सबसे पुराना वर्ष अनुमानित है।

| वर्ष | ATF consumption |
|---|---|
| 2014 | 6 MMT |
| 2015 | 6 MMT |
| 2016 | 7 MMT |
| 2017 | 7 MMT |
| 2018 | 8 MMT |
| 2019 | 8 MMT |
| 2020 | 4 MMT |
| 2021 | 5 MMT |
| 2022 | 8 MMT |
| 2023 | 8 MMT |
| 2024 | 9 MMT |
| 2025 | 10 MMT |
यह क्यों मायने रखता है जेट-ईंधन माँग विमानन उछाल की जीवंत नब्ज़ है — अधिक उड़ानें, हवाई अड्डे व यात्री सब जलाए गए ATF में दिखते हैं।
- खपत: ~5.5 → ~9.8 MMT (2025-26, अनु.)
- भारत ATF-अधिशेष है — जेट ईंधन निर्यात करता है
- 2020 (कोविड) में तेज़ गिरा, फिर महामारी-पूर्व स्तरों से ऊपर सुधरा
- आगे का रास्ता: भारी राज्य करों में राहत और ATF को GST के दायरे में लाना
- स्रोत: PPAC (आँकड़े अनुमानित)
इतिहास
जेट ईंधन का निर्यातक
भारत की रिफ़ाइनरियाँ देश की खपत से अधिक ATF बनाती हैं, इसलिए भारत अपने अन्य परिष्कृत उत्पादों के साथ अधिशेष निर्यात करता है। जेट ईंधन सभी पेट्रोलियम उत्पादों का लगभग 3.8% है, और दिल्ली — सबसे बड़ा विमानन केंद्र — सबसे बड़ा बाज़ार है।
यह कैसे काम करता है
विमानन टरबाइन ईंधन (ATF), जेट इंजन चलाने वाला मिट्टी का तेल, वही भारतीय रिफ़ाइनरियों में बनता है जहाँ डीज़ल व पेट्रोल। भारत उपयोग से अधिक बनाता है, इसलिए यह जेट ईंधन का शुद्ध निर्यातक है। घर में, ATF GST से बाहर है, इसलिए यह केंद्रीय उत्पाद शुल्क व व्यापक रूप से भिन्न राज्य करों (VAT) को वहन करता है — जो ईंधन को एयरलाइन की लागत का बड़ा हिस्सा बना सकता है और एक राज्य के हवाई अड्डे से दूसरे तक तेज़ी से भिन्न।
आगे की राह
अगला क़दम भारी राज्य करों को कम करना है जो भारतीय जेट ईंधन को दुनिया के सबसे महँगे में बनाते हैं — कई राज्यों ने उड़ानें आकर्षित करने हेतु VAT घटाया, और ATF को एक समान दर हेतु GST में लाने का लंबा प्रयास है। बड़ा क्षितिज टिकाऊ विमानन ईंधन (SAF) है — कचरे व बायोमास से हरित जेट ईंधन — जहाँ भारत ने शुरुआती मिश्रण लक्ष्य तय किए हैं व रिफ़ाइनर निवेश शुरू कर रहे हैं।
आगे का रास्ता
अगला क़दम ATF पर भारी राज्य करों (अब भी GST से बाहर) में राहत देना है जो भारतीय जेट ईंधन को महँगा बनाते हैं, और स्वच्छ टिकाऊ विमानन ईंधन बढ़ाना। (इस पृष्ठ के आँकड़े अनुमानित हैं।)
आँकड़ों में
ATF खपत ~5.5 → ~9.8 MMT (2014-15 → 2025-26, अनु.); पेट्रोलियम उत्पादों का ~3.8%; भारत ATF-अधिशेष है व जेट ईंधन निर्यात करता है। स्रोत: PPAC (अनुमानित)।
स्रोत: PPAC — aviation turbine fuel (jet fuel) consumption (MMT); FY15 approximate. India is ATF-surplus and exports jet fuel.