भारत गुटनिरपेक्ष आंदोलन का संस्थापक सदस्य व संयुक्त राष्ट्र में सक्रिय स्वर रहा था, पर उसने अपना कोई बड़ा अंतर-सरकारी संगठन बनाकर उसका मुख्यालय अपने यहाँ नहीं रखा था। अंतरराष्ट्रीय निकाय जिनेवा, न्यूयॉर्क, वियना व पेरिस में बने; भारत उनमें शामिल हुआ व उनके भीतर तर्क करता रहा।
भारत द्वारा स्थापित गठबंधन
भारत ने केवल अंतरराष्ट्रीय संगठनों में शामिल होना छोड़ा और उन्हें स्थापित करना शुरू किया। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, 2015 में COP21 में फ़्रांस के साथ शुरू, भारत में मुख्यालय वाला पहला अंतर-सरकारी निकाय बना और अब इसके 100 से अधिक सदस्य हैं। आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन 2019 में आया, वह भी भारत में मुख्यालय के साथ। वैश्विक जैव-ईंधन गठबंधन 2023 में दिल्ली जी20 में अमेरिका व ब्राज़ील के साथ शुरू हुआ, और अंतरराष्ट्रीय बिग कैट गठबंधन 2024 में।

यह क्यों मायने रखता है किसी संस्था की स्थापना उसमें शामिल होने से भिन्न प्रकार की शक्ति है: वह एजेंडा, मुख्यालय व नियम तय करती है। भारत में मुख्यालय वाले या भारत से नेतृत्व वाले चार वैश्विक निकाय — सौर, आपदा-प्रतिरोध, जैव-ईंधन व बिग कैट संरक्षण पर — का अर्थ है कि अब अन्य देश समन्वय हेतु दिल्ली आते हैं, बजाय इसके कि भारत समन्वित होने जाए।
- अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (2015) के 100 से अधिक सदस्य देश हैं व मुख्यालय गुरुग्राम में।
- आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (2019) का मुख्यालय भी भारत में है।
- वैश्विक जैव-ईंधन गठबंधन 2023 में नई दिल्ली जी20 में अमेरिका व ब्राज़ील के साथ शुरू हुआ।
- अंतरराष्ट्रीय बिग कैट गठबंधन (2024) का मुख्यालय भारत में, ₹150 करोड़ कोष के साथ।
- वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड व मिशन लाइफ़ ने COP26 व उसके आगे भारत का जलवायु नेतृत्व बढ़ाया।

इतिहास
उल्लेखनीय उपलब्धि
अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, 2015 में पेरिस में COP21 में फ़्रांस के साथ शुरू, भारत में मुख्यालय वाला पहला अंतर-सरकारी संधि-आधारित संगठन बना, गुरुग्राम में। अब इसके 100 से अधिक सदस्य देश हैं और यह धूप-समृद्ध विकासशील राष्ट्रों में सौर निवेश जुटाने का काम करता है।
यह कैसे काम करता है
हर निकाय एक भारतीय शक्ति को एक वैश्विक कमी से जोड़ता है। आईएसए सौर माँग को वित्त व मानकों से मिलाता है। सीडीआरआई, 2019 में संयुक्त राष्ट्र में शुरू व भारत में मुख्यालय, सरकारों, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों व विकास बैंकों को साथ लाता है ताकि अवसंरचना आपदाओं में टिके। वैश्विक जैव-ईंधन गठबंधन, 2023 जी20 में अमेरिका व ब्राज़ील के साथ शुरू, भारत का एथेनॉल-मिश्रण अनुभव निर्यात करता है। अंतरराष्ट्रीय बिग कैट गठबंधन प्रोजेक्ट टाइगर मॉडल को रेंज देशों की सात प्रजातियों तक बढ़ाता है।
आगे की राह
औपचारिक निकायों के साथ एजेंडा-निर्धारक पहलें भी आईं: वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड, COP26 में ब्रिटेन के साथ प्रस्तुत, समय-क्षेत्रों में सौर उत्पादन को जोड़ने हेतु; और मिशन लाइफ़, जिसने जलवायु कार्रवाई को व्यक्तिगत तथा सामुदायिक व्यवहार की ओर बढ़ाया व बाद में जी20 तथा संयुक्त राष्ट्र दस्तावेज़ों में संदर्भित हुआ। भारत के जलवायु संकल्प — 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता व 2070 तक नेट-ज़ीरो — इन सबकी विश्वसनीयता का आधार हैं।
आँकड़ों में
आईएसए (2015) — 100+ सदस्य, भारत में मुख्यालय वाला पहला अंतर-सरकारी निकाय। सीडीआरआई (2019) — मुख्यालय भी भारत में। वैश्विक जैव-ईंधन गठबंधन (2023) — जी20 में अमेरिका व ब्राज़ील के साथ शुरू। आईबीसीए (2024) — ₹150 करोड़ कोष, सात बिग कैट प्रजातियाँ। स्रोत: विदेश मंत्रालय, एमएनआरई, पीआईबी।
आँकड़े इस तिथि तक: 23 जनवरी 2025 तक
स्रोत: MEA / MNRE — अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, CDRI, वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन और अंतरराष्ट्रीय बिग कैट गठबंधन। · लिंक