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जलविद्युत और पंप्ड स्टोरेज

जलविद्युत और पंप्ड स्टोरेज

बड़ी जलविद्युत का अर्थ 25 MW से बड़े संयंत्र हैं, और पंप्ड स्टोरेज संयंत्र बिजली अधिक होने पर पानी ऊपर पंप करते हैं और माँग चरम पर होने पर उसे छोड़ते हैं। CEA के आँकड़ों के अनुसार बड़ी जलविद्युत स्थापित क्षमता मार्च 2017 में 44,478.42 MW और 31 जुलाई 2026 को 52,064.66 MW थी। मार्च 2019 में मंत्रिमंडल ने बड़ी जलविद्युत को नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत घोषित किया और बिजली ख़रीदारों के लिए जलविद्युत क्रय दायित्व बनाया। पंप्ड स्टोरेज फ़रवरी 2023 में चालू 4,745.6 MW के 8 संयंत्रों से बढ़ रहा है, और जुलाई 2026 में 15,870 MW की 11 परियोजनाएँ निर्माणाधीन थीं।

आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी पर बने श्रीशैलम बाँध के स्पिलवे से बहता पानी।
आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी पर बने श्रीशैलम बाँध के स्पिलवे से बहता पानी। · iMahesh · CC BY-SA 4.0 · Wikimedia Commons
44,478 MW
बड़ी जलविद्युत स्थापित क्षमता (मार्च 2017)
15,870 MW
निर्माणाधीन पंप्ड स्टोरेज (जुलाई 2026)
₹12,461 करोड़
सक्षम अवसंरचना सहायता (वित्त वर्ष 2024-25 से 2031-32)
बड़ी जलविद्युत स्थापित क्षमता (31 जुलाई 2026)
2017
सिक्किम में तीस्ता-III (1,200 MW) चालू
2014-15 से सिक्किम सहित पूर्वोत्तर क्षेत्र में चालू हुई कुल 2,412 MW की नौ जलविद्युत परियोजनाओं में से एक (विद्युत मंत्रालय, 7 दिसंबर 2023)।
2019
बड़ी जलविद्युत को नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत घोषित किया गया
2021
जलविद्युत क्रय दायित्व का मार्ग अधिसूचित
2023
पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं को बढ़ावा देने के दिशानिर्देश
2024
पूर्वोत्तर में जलविद्युत परियोजनाओं के लिए इक्विटी सहायता
2024
सक्षम अवसंरचना के लिए ₹12,461 करोड़ की योजना
2025
पार्बती-II पूर्ण; सुबनसिरी लोअर की पहली इकाई चालू
2026
कमला परियोजना मंज़ूर; सुबनसिरी लोअर 750 MW तक पहुँची
2017
1उपलब्धियाँ
20172026
नवीनतम
सिक्किम में तीस्ता-III (1,200 MW) चालू
2014-15 से सिक्किम सहित पूर्वोत्तर क्षेत्र में चालू हुई कुल 2,412 MW की नौ जलविद्युत परियोजनाओं में से एक (विद्युत मंत्रालय, 7 दिसंबर 2023)।

यह क्यों मायने रखता है जलविद्युत संयंत्र कुछ ही मिनटों में उत्पादन बढ़ा सकते हैं, जिससे शाम को सौर उत्पादन घटने पर आपूर्ति स्थिर रहती है। भंडारण बाँध बाढ़ को भी नियंत्रित कर सकते हैं, और पहाड़ी राज्यों में परियोजनाएँ सड़कें, पुल और स्थानीय रोज़गार लाती हैं।

  • बड़ी जलविद्युत स्थापित क्षमता: 44,478.42 MW (मार्च 2017) → 52,064.66 MW (31 जुलाई 2026), CEA
  • 7 मार्च 2019: मंत्रिमंडल ने 25 MW से बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं को नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत घोषित किया
  • चालू पंप्ड स्टोरेज: 8 संयंत्र, 4,745.6 MW (फ़रवरी 2023) → 10 संयंत्र, 6.2 GW (30 जून 2025)
  • निर्माणाधीन पंप्ड स्टोरेज: 11 परियोजनाएँ, 15,870 MW; CEA द्वारा सहमति या मूल्यांकन प्राप्त 8,140 MW की 6 और परियोजनाएँ (जुलाई 2026)
  • सुबनसिरी लोअर (2,000 MW): अप्रैल 2026 तक 750 MW चालू, शेष इकाइयाँ दिसंबर 2026 तक अपेक्षित
  • दोहन-योग्य बड़ी जलविद्युत क्षमता: 1,33,410 MW (CEA पुनर्मूल्यांकन अध्ययन, 2017–2023)

इतिहास

मार्च 2019 की मंत्रिमंडल विज्ञप्ति के अनुसार भारत की स्थापित क्षमता में जलविद्युत का हिस्सा 1960 के दशक के 50.36% से घटकर 2018-19 में लगभग 13% रह गया था। तब तक केवल 25 MW से छोटी परियोजनाएँ ही नवीकरणीय ऊर्जा मानी जाती थीं। 7 मार्च 2019 को मंत्रिमंडल ने बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं को नवीकरणीय स्रोत घोषित किया और जलविद्युत क्रय दायित्व बनाया, यानी बिजली का वह हिस्सा जो ख़रीदारों को नए बड़े जलविद्युत संयंत्रों से लेना होगा। इसी निर्णय में परियोजना की अवधि 40 वर्ष और ऋण चुकाने की अवधि 18 वर्ष की गई, ताकि शुरुआती टैरिफ़ कम रहें।

उल्लेखनीय उपलब्धि

NHPC द्वारा अरुणाचल प्रदेश–असम सीमा पर सुबनसिरी नदी पर बनाई गई 2,000 MW की सुबनसिरी लोअर परियोजना में 250 MW की आठ इकाइयाँ हैं। यूनिट-2 के वाणिज्यिक संचालन का उद्घाटन 23 दिसंबर 2025 को हुआ, और अप्रैल 2026 तक 750 MW चालू हो चुकी थी, शेष दिसंबर 2026 तक अपेक्षित है। पूरी होने पर इसे वर्ष में लगभग 742.2 करोड़ यूनिट बिजली बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। NHPC की पार्बती-II (800 MW) 15 अप्रैल 2025 को पूरी तरह चालू हुई।

यह कैसे काम करता है

पारंपरिक संयंत्र बाँध या नदी से नीचे बहते पानी को बिजली में बदलता है। पंप्ड स्टोरेज संयंत्र दो जलाशयों का उपयोग करता है: बिजली अधिक होने पर वह पानी ऊपरी जलाशय में पंप करता है और चरम समय में उसे टर्बाइनों से वापस चलाता है, जिससे यह लंबी अवधि के भंडारण का काम करता है। कई स्थल दूरदराज़ होने से सरकार सड़क, पुल और ट्रांसमिशन लाइन जैसी सक्षम अवसंरचना का ख़र्च देती है; सितंबर 2024 की योजना में 200 MW तक की परियोजनाओं के लिए प्रति MW ₹1.0 करोड़ तक की सहायता है। परियोजना रिपोर्टों पर CEA की सहमति ज़रूरी है, और पंप्ड स्टोरेज रिपोर्टों के लिए इसकी समय-सीमा 90 से घटाकर 50 दिन की गई।

आगे की राह

जुलाई 2026 में 15,870 MW की 11 पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएँ निर्माणाधीन थीं और 8,140 MW की 6 अन्य परियोजनाओं को CEA की सहमति या मूल्यांकन मिल चुका था। विद्युत मंत्रालय ने 2031-32 तक 57 GW पंप्ड स्टोरेज जोड़ने का लक्ष्य रखा है (जनवरी 2026)। CERC ने उन पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के लिए 25 वर्ष तक अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन शुल्क माफ़ किया है जिनका निर्माण 30 जून 2028 तक आवंटित हो। CEA के पुनर्मूल्यांकन के अनुसार दोहन-योग्य बड़ी जलविद्युत क्षमता 1,33,410 MW है, जिसमें से 55,930 MW पूर्वोत्तर क्षेत्र में है।

आँकड़ों में

52,064.66 MW बड़ी जलविद्युत स्थापित क्षमता (31 जुलाई 2026), 44,478.42 MW (मार्च 2017) से। 6.2 GW पंप्ड स्टोरेज चालू (30 जून 2025)। 15,870 MW पंप्ड स्टोरेज निर्माणाधीन (जुलाई 2026)। सक्षम अवसंरचना के लिए ₹12,461 करोड़ और पूर्वोत्तर राज्यों की इक्विटी के लिए ₹4,136 करोड़ (वित्त वर्ष 2024-25 से 2031-32)। 1,720 MW की कमला परियोजना के लिए ₹26,069.50 करोड़ मंज़ूर (अप्रैल 2026)। स्रोत: केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के कार्यकारी सारांश (फ़रवरी और जुलाई 2026); PIB के माध्यम से विद्युत मंत्रालय और मंत्रिमंडल की विज्ञप्तियाँ।

आँकड़े इस तिथि तक: 31 जुलाई 2026 तक

स्रोत: केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA), विद्युत क्षेत्र का कार्यकारी सारांश — 31-07-2026 तक बड़ी जलविद्युत स्थापित क्षमता 52,064.66 MW (जुलाई 2026 संस्करण, लिंक) और 12वीं योजना के अंत, मार्च 2017 में 44,478.42 MW (फ़रवरी 2026 संस्करण)। टाइमलाइन PIB पर विद्युत मंत्रालय और मंत्रिमंडल की विज्ञप्तियों से 2017–2026 के दिनांकित नीतिगत निर्णय और परियोजना उपलब्धियाँ दिखाती है। इस अवधि के केवल दो CEA वर्षांत आँकड़ों की पुष्टि हो सकी, इसलिए चार्ट नहीं दिखाया गया। · लिंक