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आपदा प्रबंधन

आपदा प्रबंधन

भारत दुनिया के सबसे आपदा-प्रवण देशों में से एक है — चक्रवात, बाढ़, भूकंप। आपदा प्रबंधन अधिनियम (2005) और NDMA के बाद से, ध्यान राहत से तैयारी की ओर बदला, और परिणाम आश्चर्यजनक हैं: चक्रवात मृत्यु 1999 ओडिशा महा-चक्रवात के लगभग 10,000 से घटकर आज मुट्ठी भर हुई, प्रारंभिक चेतावनियों और सामूहिक निकासी के कारण। 2019 में भारत ने वैश्विक आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (CDRI) शुरू किया। यह समयरेखा यात्रा को दर्शाती है।

Rescue Operation of NDRF during Kosi Floods
Rescue Operation of NDRF during Kosi Floods · Kumarrakajee · CC BY-SA 3.0 · Wikimedia Commons
10,000 → few
चक्रवात मृत्यु 1999 → अब
2019
भारत-नेतृत्व CDRI
2005
DM अधिनियम व NDMA
Saving lives from disasters
2005
Disaster Management Act
India passes the Disaster Management Act and sets up the National Disaster Management Authority (NDMA), shifting from relief to preparedness.
2016
First national plan
2019
Near-zero-casualty cyclones & CDRI
2023
Resilience goes mainstream
2025
Mission Mausam
2005
1milestones
20052023
Latest
Disaster Management Act
India passes the Disaster Management Act and sets up the National Disaster Management Authority (NDMA), shifting from relief to preparedness.

यह क्यों मायने रखता है बेहतर पूर्वानुमान, निकासी और प्रतिरोधी अवसंरचना हज़ारों जानें और अरबों की क्षति बचाती है — और भारत अब इस विशेषज्ञता को विश्व स्तर पर निर्यात करता है।

  • चक्रवात मृत्यु ~10,000 (1999) → आज इकाई अंक
  • DM अधिनियम (2005), NDMA/NDRF; भारत-नेतृत्व CDRI (2019)
  • स्रोत: NDMA / CDRI

इतिहास

भारत हर साल चक्रवात, बाढ़, भूकंप व सूखे का सामना करता है। आपदा प्रबंधन अधिनियम (2005) और NDMA ने देश को आपदा-बाद राहत से रोकथाम, पूर्वानुमान व तैयारी की ओर मोड़ा।

जीवन बचाना

परिणाम नाटकीय हैं: 1999 ओडिशा महा-चक्रवात ने लगभग 10,000 मारे; समान शक्ति के हाल के चक्रवात केवल मुट्ठी भर मारते हैं, प्रारंभिक चेतावनियों व सामूहिक निकासी के कारण। 2019 में भारत ने वैश्विक आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (CDRI) शुरू किया।

यह कैसे काम करता है

भारत की आपदा प्रणाली प्रतिक्रिया से रोकथाम की ओर बदली। एक स्तरीय संरचना — शीर्ष पर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, विशेषज्ञ त्वरित-प्रतिक्रिया बल के रूप में NDRF, व नीचे राज्य व ज़िला निकाय — बाढ़, चक्रवात, भूकंप आदि की योजना व प्रतिक्रिया करती है। सबसे बड़ा लाभ पूर्व चेतावनी व निकासी से — चक्रवात को दिनों पहले ट्रैक करना व लाखों लोगों को आश्रय में ले जाना।

आगे की राह

परिणाम आश्चर्यजनक — चक्रवात जो कभी हज़ारों को मारते थे (जैसे 1999 ओडिशा सुपर-चक्रवात) अब कुछ या शून्य मौतें लाते हैं, पूर्व चेतावनी व सामूहिक निकासी से। भारत एक वैश्विक पहल आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (CDRI) का भी नेतृत्व करता है। अगली सीमा हर चीज़ में लचीलापन बनाना — अवसंरचना को जलवायु-रोधी बनाना, शहरों को लू व बाढ़ हेतु तैयार करना, व वसूली व बीमा को सबसे ग़रीब तक तेज़ी से पहुंचाना।

आगे का रास्ता

अगली सीमा हर सड़क, भवन व शहर में सहनशीलता बनाना है — केवल तेज़ी से प्रतिक्रिया नहीं — क्योंकि जलवायु परिवर्तन बाढ़, लू व चक्रवात को तीव्र बना रहा है।

आँकड़ों में

चक्रवात मृत्यु ~10,000 (1999) → इकाई अंक; DM अधिनियम (2005), NDMA/NDRF; भारत-नेतृत्व CDRI (2019)। स्रोत: NDMA / CDRI।

स्रोत: NDMA / CDRI — disaster-management & resilience milestones, 2005–2023.