भारत की 7,500 किमी तटरेखा व विशाल महासागरीय क्षेत्र है, पर दशकों तक इसकी गहराइयों का कम अन्वेषण हुआ। गहन महासागर मिशन 2021 में लगभग ₹4,077 करोड़ के पाँच-वर्षीय परिव्यय से स्वीकृत हुआ, जिसे पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय चलाता है। इसका साहसिक लक्ष्य: भारतीयों को एक स्वदेशी पनडुब्बी में गहरे-समुद्र तल तक भेजना।
गहन महासागर मिशन
भारत का गहन महासागर मिशन (2021 में स्वीकृत, ~₹4,077 करोड़) गहरे समुद्र को वैसे ही खोल रहा है जैसे इसरो ने अंतरिक्ष को। इसका केंद्र, मत्स्य-6000 पनडुब्बी, तीन एक्वानॉट्स को 6,000 मीटर नीचे ले जाने हेतु डिज़ाइन है। काउंटर वह गहराई दिखाता है जिसकी ओर कार्यक्रम बढ़ रहा है (सांकेतिक)।

| वर्ष | Dive depth reached |
|---|---|
| 2021 | 0 m |
| 2022 | 500 m |
| 2023 | 1,200 m |
| 2024 | 3,000 m |
| 2025 | 5,000 m |
| 2026 | 5,500 m |
| 2027 | 6,000 m |
यह क्यों मायने रखता है गहरा समुद्र कोबाल्ट, निकल व दुर्लभ धातुओं से भरपूर पॉलीमेटैलिक नोड्यूल, अनूठी जैव-विविधता, व जलवायु के सुराग रखता है। 6,000 मीटर तक पहुँचना भारत को कुछ ही देशों के समूह में लाएगा, और एक टिकाऊ 'नील अर्थव्यवस्था' को आधार देगा।
- NIOT चेन्नई द्वारा निर्मित मत्स्य-6000, तीन एक्वानॉट्स को टाइटेनियम गोले में 6,000 मीटर ले जाएगा।
- 2025 में एक भारतीय 5,000 मीटर गोता लगाने वाला पहला बना (एक फ्रांसीसी पनडुब्बी में), एक अहम कदम।
- पूर्ण 6-किमी मानवयुक्त गोता 2027 के लिए लक्षित; केवल अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस व जापान ने यह किया है।
- मिशन पॉलीमेटैलिक नोड्यूल को लक्ष्य करता है व भारत के नील-अर्थव्यवस्था लक्ष्यों का समर्थन करता है।
इतिहास
उल्लेखनीय उपलब्धि
मिशन का प्रमुख मत्स्य-6000 है, NIOT चेन्नई द्वारा निर्मित एक मानवयुक्त पनडुब्बी जो तीन एक्वानॉट्स को 6,000 मीटर एक टाइटेनियम गोले में ले जाएगी। 2025 में, एक भारतीय एक फ्रांसीसी पनडुब्बी में 5,000 मीटर गोता लगाने वाला पहला बना — मत्स्य-6000 के 2027 के लक्षित गहरे गोते की ओर एक अहम कदम।
यह कैसे काम करता है
टाइटेनियम कर्मी-गोला चालक दल को कुचलने वाले दबाव से बचाता है — सतह से 600 गुना अधिक। पनडुब्बी में 12 घंटे (आपात में 96) की जीवन-रक्षा प्रणाली, साथ ही समुद्र-तल के अध्ययन हेतु सेंसर, नमूना-संग्राहक व रोबोटिक भुजाएँ हैं। सहयोगी परियोजनाएँ पॉलीमेटैलिक नोड्यूल, महासागर जलवायु व गहरे-समुद्र जैव-विविधता का मानचित्रण करती हैं।
आगे की राह
गहरा समुद्र अगला संसाधन व विज्ञान क्षेत्र है। भारत के पास पॉलीमेटैलिक नोड्यूल हेतु मध्य हिंद महासागर के बड़े क्षेत्रों पर अन्वेषण अधिकार हैं — बैटरियों में प्रयुक्त निकल, कोबाल्ट, ताँबा व मैंगनीज़ से भरपूर चट्टानी गुठलियाँ। 6,000 मीटर मानवयुक्त गोता भारत को केवल अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस व जापान के बीच लाएगा।
आगे का रास्ता
गहरे-समुद्र की इंजीनियरिंग कठोर है: गोले का दबाव-परीक्षण, जीवन-रक्षा प्रमाणन, व चरणबद्ध गोते (पहले उथले, फिर गहरे) सभी समय लेते हैं — इसीलिए 6-किमी गोता 2027 की ओर खिसका। अन्वेषण को नाज़ुक पारिस्थितिकी को नुकसान पहुँचाए बिना ज़िम्मेदार, टिकाऊ उपयोग में बदलना लंबी चुनौती है।
आँकड़ों में
₹4,077 करोड़ मिशन परिव्यय (2021)। मत्स्य-6000 पनडुब्बी — 3 एक्वानॉट्स, 6,000 मीटर गहराई लक्ष्य। 2025 में एक भारतीय द्वारा 5,000 मीटर गोता। पूर्ण मानवयुक्त 6-किमी गोते हेतु 2027 लक्ष्य। स्रोत: पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, NIOT, PIB।
स्रोत: Ministry of Earth Sciences / NIOT — Samudrayaan & Matsya-6000, 2021→2027. Depth path illustrative.