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वस्त्र

वस्त्र

वस्त्र भारत के सबसे पुराने उद्योगों में से एक और इसका दूसरा सबसे बड़ा नियोक्ता है, जो कपास के खेतों से लेकर परिधान कारखानों तक 4.5 करोड़ से अधिक लोगों का आधार है। घरेलू वस्त्र और परिधान बाज़ार बढ़कर लगभग $175 अरब हुआ, और भारत शीर्ष-पाँच वैश्विक निर्यातकों में है। यह काउंटर वस्त्र और परिधान बाज़ार का सांकेतिक आकार दिखाता है।

The image captures a traditional handloom weaving setup, likely inside a rural or artisan's workshop. The wooden loom, intricate pulley syst
The image captures a traditional handloom weaving setup, likely inside a rural or artisan's workshop. The wooden loom, intricate pulley syst · Rishikachauhan1 · CC BY-SA 4.0 · Wikimedia Commons
~$100 → 175 bn
बाज़ार आकार
~4.5 crore
रोज़गार
Top 5
वैश्विक निर्यातक
Textile & apparel market
Textile market size
वर्षTextile market size
2014100 $ bn
2015108 $ bn
2016116 $ bn
2017125 $ bn
2018135 $ bn
2019145 $ bn
2020130 $ bn
2021150 $ bn
2022160 $ bn
2023168 $ bn
2024175 $ bn
2025185 $ bn
2014
0$ bn
Textile market size
20142025
Since 2014
Added
+85 $ bn
2014
100 $ bn
2025
185 $ bn

यह क्यों मायने रखता है वस्त्र लाखों को रोज़गार देते हैं — जिनमें कई महिलाएँ और ग्रामीण श्रमिक हैं — इसलिए उद्योग की सेहत सीधे पूरे देश में आजीविका को आकार देती है।

  • बाज़ार आकार: ~$100 अरब (2014) → ~$175 अरब (2024); 4.5 करोड़+ नौकरियाँ
  • PLI, पीएम मित्र पार्क; निर्यात प्रतिस्पर्धियों से पीछे
  • स्रोत: वस्त्र मंत्रालय / IBEF (सांकेतिक)

इतिहास

वस्त्र भारत के सबसे पुराने उद्योगों में और कृषि के बाद इसका दूसरा सबसे बड़ा नियोक्ता है, जो मूल्य-श्रृंखला में 4.5 करोड़ से अधिक लोगों का आधार है — कपास खेती, कताई, बुनाई, और परिधान-निर्माण। घरेलू वस्त्र व परिधान बाज़ार बढ़कर लगभग $175 अरब हुआ, और भारत दुनिया के शीर्ष-पाँच वस्त्र निर्यातकों में बना हुआ है, कपास में मज़बूत और तकनीकी वस्त्रों में बढ़ता हुआ।

प्रमुख पहल

क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए, सरकार ने मानव-निर्मित फ़ाइबर और तकनीकी वस्त्रों के लिए PLI योजना और प्लग-एंड-प्ले अवसंरचना वाले सात मेगा वस्त्र पार्कों के लिए पीएम मित्र योजना शुरू की। दुनिया के सबसे बड़े कपास उत्पादक के रूप में भारत की स्थिति, युवा कार्यबल और मुक्त-व्यापार समझौते (जैसे भारत-यूके FTA) निर्यात को $100 अरब लक्ष्य की ओर उठाने के लिए हैं।

यह कैसे काम करता है

वस्त्र एक पूरी मूल्य शृंखला है — कपास व मानव-निर्मित फाइबर से धागा, कपड़ा, रंगाई व तैयार कपड़े तक — और भारत उन कुछ देशों में से है जो हर चरण घर में करता है। यह कृषि के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा नियोक्ता है, लाखों छोटी इकाइयों व बुनकरों से चलता। नीति अब दो चीज़ें बढ़ाती है: पैमाना (बड़े एकीकृत पार्क व प्रोत्साहन) और कपास से मानव-निर्मित व तकनीकी वस्त्र की ओर बदलाव।

आगे की राह

वस्त्र व परिधान निर्यात लगभग $37 अरब, क्षेत्र लगभग 4.5 करोड़ लोगों को सीधे रोज़गार देता, और सरकार इसे ₹10,683-करोड़ PLIसात PM MITRA मेगा-पार्क से समर्थन दे रही — 2030 तक $100 अरब निर्यात का लक्ष्य। आगे का काम आकार को प्रतिस्पर्धा में बदलना — बांग्लादेश व वियतनाम से लागत व गति पर मिलान, उच्च-मूल्य मानव-निर्मित व तकनीकी वस्त्रों में चढ़ना।

आगे का रास्ता

आगे का काम आकार को प्रतिस्पर्धी निर्यात में बदलना है — भारत का वस्त्र निर्यात लगभग $35-40 अरब पर रहा है, इसलिए अगला क़दम बड़ा होना, मानव-निर्मित-फ़ाइबर क्षमता बढ़ाना, और बांग्लादेश व वियतनाम से अंतर पाटना है।

आँकड़ों में

~$100 → ~$175 अरब बाज़ार (2014→2024, सांकेतिक)। ~4.5 करोड़ रोज़गार। शीर्ष-5 वैश्विक निर्यातक। निर्यात ~$35-40 अरब, लगभग स्थिर। PLI + पीएम मित्र। स्रोत: वस्त्र मंत्रालय, IBEF, Invest India।

स्रोत: Ministry of Textiles / IBEF — indicative textile & apparel market size (US$ billion), 2014–2025.