आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने मार्च 2015 में सात वर्षों में ₹4,500 करोड़ की अनुमानित लागत पर राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन को स्वीकृति दी, जिसमें 70 से अधिक उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग सुविधाओं के ग्रिड की परिकल्पना थी। 2015 में नियोजित नेटवर्क की कुल क्षमता 15–20 पेटाफ्लॉप थी; बाद में इसे उसी लागत में संशोधित कर 45 पेटाफ्लॉप किया गया। पहली स्वदेशी रूप से निर्मित प्रणाली PARAM शिवाय का उद्घाटन 19 फ़रवरी 2019 को IIT (BHU), वाराणसी में हुआ, जिसके बाद IIT खड़गपुर और IISER पुणे में प्रणालियाँ लगीं। 2022 में IISc बेंगलुरु ने 3.3 पेटाफ्लॉप का PARAM प्रवेग स्थापित किया, जो उस समय किसी भारतीय शैक्षणिक संस्थान में स्थापित सबसे बड़ा सुपरकंप्यूटर था।
राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन
राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) को मार्च 2015 में ₹4,500 करोड़ की अनुमानित लागत पर स्वीकृति मिली, ताकि भारत के शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों को राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क से जुड़े सुपरकंप्यूटरों तक पहुँच मिल सके। इसका संचालन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय संयुक्त रूप से करते हैं, और क्रियान्वयन C-DAC, पुणे तथा IISc, बेंगलुरु करते हैं। 22 जून 2026 तक इसने 47 पेटाफ्लॉप की कुल कंप्यूटिंग क्षमता वाले 38 सुपरकंप्यूटर स्थापित किए थे। इसकी PARAM रुद्र प्रणालियों में C-DAC द्वारा डिज़ाइन किए गए और भारत में निर्मित रुद्र सर्वर लगे हैं।

यह क्यों मायने रखता है सुपरकंप्यूटर मौसम और जलवायु पूर्वानुमान, दवा खोज, सामग्री अनुसंधान, खगोल विज्ञान और इंजीनियरिंग डिज़ाइन के पीछे के बड़े सिमुलेशन चलाते हैं। दिसंबर 2025 तक NSM प्रणालियों ने 1,700 से अधिक PhD शोधार्थियों सहित 13,000 से अधिक शोधकर्ताओं को सहायता दी थी और एक करोड़ से अधिक कंप्यूट जॉब पूरे किए थे। प्रमुख संस्थानों के साथ-साथ टियर-II और टियर-III शहरों में प्रणालियाँ लगाने से इनका उपयोग करने वालों का दायरा बढ़ता है।
- मार्च 2015 में स्वीकृत: सात वर्षों में ₹4,500 करोड़, जिसमें लगभग ₹2,800 करोड़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय से और लगभग ₹1,700 करोड़ MeitY से (DST)
- स्थापित सुपरकंप्यूटर: 35 पेटाफ्लॉप वाले 34 (मार्च 2025) → 40 पेटाफ्लॉप वाले 37 (अगस्त 2025) → 47 पेटाफ्लॉप वाले 38 (जून 2026)
- सहायता पाने वाले शोधकर्ता: लगभग 3,600 (मार्च 2022) → 10,000 से अधिक (मार्च 2025) → 13,000 से अधिक (दिसंबर 2025)
- PARAM रुद्र सुपरकंप्यूटरों में 6,000 रुद्र सर्वर लगाए गए, और 1,500 और बनाए जा रहे हैं (दिसंबर 2025)
- अर्क (IITM पुणे, 11.77 पेटाफ्लॉप) और अरुणिका (NCMRWF नोएडा, 8.24 पेटाफ्लॉप) ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की कंप्यूटिंग क्षमता 6.8 से बढ़ाकर 22 पेटाफ्लॉप की (सितंबर 2024)
- 22,000 से अधिक लोगों को HPC और AI कौशल का प्रशिक्षण (अप्रैल 2025)
इतिहास
उल्लेखनीय उपलब्धि
26 सितंबर 2024 को प्रधानमंत्री ने लगभग ₹130 करोड़ के तीन PARAM रुद्र सुपरकंप्यूटर राष्ट्र को समर्पित किए: अंतर-विश्वविद्यालय त्वरक केंद्र, दिल्ली में 3 पेटाफ्लॉप, जायंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप, पुणे में 1 पेटाफ्लॉप, और एस. एन. बोस राष्ट्रीय केंद्र, कोलकाता में 838 टेराफ्लॉप। ये स्वदेशी रूप से डिज़ाइन और निर्मित रुद्र सर्वरों और स्वदेशी सॉफ़्टवेयर स्टैक पर बने हैं। उसी दिन उन्होंने IITM पुणे और NCMRWF नोएडा में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की ₹850 करोड़ की मौसम और जलवायु कंप्यूटिंग प्रणाली अर्क और अरुणिका का उद्घाटन किया। दिसंबर 2025 में संसद को दी गई NSM के स्थापित सुपरकंप्यूटरों की सूची में अर्क और अरुणिका शामिल नहीं हैं।
यह कैसे काम करता है
मिशन शैक्षणिक संस्थानों और R&D प्रयोगशालाओं में विभिन्न क्षमताओं के सुपरकंप्यूटर लगाता है, और शोधकर्ता राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क के ज़रिये इन तक पहुँचते हैं। इसे तीन चरणों में बनाया गया: पहले, छह सुपरकंप्यूटर जिनके घटकों का बड़ा हिस्सा भारत में असेंबल हुआ; फिर स्थानीय सॉफ़्टवेयर स्टैक के साथ स्वदेशी निर्माण, जिससे भारतीय मूल्यवर्धन 40% हुआ; और अंत में डिज़ाइन और निर्माण का पूर्ण स्वदेशीकरण। अपने निर्माण दृष्टिकोण के तहत C-DAC ने रुद्र सर्वर और त्रिनेत्र हाई-स्पीड इंटरकनेक्ट विकसित किए, और रुद्र की तकनीक तीन भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण भागीदारों को हस्तांतरित की। पुणे, खड़गपुर, चेन्नई, पलक्कड़ और गोवा के प्रशिक्षण केंद्र उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग के पाठ्यक्रम चलाते हैं।
आगे की राह
दिसंबर 2025 में सरकार ने संसद को बताया कि 10 और सुपरकंप्यूटर स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें 20 पेटाफ्लॉप क्षमता की एक राष्ट्रीय सुविधा शामिल है, और NSM 2.0 का रोडमैप तैयार किया जा रहा है। NSM 2.0 के तहत उद्योग भागीदारों के साथ भारत का अपना प्रोसेसर विकसित करने पर विचार हो रहा है, और HPC प्रोसेसर, एक्सेलेरेटर और स्टोरेज का डिज़ाइन और विकास शुरू किया गया है। अधिकांश प्रणालियाँ 81% से अधिक क्षमता पर और कुछ 95% से ऊपर चल रही थीं। अप्रैल 2025 तक मिशन के तहत ₹1,874 करोड़ आवंटित या उपयोग किए गए थे।
आँकड़ों में
₹4,500 करोड़ मिशन लागत स्वीकृत (मार्च 2015)। 47 पेटाफ्लॉप वाले 38 सुपरकंप्यूटर (जून 2026), 35 पेटाफ्लॉप वाले 34 (मार्च 2025) से। 13,000+ शोधकर्ताओं और 1,700+ PhD शोधार्थियों को सहायता, 1 करोड़+ कंप्यूट जॉब और 1,500+ शोध पत्र (दिसंबर 2025)। 6,000 रुद्र सर्वर लगाए गए (दिसंबर 2025)। TOP500 में AIRAWAT 75वें स्थान पर (ISC 2023)। स्रोत: PIB (DST, MeitY और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की विज्ञप्तियाँ और संसद उत्तर, 2015–2026); DST; C-DAC।
आँकड़े इस तिथि तक: 22 जून 2026 की रिपोर्ट के अनुसार
स्रोत: PIB के माध्यम से DST, MeitY और C-DAC — समयरेखा में मिशन की स्वीकृति (मार्च 2015), PARAM शिवाय (2019), PARAM सिद्धि-AI की TOP500 रैंकिंग (2020), PARAM प्रवेग और PARAM गंगा (2022), AIRAWAT की TOP500 रैंकिंग (2023), तीन PARAM रुद्र प्रणालियों और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की अर्क और अरुणिका (सितंबर 2024), तथा 2025 और 2026 में स्थापित प्रणालियों की दिनांकित संख्या की तिथियाँ हैं। मुख्य आँकड़ा: 22 जून 2026 का PIB पृष्ठभूमि नोट (लिंक) — 47 पेटाफ्लॉप की कुल कंप्यूटिंग क्षमता वाले 38 सुपरकंप्यूटर। · लिंक