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इस्पात और मूल उद्योग

इस्पात और मूल उद्योग

इस्पात निर्माण, रेलवे, ऑटो और रक्षा की रीढ़ है, इसलिए इसका उत्पादन देश निर्माण की गति दर्शाता है। भारत का कच्चा इस्पात उत्पादन 2014 के लगभग 87 मिलियन टन से बढ़कर 2024 में लगभग 149 मिलियन टन हुआ, और 2018 में भारत जापान को पीछे छोड़ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक बना। काउंटर कच्चा इस्पात उत्पादन दिखाता है।

Bokaro Steel Plant
Bokaro Steel Plant · SuLTan0203 · CC BY-SA 3.0 · Wikimedia Commons
87 → 150 MT
कच्चा इस्पात उत्पादन
2nd
दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक
~200 MT
क्षमता (2024-25)
Crude steel production
Crude steel production
वर्षCrude steel production
201487 MT
201589 MT
201696 MT
2017101 MT
2018109 MT
2019111 MT
2020100 MT
2021118 MT
2022125 MT
2023140 MT
2024149 MT
2025152 MT
2014
0MT
Crude steel production
20142025
Since 2014
Added
+65 MT
2014
87 MT
2025
152 MT

यह क्यों मायने रखता है इस्पात माँग सड़कों, आवास, रेलवे और विनिर्माण के साथ बढ़ती है, इसलिए यह अवसंरचना विकास का चालक और बैरोमीटर दोनों है।

  • कच्चा इस्पात: ~87 MT (2014) → ~149 MT (2024); दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक
  • क्षमता ~200 MT; 2030 तक 300 MT लक्ष्य; ~25 लाख नौकरियाँ
  • स्रोत: इस्पात मंत्रालय / World Steel

इतिहास

इस्पात माँग हर उस चीज़ के साथ बढ़ती है जो एक बढ़ता देश बनाता है — सड़कें, रेलवे, आवास, कारें और मशीनरी। भारत का कच्चा इस्पात उत्पादन 2014 के लगभग 87 मिलियन टन से 2024 में लगभग 149 मिलियन टन हुआ, और 2018 में भारत जापान को पीछे छोड़ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक बना। क्षमता लगभग 200 MT पहुँची, राष्ट्रीय इस्पात नीति के तहत 2030 तक 300 MT के लक्ष्य के साथ।

प्रमुख विकास

भारत 2014-15 में शुद्ध इस्पात आयातक से हाल के अधिकांश वर्षों में शुद्ध निर्यातक बना। निजी क्षेत्र अब 80% से अधिक उत्पादन का हिस्सा है, ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ में मेगा-संयंत्र बढ़े, और विशेष इस्पात के लिए PLI योजना उच्च-स्तरीय आयात घटाने का लक्ष्य रखती है। यह क्षेत्र सीधे लगभग 25 लाख लोगों को रोज़गार देता है।

यह कैसे काम करता है

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक है, जो बड़े एकीकृत संयंत्रों (टाटा स्टील, JSW, SAIL) — जो लौह-अयस्क व कोकिंग कोयले पर ब्लास्ट फ़र्नेस चलाते हैं — और हज़ारों छोटी विद्युत-भट्टी इकाइयों के मिश्रण से बनता है। चूँकि भारत में लौह-अयस्क प्रचुर है पर अधिकांश कोकिंग कोयला आयात होता है, वह आयात-बिल एक संरचनात्मक कमज़ोरी है — और स्क्रैप-आधारित व हाइड्रोजन-आधारित 'हरित इस्पात' की ओर बड़े ज़ोर का कारण।

आगे की राह

राष्ट्रीय इस्पात नीति 2030-31 तक 300 मिलियन टन क्षमता का लक्ष्य रखती है (आज के लगभग 200 MT से) और प्रति-व्यक्ति इस्पात उपयोग (~100 किग्रा) को विश्व औसत की ओर दोगुने से अधिक करने का लक्ष्य रखती है। आगे के दोहरे लक्ष्य हैं हरित इस्पात — क्षेत्र का भारी कार्बन पदचिह्न घटाना — और कोकिंग-कोयला आयात निर्भरता लगभग 85% से 65% की ओर घटाना, साथ ही संयंत्रों को सस्ते चीनी आयात से बचाना।

आगे का रास्ता

अगली सीमा हरित इस्पात है — आयातित कोकिंग कोयले पर निर्भरता घटाना, लौह-अयस्क व स्क्रैप आपूर्ति मज़बूत करना, और प्रति-व्यक्ति इस्पात उपयोग (~108 किग्रा) को विश्व औसत की ओर बढ़ाना।

आँकड़ों में

~87 → ~149 MT कच्चा इस्पात (2014→2024)। दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक (2018 से)। ~200 MT क्षमता; 2030 तक 300 MT लक्ष्य। ~25 लाख नौकरियाँ। स्रोत: इस्पात मंत्रालय, World Steel।

स्रोत: Ministry of Steel / World Steel — crude steel production (million tonnes), 2014–2025.