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स्किल इंडिया

स्किल इंडिया

दुनिया की सबसे युवा आबादियों में से एक के साथ, युवा भारतीयों को रोज़गार-योग्य कौशल देना राष्ट्रीय प्राथमिकता है। 2015 में शुरू हुए स्किल इंडिया मिशन ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) और ITI व कौशल केंद्रों के नेटवर्क के तहत व्यावसायिक प्रशिक्षण को एक साथ लाया। PMKVY के तहत 1.6 करोड़ से अधिक उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया गया, तेज़ी से AI व रोबोटिक्स जैसे भविष्य-कौशलों में। काउंटर PMKVY के तहत संचयी प्रशिक्षित उम्मीदवार दिखाता है।

Man forming metals 2 at Workshops
Man forming metals 2 at Workshops · Wikimedia Commons
0 → 1.64 cr
PMKVY के तहत प्रशिक्षित
AI · robotics
PMKVY 4.0 भविष्य कौशल
world's youngest
बड़ा कार्यबल
Trained under PMKVY
Trained under PMKVY
वर्षTrained under PMKVY
20150 crore
20160 crore
20171 crore
20181 crore
20191 crore
20201 crore
20211 crore
20221 crore
20232 crore
20242 crore
20252 crore
2015
0crore
Trained under PMKVY
20152025
Since 2015
Added
+2 crore
2015
0 crore
2025
2 crore

यह क्यों मायने रखता है भारत का 'जनसांख्यिकीय लाभांश' तभी फल देता है जब युवाओं के पास नियोक्ताओं की ज़रूरत के कौशल हों — अन्यथा युवा आबादी संपत्ति नहीं, दायित्व बन जाती है।

  • PMKVY: 0 → ~1.64 करोड़ प्रशिक्षित (2015→2024)
  • स्किल इंडिया मिशन 2025 तक 40 करोड़ कुशल का लक्ष्य
  • स्रोत: कौशल विकास मंत्रालय

इतिहास

भारत की दुनिया की सबसे युवा आबादियों में से एक है, और इसे 'जनसांख्यिकीय लाभांश' में बदलना कौशल पर निर्भर है। 2015 में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के साथ शुरू हुए स्किल इंडिया मिशन ने अल्पकालिक व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए राष्ट्रीय ढाँचा बनाया, ITI, शिक्षुता और क्षेत्र कौशल परिषदों के साथ। PMKVY के अपने चरणों में 1.6 करोड़ से अधिक उम्मीदवार प्रशिक्षित हुए हैं।

प्रमुख विशेषताएँ

बाद के चरणों ने भविष्य कौशल पर ध्यान जोड़ा — PMKVY 4.0 के तहत AI, रोबोटिक्स, ड्रोन और इंडस्ट्री 4.0 — और स्कूलों व कॉलेजों में हज़ारों कौशल केंद्र। पूर्व शिक्षा की मान्यता श्रमिकों के पास पहले से मौजूद कौशल प्रमाणित करती है, शिक्षुता वृत्तिका प्रत्यक्ष लाभ अंतरण से जाती है, और एक नया इंटर्नशिप प्रयास युवाओं को भारत की शीर्ष कंपनियों में रखने का लक्ष्य रखता है।

यह कैसे काम करता है

स्किल इंडिया भारत के विशाल युवा कार्यबल को औपचारिक डिग्री प्रणाली से बाहर रोज़गार-तैयार कौशल देने की कोशिश करता है। इसके मुख्य वाहन हैं प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) — वेल्डिंग से आतिथ्य तक व्यवसायों में छोटे, निःशुल्क पाठ्यक्रम — औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) का राष्ट्रीय नेटवर्क, और एक बढ़ता प्रशिक्षुता कार्यक्रम जो प्रशिक्षुओं को वास्तविक कंपनियों में रखता है। प्रशिक्षण उद्योग-निर्धारित मानकों से जुड़ा है ताकि प्रमाणपत्र नियोक्ताओं के लिए मायने रखे।

आगे की राह

करोड़ों प्रशिक्षित हुए, पर असली परीक्षा प्रशिक्षण को रोज़गार में बदलना है — प्लेसमेंट दरें व उद्योग-प्रासंगिकता अक्सर पिछड़ी हैं, इसलिए प्रमाणपत्र हमेशा काम नहीं दिलाते। आगे का ज़ोर मज़बूत उद्योग-संपर्क (प्रशिक्षुता, काम-पर-प्रशिक्षण), AI व हरित तकनीक जैसे भविष्य-कौशल में उच्च-गुणवत्ता पाठ्यक्रम, और ITI उन्नयन पर है — क्योंकि भारत का 'जनसांख्यिकीय लाभांश' तभी फल देता है जब उसके युवा वास्तव में रोज़गार-योग्य हों।

आगे का रास्ता

अगला क़दम प्रशिक्षण को रोज़गार में बदलना है — प्लेसमेंट व उद्योग-प्रासंगिकता सुधारना ताकि प्रमाणपत्र केवल संख्या नहीं, वास्तविक रोज़गार दिलाएँ।

आँकड़ों में

PMKVY के तहत 0 → ~1.64 करोड़ प्रशिक्षित (2015→2024)। PMKVY 4.0 का AI, रोबोटिक्स, ड्रोन पर ध्यान। 2025 तक 40 करोड़ कौशल लक्ष्य। स्रोत: कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय।

स्रोत: Ministry of Skill Development — cumulative candidates trained under PMKVY (crore), 2015–2025.