दशकों तक भारत ने एक विश्व-विजयी जेनेरिक-दवा उद्योग बनाया — पर आधुनिक चिकित्सा की मशीनें व उपकरण नहीं। स्कैनर, इम्प्लांट, कैथेटर व नैदानिक किट अधिकतर आयातित थे। मेक इन इंडिया (2014) के बाद एक 'उदय क्षेत्र' के रूप में मान्यता प्राप्त, चिकित्सा उपकरण उस निर्भरता को घटाने हेतु एक नीति प्राथमिकता बन गए।
चिकित्सा उपकरण
चिकित्सा उपकरण — सिरिंज व स्टेंट से लेकर MRI स्कैनर व वेंटिलेटर तक — भारत की स्वास्थ्य-सेवा का एक तेज़ी से बढ़ता पर भारी आयात-निर्भर हिस्सा हैं। बाज़ार 2024 में लगभग $18 अरब तक पहुँचा, व सरकार इसका अधिक हिस्सा घर पर बनाने हेतु ज़ोर लगा रही है। काउंटर बाज़ार की वृद्धि दिखाता है (सांकेतिक)।

| वर्ष | Medical-device market |
|---|---|
| 2014 | 5 $ bn |
| 2016 | 7 $ bn |
| 2018 | 9 $ bn |
| 2020 | 11 $ bn |
| 2022 | 14 $ bn |
| 2024 | 18 $ bn |
| 2026 | 20 $ bn |
यह क्यों मायने रखता है भारत अपने चिकित्सा उपकरणों का लगभग 70-80% आयात करता है, विदेश में साल में दसियों हज़ार करोड़ खर्च करते हुए। इन्हें घरेलू रूप से बनाना — मेक इन इंडिया, एक समर्पित PLI योजना व चिकित्सा-उपकरण पार्कों के तहत — लागत घटाएगा, आपूर्ति सुरक्षित करेगा (कोविड से एक सबक), व एक निर्यात उद्योग बनाएगा।
- भारत का चिकित्सा-उपकरण बाज़ार 2024 में लगभग $18 अरब तक पहुँचा व तेज़ी से बढ़ रहा है।
- भारत अभी भी अपने चिकित्सा उपकरणों का लगभग 70-80% आयात करता है।
- राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति (2023) व एक ₹3,420 करोड़ PLI योजना घरेलू विनिर्माण का समर्थन करती हैं।
- PLI योजना के तहत 22 ग्रीनफ़ील्ड संयंत्रों ने उपकरण बनाना शुरू किया; चार उपकरण पार्क स्थापित हुए।
इतिहास
उल्लेखनीय उपलब्धि
सरकार ने 2023 में एक राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति व एक ₹3,420 करोड़ PLI योजना (2022-2027) स्वीकृत की जो घरेलू रूप से बने उच्च-स्तरीय उपकरणों पर प्रोत्साहन देती है। विनिर्माण को समूहित करने हेतु चार चिकित्सा उपकरण पार्क (आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु व उत्तर प्रदेश में) स्थापित किए गए।
यह कैसे काम करता है
PLI योजना भारत में बने उपकरणों की वृद्धिशील बिक्री पर 5% प्रोत्साहन देती है, उन खंडों को लक्ष्य करते हुए जो भारत सबसे अधिक आयात करता है — इमेजिंग (CT, MRI), कैंसर देखभाल, इम्प्लांट व गहन-देखभाल उपकरण। उपकरण पार्क तैयार अवसंरचना देते हैं — परीक्षण प्रयोगशालाएँ, स्टरलाइज़ेशन, साझा सुविधाएँ — ताकि निर्माता तेज़ी से व सस्ते में शुरू कर सकें।
आगे की राह
शुरुआती परिणाम दिखते हैं: PLI के तहत 22 ग्रीनफ़ील्ड संयंत्रों ने CT स्कैनर, MRI मशीन, लीनियर एक्सेलेरेटर व डायलाइज़र जैसे उपकरणों का उत्पादन शुरू किया है जिन्हें भारत कभी केवल आयात करता था। वैश्विक दिग्गज — GE, Philips, Siemens — असेंबली स्थानीयकृत कर रहे हैं, व बाज़ार दोहरे अंकों में बढ़ता रहने का अनुमान है।
आगे का रास्ता
सच्ची आत्मनिर्भरता अभी वर्षों दूर है: स्थानीय रूप से असेंबल किए गए स्कैनर भी एक्स-रे ट्यूब व डिटेक्टर जैसे आयातित घटकों पर निर्भर हैं, इसलिए घरेलू मूल्य-वर्धन केवल 40-50% है। गहरी आपूर्ति शृंखला बनाना — सेंसर, चिकित्सा-ग्रेड सामग्री, चिप — निरंतर R&D चाहती है। क्या एक PLI 2.0 आता है, अगले चरण को आकार देगा।
आँकड़ों में
~$18 अरब बाज़ार (2024), $30 अरब+ की ओर। 70-80% अभी भी आयातित। राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति 2023; ₹3,420 करोड़ PLI (2022-27)। 22 ग्रीनफ़ील्ड संयंत्र उत्पादनरत; 4 उपकरण पार्क। स्रोत: फार्मास्युटिकल्स विभाग, IBEF, PIB।
स्रोत: Dept of Pharmaceuticals / IBEF — India's medical-device market size, 2014→2026. Curve illustrative.