दशकों तक भारत ने एक विश्व-विजयी जेनेरिक-दवा उद्योग बनाया — पर आधुनिक चिकित्सा की मशीनें व उपकरण नहीं। स्कैनर, इम्प्लांट, कैथेटर व नैदानिक किट अधिकतर आयातित थे। सरकार द्वारा एक 'उदय क्षेत्र' के रूप में मान्यता प्राप्त, चिकित्सा उपकरण उस निर्भरता को घटाने हेतु एक नीति प्राथमिकता बन गए — 2020 में बाज़ार का 85% से अधिक आयात था।
चिकित्सा उपकरण
चिकित्सा उपकरण — सिरिंज व स्टेंट से लेकर MRI स्कैनर व वेंटिलेटर तक — भारत की स्वास्थ्य-सेवा का एक तेज़ी से बढ़ता पर भारी आयात-निर्भर हिस्सा हैं। उद्योग का मूल्य $15 अरब से अधिक है (2026), व सरकार इसका अधिक हिस्सा घर पर बनाने हेतु ज़ोर लगा रही है।

यह क्यों मायने रखता है 2020 में भारत के चिकित्सा-उपकरण बाज़ार का 85% से अधिक आयात था, और 2024-25 में उपकरण आयात ₹1,37,088 करोड़ का रहा। इन्हें घरेलू रूप से बनाना — मेक इन इंडिया, एक समर्पित PLI योजना व चिकित्सा-उपकरण पार्कों के तहत — लागत घटाएगा, आपूर्ति सुरक्षित करेगा (कोविड से एक सबक), व एक निर्यात उद्योग बनाएगा।
- भारत के चिकित्सा-उपकरण उद्योग का मूल्य $15 अरब से अधिक है (औषध विभाग, जुलाई 2026), जो 2020 में लगभग $11 अरब था।
- 24 ग्रीनफ़ील्ड PLI संयंत्र अब 57 उत्पाद बनाते हैं, जिनमें CT, MRI व डायलिसिस उपकरण शामिल हैं जिन्हें भारत कभी केवल आयात करता था (लोकसभा उत्तर, मार्च 2026)।
- राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति (2023) व एक ₹3,420 करोड़ PLI योजना घरेलू विनिर्माण का समर्थन करती हैं।
- चार चिकित्सा-उपकरण पार्क स्वीकृत हुए; तीन — ग्रेटर नोएडा, उज्जैन व कांचीपुरम — विकास के उन्नत चरण में हैं।

इतिहास
उल्लेखनीय उपलब्धि
सरकार ने 2023 में एक राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति व एक ₹3,420 करोड़ PLI योजना स्वीकृत की जो घरेलू रूप से बने उच्च-स्तरीय उपकरणों पर 2022-23 से 2026-27 तक प्रोत्साहन देती है। चार चिकित्सा उपकरण पार्क हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु व उत्तर प्रदेश में स्वीकृत हुए; तीन — ग्रेटर नोएडा, उज्जैन व कांचीपुरम — विकास के उन्नत चरण में हैं।
यह कैसे काम करता है
PLI योजना भारत में बने उपकरणों की वृद्धिशील बिक्री पर 5% प्रोत्साहन देती है, उन खंडों को लक्ष्य करते हुए जो भारत सबसे अधिक आयात करता है — इमेजिंग (CT, MRI), कैंसर देखभाल, इम्प्लांट व गहन-देखभाल उपकरण। उपकरण पार्क तैयार अवसंरचना देते हैं — साझा परीक्षण व प्रयोगशाला सुविधाएँ — ताकि निर्माता तेज़ी से व सस्ते में शुरू कर सकें।
आगे की राह
शुरुआती परिणाम दिखते हैं: मार्च 2026 तक (लोकसभा उत्तर) PLI के तहत 24 ग्रीनफ़ील्ड संयंत्रों ने CT स्कैनर, MRI मशीन, लीनियर एक्सेलेरेटर व डायलाइज़र जैसे उपकरणों का उत्पादन शुरू किया है जिन्हें भारत कभी केवल आयात करता था। वैश्विक दिग्गज — GE, Philips, Siemens — असेंबली स्थानीयकृत कर रहे हैं, व सरकार को 2030 तक उद्योग के $30 अरब तक पहुँचने की उम्मीद है।
आँकड़ों में
$15 अरब से अधिक उद्योग (2026), 2030 तक $30 अरब तक पहुँचने की उम्मीद (सरकारी अनुमान, दिसंबर 2024)। राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति 2023; ₹3,420 करोड़ PLI (प्रोत्साहन 2022-23 से 2026-27)। 24 ग्रीनफ़ील्ड संयंत्र 57 उत्पाद बनाते हुए (लोकसभा उत्तर, मार्च 2026); 3 उपकरण पार्क उन्नत चरण में (4 स्वीकृत)। आयात ₹1,37,088 करोड़ (2024-25)। स्रोत: औषध विभाग (लोकसभा उत्तर), PIB।
आँकड़े इस तिथि तक: 29 जुलाई 2026 के वक्तव्य के अनुसार
स्रोत: औषध विभाग, PIB के माध्यम से (29 जुलाई 2026, लिंक) — विभाग के अनुसार भारत के चिकित्सा-उपकरण उद्योग का वर्तमान मूल्य 15 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है (संदर्भ वर्ष या पद्धति नहीं बताई गई)। पहले के सरकारी अनुमान 2020 में 11 अरब डॉलर (राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति, 2023) और 2024 के अंत में लगभग 14 अरब डॉलर थे। ये एकबारगी अनुमान हैं, आधिकारिक वर्षवार शृंखला नहीं, इसलिए कोई चार्ट नहीं दिखाया गया है। · लिंक