भारत सरकार ने 12 अक्टूबर 2004 को शास्त्रीय भाषाओं की श्रेणी बनाई और तमिल को पहली शास्त्रीय भाषा घोषित किया; इसके बाद 2005 में संस्कृत, 2008 में तेलुगु और कन्नड़, 2013 में मलयालम और 1 मार्च 2014 को ओड़िया को यह दर्जा मिला। नवंबर 2004 में साहित्य अकादमी के अंतर्गत गठित भाषाविज्ञान विशेषज्ञ समिति प्रस्तावों की जाँच करती है। महाराष्ट्र ने 2013 में मराठी के लिए यह दर्जा माँगा, और 2017 में अंतर-मंत्रालयी परामर्श के दौरान गृह मंत्रालय ने मानदंड संशोधित कर उन्हें अधिक सख़्त बनाने की सलाह दी। 29 जुलाई 2020 को स्वीकृत राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने स्कूली शिक्षा में भारतीय भाषाओं को बड़ा स्थान दिया, जिसमें कम से कम कक्षा 5 तक मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा शिक्षा का माध्यम है।
भारतीय भाषाएँ · भाषिणी
जनगणना 2011 भारत में 22 अनुसूचित और 99 गैर-अनुसूचित भाषाएँ तथा हज़ारों मातृभाषाएँ दर्ज करती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 कम से कम कक्षा 5 तक मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई पर ज़ोर देती है, और 3 अक्टूबर 2024 को शास्त्रीय भाषाओं की संख्या 6 से बढ़कर 11 हुई। राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन के तहत 2022 में शुरू हुई भाषिणी सरकारी प्लेटफ़ॉर्मों को अनुवाद और वाणी सेवाएँ देती है। 2 जुलाई 2026 के वक्तव्य के अनुसार यह 36 भारतीय भाषाओं में टेक्स्ट और 23 भारतीय भाषाओं में आवाज़ का समर्थन करती थी, 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को चला रही थी और 800 करोड़ से अधिक AI इन्फ़रेंस संभव बना चुकी थी। यह समयरेखा इन्हीं उपलब्धियों को दर्शाती है।

यह क्यों मायने रखता है सरकारी वेबसाइटें, सार्वजनिक सेवाएँ और पाठ्यपुस्तकें तब अधिक लोगों तक पहुँचती हैं जब वे उन भाषाओं में उपलब्ध हों जिन्हें लोग बोलते और पढ़ते हैं। अनुवाद और वाणी उपकरण नागरिक को अपनी भाषा में सरकारी वेबसाइट या सेवा का उपयोग करने देते हैं। शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्राचीन ग्रंथों के संरक्षण, दस्तावेज़ीकरण और डिजिटलीकरण तथा उन पर शैक्षणिक और शोध कार्य में सहायक होता है।
- शास्त्रीय भाषाएँ: 2004 से 2014 के बीच 6 को मान्यता; 3 अक्टूबर 2024 को मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बांग्ला जुड़ने के बाद 11
- एनईपी 2020 (29 जुलाई 2020 को स्वीकृत): कम से कम कक्षा 5 तक, और बेहतर हो तो कक्षा 8 और उससे आगे तक, मातृभाषा, स्थानीय या क्षेत्रीय भाषा शिक्षा का माध्यम
- भाषिणी 36 भारतीय भाषाओं में टेक्स्ट, 23 भारतीय भाषाओं में आवाज़ और 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं का समर्थन करती है, 20 से अधिक विशेष NLP सेवाओं के साथ (2 जुलाई 2026)
- भाषिणी: प्रतिदिन 2 करोड़ से अधिक AI इन्फ़रेंस, कुल 800 करोड़ से अधिक, 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटें (2 जुलाई 2026)
- केंद्रीय बजट 2025-26 (1 फ़रवरी 2025) में स्कूल और उच्च शिक्षा के लिए भारतीय भाषाओं की डिजिटल पुस्तकों हेतु भारतीय भाषा पुस्तक योजना का प्रस्ताव
- भाषिणी पर आधारित कुंभ सहायक (Sah'AI'yak) चैटबॉट ने महाकुंभ 2025 में श्रद्धालुओं को 11 भाषाओं में मार्ग और आयोजन की जानकारी दी (PIB, 9 फ़रवरी 2026)

इतिहास
उल्लेखनीय उपलब्धि
3 अक्टूबर 2024 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बांग्ला को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने को मंज़ूरी दी, जिससे कुल संख्या 6 से 11 हो गई। भाषाविज्ञान विशेषज्ञ समिति ने 25 जुलाई 2024 को मानदंड संशोधित किए थे: 1,500–2,000 वर्षों के प्रारंभिक ग्रंथों या दर्ज इतिहास की प्राचीनता, प्राचीन साहित्य का ऐसा भंडार जिसे बोलने वालों की पीढ़ियाँ विरासत मानती हों, और गद्य, शिलालेखीय और अभिलेखीय साक्ष्य सहित ज्ञान-ग्रंथ। इससे मुख्य रूप से महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और असम जुड़े हैं। संस्कृति मंत्रालय ने कहा कि इस निर्णय से शैक्षणिक और शोध क्षेत्रों में रोज़गार पैदा होगा और प्राचीन ग्रंथों के संरक्षण, दस्तावेज़ीकरण और डिजिटलीकरण में मदद मिलेगी।
यह कैसे काम करता है
भाषिणी का संचालन इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन के अंतर्गत डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग, राष्ट्रीय भाषा प्रौद्योगिकी हब के माध्यम से करता है। यह स्वचालित भाषा पहचान, वक्ता पृथक्करण (स्पीकर डायराइज़ेशन) और कीवर्ड पहचान सहित वाणी और टेक्स्ट की AI सेवाएँ देती है, जिनका उपयोग सरकारी वेबसाइटें और ऐप भारतीय भाषाओं में काम करने के लिए करते हैं। इसकी भाषादान पहल के ज़रिए नागरिक भाषा डेटासेट का योगदान और सत्यापन करते हैं। AICTE का अनुवादिनी प्लेटफ़ॉर्म पाठ्यपुस्तकों सहित शैक्षणिक और तकनीकी सामग्री का भारतीय भाषाओं में अनुवाद करता है, और आदि वाणी की शुरुआत संथाली, भीली, मुंडारी और गोंडी जैसी जनजातीय भाषाओं से हुई।
आगे की राह
2026 में भाषिणी का उपयोग बढ़ा: 12 मार्च तक कुल इन्फ़रेंस 600 करोड़ पार कर गए, और 2 जुलाई तक यह प्रतिदिन 2 करोड़ से अधिक इन्फ़रेंस संसाधित कर रही थी तथा कुल संख्या 800 करोड़ पार कर चुकी थी। राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन 2026 में इसने राजस्थान की क्षेत्रीय भाषाओं के AI मॉडल मज़बूत करने के लिए राजस्थान भाषा मॉडल प्रशिक्षण हैकाथॉन शुरू किया। 2025-26 के बजट में प्रस्तावित भारतीय भाषा पुस्तक योजना का उद्देश्य स्कूल और उच्च शिक्षा के विद्यार्थियों को भारतीय भाषाओं में डिजिटल पुस्तकें देना है। 2024–31 के लिए ₹482.85 करोड़ के परिव्यय के साथ स्वीकृत ज्ञान भारतम मिशन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और सूचीकरण के लिए AI उपकरणों का उपयोग करता है।
आँकड़ों में
6 → 11 शास्त्रीय भाषाएँ (3 अक्टूबर 2024)। भाषिणी पर 36 भारतीय भाषाओं में टेक्स्ट, 23 भारतीय भाषाओं में आवाज़ और 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाएँ (2 जुलाई 2026)। कुल 800 करोड़+ इन्फ़रेंस और प्रतिदिन 2 करोड़+ (2 जुलाई 2026)। 800+ सरकारी वेबसाइटें (2 जुलाई 2026)। 350+ अनुकूलित AI मॉडल (12 मार्च 2026)। 22 अनुसूचित और 99 गैर-अनुसूचित भाषाएँ (जनगणना 2011)। स्रोत: संस्कृति मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग), केंद्रीय बजट 2025-26, PIB के माध्यम से।
आँकड़े इस तिथि तक: भाषिणी के आँकड़े 2 जुलाई 2026 के वक्तव्य के अनुसार
स्रोत: संस्कृति मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग) और केंद्रीय बजट 2025-26, PIB के माध्यम से — भाषा नीति और भाषिणी के उपयोग की दिनांकित उपलब्धियाँ, 2020–2026। भाषिणी के आँकड़े 12 मार्च, 2 जून और 2 जुलाई 2026 के वक्तव्यों के अनुसार हैं। मुख्य आँकड़ा: 3 अक्टूबर 2024 का मंत्रिमंडल निर्णय (लिंक)। · लिंक