सिंगापुर या दुबई की टक्कर का एक भारतीय वित्तीय केंद्र बनाने का विचार 2007 में उठा, व गांधीनगर में निर्माण जल्द शुरू हुआ। पर गिफ्ट सिटी 2015 के बाद ही गति पकड़ी, जब इसे भारत का पहला अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC) नामित किया गया व 2020 में एक समर्पित एकीकृत नियामक मिला।
गिफ्ट सिटी · IFSC
गिफ्ट सिटी — गांधीनगर में गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी — भारत का पहला परिचालनरत अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC) है। यह बैंकों, फंडों व बीमाकर्ताओं को एक ही नियामक के तहत भारतीय धरती पर वैश्विक, विदेशी-मुद्रा कारोबार करने देता है। काउंटर IFSC बैंकिंग परिसंपत्तियों को ~$14 अरब (2020) से ~$106 अरब (2025) तक चढ़ते दिखाता है।

| वर्ष | IFSC banking assets |
|---|---|
| 2020 | 14 $ bn |
| 2021 | 25 $ bn |
| 2022 | 40 $ bn |
| 2023 | 60 $ bn |
| 2024 | 85 $ bn |
| 2025 | 106 $ bn |
यह क्यों मायने रखता है दशकों तक, भारतीय कंपनियाँ सिंगापुर, दुबई या लंदन में डॉलर जुटाती व डेरिवेटिव का व्यापार करती थीं। गिफ्ट सिटी उस कारोबार को घर लाने का लक्ष्य रखता है — कर प्रोत्साहन, एकीकृत नियामक व वैश्विक-स्तरीय नियमों के साथ — उच्च-मूल्य वित्त नौकरियाँ बनाते व भारत के पूँजी बाज़ारों को गहरा करते हुए।
- गिफ्ट-IFSC को एक एकल एकीकृत नियामक, IFSCA द्वारा नियंत्रित किया जाता है, जो 2020 में बना।
- वहाँ 1,000 से अधिक संस्थाएँ काम करती हैं, 37 बैंकों (लगभग 20 विदेशी) सहित।
- IFSC बैंकिंग परिसंपत्तियाँ ~$14 अरब (2020) से बढ़कर ~$106 अरब (2025) हुईं।
- भारत अंतरराष्ट्रीय बुलियन एक्सचेंज (IIBX), भारत का पहला, 2022 में गिफ्ट सिटी में खुला।

इतिहास
उल्लेखनीय उपलब्धि
2020 में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (IFSCA) एक एकल नियामक के रूप में स्थापित हुआ जिसने क्षेत्र के भीतर RBI, SEBI व अन्य की जगह ली — भारत के लिए पहली बार। गिफ्ट सिटी अब 1,000 से अधिक संस्थाओं की मेज़बानी करता है, 37 बैंकों सहित, व 2022 में भारत अंतरराष्ट्रीय बुलियन एक्सचेंज (IIBX) खोला, देश का पहला।
यह कैसे काम करता है
गिफ्ट-IFSC को विनिमय-नियंत्रण हेतु एक विदेशी अधिकार-क्षेत्र माना जाता है: कारोबार विदेशी मुद्रा (मुख्यतः अमेरिकी डॉलर) में होता है, कर-छूट व हल्के नियमों के साथ। इससे भारतीय व वैश्विक कंपनियाँ बैंकिंग, फंड प्रबंधन, बीमा, विमान व जहाज़ पट्टे, व बुलियन व्यापार चला सकती हैं जो पहले विदेश में दर्ज होता था।
आगे की राह
आँकड़े तेज़ी से बढ़े हैं: IFSC बैंकिंग परिसंपत्तियाँ 2020 में ~$14 अरब से बढ़कर 2025 तक ~$106 अरब हुईं, व सैकड़ों फंड अब गिफ्ट से दसियों अरब डॉलर प्रबंधित करते हैं। विमान पट्टा — लंबे समय से आयरलैंड से — भी देश में लाया जा रहा है।
आगे का रास्ता
सिंगापुर की सच्ची टक्कर हेतु, गिफ्ट सिटी को गहरी तरलता, वैश्विक प्रतिभा व दुनिया भर के नियामकों का भरोसा चाहिए — जो बनने में वर्षों लगते हैं। इसे एक जीवंत शहर बनाना, न कि केवल एक कार्यालय-पार्क, व कर तथा नियम लाभ स्थिर रखना तय करेगा कि गति बनी रहती है या नहीं।
आँकड़ों में
$106 अरब IFSC बैंकिंग परिसंपत्तियाँ (2025), $14 अरब (2020) से। 1,000+ पंजीकृत संस्थाएँ। 37 बैंक (~20 विदेशी)। IIBX — भारत का पहला बुलियन एक्सचेंज (2022)। IFSCA — एकीकृत नियामक (2020)। स्रोत: IFSCA, गिफ्ट सिटी, PIB।
स्रोत: IFSCA / GIFT City — IFSC banking assets, 2020→2025.