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रत्न और आभूषण

रत्न और आभूषण

भारत दुनिया की हीरा-तराशी राजधानी है — दुनिया के लगभग 90% हीरे यहीं तराशे व चमकाए जाते हैं, और सूरत इसका मुख्य केंद्र है — और रत्न व आभूषण इसके सबसे बड़े निर्यात अर्जकों में से एक है, लगभग 43 लाख लोगों को रोज़गार देते हुए। भारत प्रयोगशाला-निर्मित हीरों में भी जल्दी उतरा, जहाँ 2022 में वैश्विक उत्पादन में उसका हिस्सा लगभग 15% था। 2025-26 में निर्यात $28.2 अरब रहा। काउंटर रत्न व आभूषण निर्यात दिखाता है।

कोलकाता में निर्यात हेतु बने स्वर्ण आभूषण।
कोलकाता में निर्यात हेतु बने स्वर्ण आभूषण। · www.samantajewellers.com · CC BY-SA 4.0 · Wikimedia Commons
$28.2 अरब
रत्न व आभूषण निर्यात (FY26)
~90%
भारत में तराशे व चमकाए गए दुनिया के हीरे
~43 लाख
रोज़गार
रत्न व आभूषण निर्यात
रत्न व आभूषण निर्यात
वर्षरत्न व आभूषण निर्यात
201441.4 $ अरब
202035.9 $ अरब
202126.0 $ अरब
202239.1 $ अरब
202338.0 $ अरब
202432.7 $ अरब
202529.8 $ अरब
202628.2 $ अरब
बिंदुदार पट्टियाँ वे वर्ष हैं जिनके आँकड़े स्रोत प्रकाशित नहीं करता; प्रकाशित वर्षों के बीच का आकार खींचा गया है, मापा नहीं गया।
2014
0.0$ अरब
रत्न व आभूषण निर्यात
20142026
2014 से
कमी
−13.2 $ अरब
2014
41.4 $ अरब
2026
28.2 $ अरब
बिंदुदार पट्टियाँ वे वर्ष हैं जिनके आँकड़े स्रोत प्रकाशित नहीं करता; प्रकाशित वर्षों के बीच का आकार खींचा गया है, मापा नहीं गया।

यह क्यों मायने रखता है यह क्षेत्र एक विशाल नियोक्ता व विदेशी मुद्रा अर्जक और भारतीय शिल्पकला का प्रतीक है, पर यह वैश्विक विलासिता माँग व विघटनकारी प्रयोगशाला-निर्मित हीरों के प्रति उजागर है।

  • रत्न व आभूषण निर्यात: $28.2 अरब (2025-26), $29.8 अरब (2024-25)
  • दुनिया के ~90% हीरे भारत में तराशे व चमकाए जाते हैं, सूरत मुख्य केंद्र; ~43 लाख नौकरियाँ
  • स्रोत: वाणिज्य विभाग (PIB के माध्यम से); इन्वेस्ट इंडिया

इतिहास

भारत दुनिया की हीरा-प्रसंस्करण राजधानी है: दुनिया के लगभग 90% हीरे भारत में तराशे व चमकाए जाते हैं, और सूरत इसका मुख्य केंद्र है। रत्न व आभूषण लंबे समय से भारत के सबसे बड़े निर्यात अर्जकों में से एक रहा है और लगभग 43 लाख लोगों को रोज़गार देता है। 2024-25 में निर्यात $29.8 अरब और 2025-26 में $28.2 अरब रहा, और उद्योग अब प्रयोगशाला-निर्मित हीरों व ब्रांडेड आभूषणों के साथ मूल्य-श्रृंखला में ऊपर बढ़ रहा है।

प्रमुख बदलाव

बड़ा विघटन प्रयोगशाला-निर्मित हीरे हैं, जहाँ 2022 में वैश्विक उत्पादन में भारत का हिस्सा लगभग 15% था — सस्ते, हरित पत्थर पूरे बाज़ार को नया आकार दे रहे हैं। सरकार ने डायमंड इम्प्रेस्ट योजना के तहत छोटे तराशे-चमकाए हीरों के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी, और नए बाज़ार खोलने के लिए UAE (2022) व UK (2025) के साथ व्यापार समझौते किए।

यह कैसे काम करता है

रत्नों में भारत की धार पैमाने पर कुशल हस्त-श्रम है: कच्चे हीरे व सोना आयात, यहां कटाई-पॉलिश व गढ़ाई, फिर तैयार आभूषण के रूप में पुनर्निर्यात — एक शास्त्रीय मूल्य-वर्धन व्यापार। भारत दुनिया के अधिकांश हीरे काटता व पॉलिश करता है, सूरत जिसका मुख्य केंद्र है, जबकि मुंबई व जयपुर सोना व रंगीन पथ्थर संभालते। उद्योग आयातित कच्चे माल व निर्यात मांग पर जीता है।

आगे की राह

2025-26 में रत्न व आभूषण निर्यात $28.2 अरब रहा, 2023 में दुनिया के रत्न व आभूषण निर्यात में भारत का हिस्सा लगभग 3.5% था, और भारत अब भी दुनिया के लगभग 90% हीरे तराशता व चमकाता है। आगे का रास्ता उच्च-बाज़ार की ओर — जैसे लैब-ग्रोन हीरे बढ़ते (जिसमें भारत नेतृत्व की दौड़ में), और खरीदार केवल कटे पथ्थर नहीं बल्कि ब्रांडेड, डिज़ाइन आभूषण चाहते। लक्ष्य कमोडिटी व्यापार से उच्च-मार्जिन तैयार उत्पादों की ओर बढ़ना है।

आँकड़ों में

$28.2 अरब निर्यात (2025-26), 2013-14 के $41.4 अरब से कम। दुनिया के ~90% हीरे भारत में तराशे व चमकाए। ~43 लाख नौकरियाँ। स्रोत: वाणिज्य विभाग (PIB के माध्यम से); इन्वेस्ट इंडिया।

आँकड़े इस तिथि तक: वित्त वर्ष 2025-26 (अनंतिम)

स्रोत: वाणिज्य विभाग के त्वरित अनुमान (PIB के माध्यम से) — रत्न व आभूषण वस्तु समूह का निर्यात, पुनर्निर्यात सहित, US$ अरब, वित्त वर्ष के अनुसार: 41.4 (2013-14), 35.9 (2019-20), 26.0 (2020-21), 39.1 (2021-22), 38.0 (2022-23), 32.7 (2023-24), 29.8 (2024-25) और 28.2 (2025-26, अनंतिम, लिंक)। 2014-15 से 2018-19 का पूरे वर्ष का आधिकारिक आँकड़ा नहीं मिला। · लिंक