सरकारी ख़रीद लंबे समय तक निविदाओं और मंज़ूरियों की काग़ज़ी प्रक्रिया रही, जिसमें कम ही छोटे आपूर्तिकर्ता आगे बढ़ पाते थे। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने 9 अगस्त 2016 को सरकारी ख़रीद के एकल ऑनलाइन बाज़ार के रूप में गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) शुरू किया, और मई 2017 में इसे राष्ट्रीय सार्वजनिक ख़रीद पोर्टल के रूप में चलाने के लिए एक समर्पित कंपनी, GeM SPV, बनाई गई।
GeM · गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस
गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस सरकारी ख़रीद को ऑनलाइन लाता है। अगस्त 2016 में शुरू हुआ GeM मंत्रालयों, राज्यों और सरकारी संस्थाओं को खुली, पारदर्शी प्रक्रिया से सामान और सेवाएँ ख़रीदने देता है, और बड़ी कंपनी से लेकर गाँव के उद्यम तक हर पंजीकृत विक्रेता को इन ऑर्डरों के लिए प्रतिस्पर्धा करने देता है। वार्षिक ऑर्डर 2016-17 के ₹422 करोड़ से बढ़कर 2024-25 और 2025-26 दोनों में ₹5 लाख करोड़ से अधिक हो गए, और कुल ऑर्डर ₹20 लाख करोड़ पार कर चुके हैं। काउंटर वार्षिक ऑर्डर मूल्य दिखाता है।

| वर्ष | GeM पर वार्षिक ऑर्डर मूल्य |
|---|---|
| 2021 | 0.39 ₹ लाख करोड़ |
| 2022 | 1.07 ₹ लाख करोड़ |
| 2023 | 2.01 ₹ लाख करोड़ |
| 2024 | 4.00 ₹ लाख करोड़ |
| 2025 | 5.40 ₹ लाख करोड़ |
यह क्यों मायने रखता है खुले में, ऑनलाइन ख़रीद से क़ीमतें घटती हैं और पक्षपात की गुंजाइश कम होती है, और छोटे उद्यमों, महिला उद्यमियों और स्टार्टअप को उन सरकारी ऑर्डरों तक उचित मौक़ा मिलता है जो पहले उनकी पहुँच से दूर थे।
- वार्षिक ऑर्डर मूल्य: ₹422 करोड़ (2016-17) → ₹5 लाख करोड़ से अधिक (2024-25 और 2025-26)।
- कुल ऑर्डर मूल्य 3.78 करोड़ से अधिक ऑर्डरों के ज़रिए ₹20 लाख करोड़ पार (अगस्त 2026)।
- पूर्ण प्रोफ़ाइल वाले 25.45 लाख विक्रेता, जिनमें 12.25 लाख सूक्ष्म व लघु उद्यम हैं।
- 2025-26 में सूक्ष्म व लघु उद्यमों ने 68% ऑर्डर पूरे किए, जो कुल मूल्य का 47.1% है।
- 42,242 स्टार्टअप ₹65,633 करोड़ से अधिक के ऑर्डर जीत चुके हैं।
- विश्व बैंक के अध्ययन में माध्य क़ीमत पर औसतन 9.75% बचत पाई गई (फ़रवरी 2019 से जनवरी 2020)।

इतिहास
उल्लेखनीय उपलब्धि
कुल ऑर्डर मूल्य साढ़े चार साल में, मार्च 2021 में ₹1 लाख करोड़ पहुँचा, और फिर 2021-22 में GeM ने एक ही वर्ष में ₹1 लाख करोड़ का कारोबार किया। वार्षिक ऑर्डर 2023-24 में ₹4 लाख करोड़ और 2024-25 में वर्ष ख़त्म होने से 18 दिन पहले ₹5 लाख करोड़ पार कर गए। अगस्त 2026 में, अपने दसवें वर्ष में, कुल ऑर्डर ₹20 लाख करोड़ पार कर गए: पहले ₹10 लाख करोड़ में आठ साल से अधिक लगे, अगले में दो साल से भी कम।
यह कैसे काम करता है
मंत्रालयों, राज्यों और सरकारी संस्थाओं के ख़रीदार, और 2022 से सहकारी समितियाँ भी, अपनी ज़रूरत दर्ज करते हैं, और पंजीकृत विक्रेता पूरी तरह ऑनलाइन ऑर्डरों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। वुमनिया (2019) महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों को मंच पर लाता है, और स्वयत्त (2019) स्टार्टअप व अन्य नए विक्रेताओं के लिए यही करता है। ₹10 लाख तक के ऑर्डरों पर कोई लेनदेन शुल्क नहीं है, इसलिए अब 97% ऑर्डरों पर कोई शुल्क नहीं लगता।
आगे की राह
IIT दिल्ली के अध्ययन में GeM पर 74.3% वस्तुओं की क़ीमतें कम पाई गईं, और ख़र्च-भारित बचत 13.6% रही। सूक्ष्म व लघु उद्यमों के 68% ऑर्डर पूरे करने और महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों व स्टार्टअप की बढ़ती हिस्सेदारी के साथ, GeM भारत के सार्वजनिक क्षेत्र की ख़रीद का सामान्य तरीक़ा बनता जा रहा है।
आँकड़ों में
₹422 करोड़ → ₹5 लाख करोड़+ वार्षिक ऑर्डर (2016-17 → 2024-25 और 2025-26)। 3.78 करोड़+ ऑर्डरों में कुल ₹20 लाख करोड़+ (अगस्त 2026)। 25.45 लाख विक्रेता, जिनमें 12.25 लाख सूक्ष्म व लघु उद्यम। 68% ऑर्डर सूक्ष्म व लघु उद्यमों ने पूरे किए (2025-26)। महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को ₹99,147 करोड़+ और स्टार्टअप को ₹65,633 करोड़+ के ऑर्डर। स्रोत: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, GeM, पीआईबी।
आँकड़े इस तिथि तक: अगस्त 2026
स्रोत: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय / GeM, PIB के माध्यम से — प्रति वित्त वर्ष GeM का सकल व्यापारिक मूल्य (₹ लाख करोड़), FY2020-21 से FY2024-25 तक; FY24 और FY25 आधिकारिक विज्ञप्तियों में पूर्णांकित रूप में। · लिंक