2014 में लगभग आधे भारतीय वयस्क बैंकिंग प्रणाली से बाहर थे। अगस्त 2014 में शुरू हुई प्रधानमंत्री जन धन योजना ने रिकॉर्ड गति से शून्य-शेष खाते खोले — एक सप्ताह में सर्वाधिक खाते खोलने का गिनीज रिकॉर्ड बनाते हुए। शून्य से शुरू होकर, संख्या 2025 तक लगभग 55 करोड़ खाते पहुँची, जिनमें ₹2.7 लाख करोड़ से अधिक जमा है।
वित्तीय समावेशन
2014 में लगभग आधे भारतीय वयस्कों के पास बैंक खाता नहीं था। उस अगस्त शुरू हुई प्रधानमंत्री जन धन योजना ने विशाल पैमाने पर खाते खोले — शून्य से 2025 तक लगभग 55 करोड़, जिनमें ₹2.7 लाख करोड़ से अधिक जमा है। आधार और मोबाइल ('जैम त्रिमूर्ति') के साथ मिलकर, इसने सरकार को सब्सिडी सीधे खातों में भेजने दी। काउंटर खोले गए जन धन खाते दिखाता है।

| वर्ष | Jan Dhan accounts |
|---|---|
| 2014 | 13 crore |
| 2015 | 18 crore |
| 2016 | 26 crore |
| 2017 | 30 crore |
| 2018 | 33 crore |
| 2019 | 37 crore |
| 2020 | 41 crore |
| 2021 | 44 crore |
| 2022 | 48 crore |
| 2023 | 51 crore |
| 2024 | 53 crore |
| 2025 | 55 crore |
यह क्यों मायने रखता है बैंक खाते लोगों को सुरक्षित बचत और सरकारी लाभ सीधे प्राप्त करने देते हैं, बिचौलियों और रिसाव को हटाते हुए — पूरी डिजिटल अर्थव्यवस्था की नींव।
- जन धन खाते: 2025 तक ~55 करोड़ (₹2.7 लाख करोड़ जमा)
- ~56% महिलाओं के; DBT ने रिसाव में लाखों करोड़ बचाए
- स्रोत: वित्त मंत्रालय / PMJDY




इतिहास
प्रमुख प्रभाव
जन धन जैम त्रिमूर्ति का एक पाया है — जन धन खाते, आधार पहचान (~138 करोड़) और मोबाइल फ़ोन — जो मिलकर प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) सक्षम करते हैं। सब्सिडी, पेंशन और मज़दूरी अब सीधे खातों में जाती है, बिचौलियों को हटाते हुए; सरकार का अनुमान है कि रिसाव रोककर लाखों करोड़ बचे। लगभग 56% खाते महिलाओं के हैं और दो-तिहाई ग्रामीण या अर्ध-शहरी क्षेत्रों में हैं।
यह कैसे काम करता है
वित्तीय समावेशन JAM त्रयी पर टिका है — जन धन बैंक खाते, आधार पहचान, व मोबाइल — आपस में बुने। एक निःशुल्क जन धन खाता (RuPay डेबिट कार्ड व छोटे बीमे के साथ) सबसे ग़रीब को भी औपचारिक बैंकिंग प्रवेश देता है; आधार पहचान सत्यापित करता है; और मोबाइल सब जोड़ता है, ताकि सरकारी लाभ सीधे खातों में भेजे जाएं और लोग UPI से लेनदेन करें।
आगे की राह
55 करोड़ से अधिक जन धन खाते खोले गए (अधिकांश महिलाओं के), लाखों करोड़ जमा के साथ — बैंकिंग लगभग हर घर तक पहुंची। अगला कदम पहुंच को सक्रिय उपयोग में बदलना है: लोगों को निष्क्रिय खाते से आगे बचत, सस्ते ऋण, बीमा व पेंशन तक ले जाना, डिजिटल व वित्तीय साक्षरता का अंतर पाटना।
आगे का रास्ता
अगला क़दम पहुँच को सक्रिय उपयोग में बदलना है — अधिक जन धन खाताधारकों को बचत, ऋण व बीमा में मदद करना, साथ ही बेहतर वित्तीय साक्षरता व धोखाधड़ी सुरक्षा।
आँकड़ों में
2025 तक ~55 करोड़ जन धन खाते। ₹2.7 लाख करोड़+ जमा। ~56% महिलाओं के। ~138 करोड़ आधार; DBT ने लाखों करोड़ बचाए। स्रोत: वित्त मंत्रालय, PMJDY, UIDAI।
स्रोत: Ministry of Finance / PMJDY — Jan Dhan bank accounts (crore), 2014–2025.