1991 से पहले, विदेशी निवेश कड़ाई से प्रतिबंधित था। उदारीकरण ने द्वार खोला, और 2014 के बाद ईज़-ऑफ़-डूइंग-बिज़नेस, स्वचालित-मंज़ूरी मार्ग व मेक इन इंडिया जैसी योजनाओं ने प्रवाह बढ़ाया। वार्षिक FDI 2014-15 के लगभग $45 अरब से बढ़कर 2021-22 में रिकॉर्ड $84.8 अरब हुआ।
विदेशी निवेश · FDI
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश वह धन है जो विदेशी कंपनियाँ भारत में व्यवसाय बनाने में लगाती हैं। वार्षिक प्रवाह 2014-15 के लगभग $45 अरब से बढ़कर 2021-22 में रिकॉर्ड ~$85 अरब हुआ, दशक भर में लगभग $748 अरब — पिछले दशक से 143% अधिक — और 2000 से संचयी FDI $1 ट्रिलियन पार। काउंटर वार्षिक FDI प्रवाह दिखाता है।

| वर्ष | FDI inflows |
|---|---|
| 2015 | 45 US$ bn |
| 2016 | 55 US$ bn |
| 2017 | 60 US$ bn |
| 2018 | 62 US$ bn |
| 2019 | 62 US$ bn |
| 2020 | 74 US$ bn |
| 2021 | 82 US$ bn |
| 2022 | 85 US$ bn |
| 2023 | 71 US$ bn |
| 2024 | 71 US$ bn |
| 2025 | 81 US$ bn |
यह क्यों मायने रखता है FDI पूँजी, तकनीक, रोज़गार व वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएँ लाता है — बाक़ी दुनिया से भारत की अर्थव्यवस्था में विश्वास का मत।
- वार्षिक FDI ~$45 अरब (FY15) → रिकॉर्ड ~$85 अरब (FY22)
- 2014-24 में ~$748 अरब, पिछले दशक से +143%
- संचयी FDI $1 ट्रिलियन पार; स्रोत देश 89 → 112
- आगे का रास्ता: वार्षिक प्रवाह को FY22 शिखर से आगे $100 अरब लक्ष्य की ओर ले जाना
- स्रोत: DPIIT




इतिहास
एक ट्रिलियन-डॉलर चुंबक
2014 से 2024 के बीच भारत ने लगभग $748 अरब FDI आकर्षित किया — पिछले दशक से 143% अधिक और 2000 से कुल FDI का लगभग दो-तिहाई। संचयी प्रवाह 2024 तक $1 ट्रिलियन पार, स्रोत देश 89 से 112 हुए, और 90% से अधिक अब स्वचालित मार्ग से आता है। सरकार वार्षिक FDI $100 अरब तक ले जाना चाहती है।
यह कैसे काम करता है
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश दीर्घकालिक धन है — एक कंपनी कारखाना बनाती या किसी भारतीय व्यवसाय में हिस्सेदारी ख़रीदती है, अस्थिर शेयर-बाज़ार प्रवाह के विपरीत। भारत ने धीरे-धीरे अधिक क्षेत्रों को स्वचालित FDI के लिए खोला (सरकारी मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं) और नियम आसान किए, जबकि रक्षा व मीडिया जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सीमाएँ रखीं। अधिकांश प्रवाह सिंगापुर, मॉरीशस व अमेरिका से आता है, सेवाओं, कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर व विनिर्माण में भारी रूप से उतरता।
आगे की राह
संचयी FDI $1 ट्रिलियन पार कर गया, और भारत अब एशिया में सबसे आकर्षक ग्रीनफ़ील्ड-निवेश गंतव्यों में है। आगे का ज़ोर है वार्षिक प्रवाह को FY22 शिखर (~$84 अरब) से ऊपर $100 अरब लक्ष्य की ओर ले जाना, निवेश को कुछ राज्यों व सेवाओं से आगे विनिर्माण में व्यापक करना — 'चीन+1' बदलाव पर सवार होकर — और नियम आसान रखना ताकि मंज़ूरियाँ अड़चन न बनें।
आगे का रास्ता
अगला क़दम वार्षिक प्रवाह को FY22 शिखर से आगे $100 अरब लक्ष्य की ओर ले जाना है, और निवेश को कुछ क्षेत्रों व राज्यों से आगे व्यापक करना।
आँकड़ों में
वार्षिक FDI ~$45 अरब (FY15) → ~$85 अरब (FY22 शिखर) → ~$81 अरब (FY25); 2014-24 में ~$748 अरब; संचयी >$1 ट्रिलियन। स्रोत: DPIIT।
स्रोत: DPIIT — annual FDI inflows (US$ billion); peaked at ~$85 bn in FY22.