भारत लंबे समय एक सतर्क व्यापारी था, मुक्त-व्यापार समझौतों से सावधान। 2014 के बाद यह बदला: वस्तुओं व सेवाओं का कुल निर्यात दशक भर में लगभग 85% बढ़ा, 2013-14 के लगभग $466 अरब से 2025-26 के रिकॉर्ड $860 अरब तक, 2020 की कोविड गिरावट के बावजूद।
निर्यात और व्यापार
भारत का कुल निर्यात — वस्तुएँ व सेवाएँ — दशक भर में लगभग 85% बढ़ा, 2013-14 के लगभग $466 अरब से 2025-26 के रिकॉर्ड $860 अरब तक, जो पिछले वर्ष $825 अरब था। अकेले सेवा निर्यात दोगुने से अधिक होकर $387 अरब हुआ। भारत ने वर्षों की सावधानी के बाद UAE, ऑस्ट्रेलिया, EFTA व ब्रिटेन से व्यापार समझौते भी किए। काउंटर कुल निर्यात दिखाता है।

| वर्ष | कुल निर्यात (US$ अरब) |
|---|---|
| 2014 | 466 US$ अरब |
| 2015 | 416 US$ अरब |
| 2016 | 440 US$ अरब |
| 2017 | 498 US$ अरब |
| 2018 | 538 US$ अरब |
| 2019 | 526 US$ अरब |
| 2020 | 500 US$ अरब |
| 2021 | 676 US$ अरब |
| 2022 | 776 US$ अरब |
| 2023 | 778 US$ अरब |
| 2024 | 800 US$ अरब |
| 2025 | 825 US$ अरब |
| 2026 | 860 US$ अरब |
यह क्यों मायने रखता है निर्यात विदेशी मुद्रा कमाता है, रोज़गार बनाता है व भारत को वैश्विक बाज़ारों से जोड़ता है — और व्यापार समझौते भारतीय वस्तुओं-सेवाओं के लिए द्वार खोलते हैं।
- कुल निर्यात ~$466 अरब → $860 अरब (2025-26); +85%
- सेवा निर्यात $158 अरब → $387 अरब
- नए FTA: UAE (2022), ऑस्ट्रेलिया (2022), EFTA (2024), ब्रिटेन (2025)
- स्रोत: वाणिज्य मंत्रालय, PIB के माध्यम से (वि.व. 2025-26 व्यापार आँकड़े)

इतिहास
सेवा शक्ति व नए समझौते
सेवा निर्यात — IT, परामर्श, वैश्विक क्षमता केंद्र — $158 अरब से दोगुने से अधिक $387 अरब हुआ, और भारत दुनिया के आधे से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर रखता है। वर्षों की झिझक के बाद भारत ने UAE (2022), ऑस्ट्रेलिया (2022), EFTA (2024) व ब्रिटेन (2025) से व्यापार समझौते किए, 2026 में EU समझौते के साथ।
यह कैसे काम करता है
भारत के व्यापार के दो बहुत अलग हिस्से हैं। इसका सेवा निर्यात — IT, सॉफ़्टवेयर व व्यावसायिक सेवाएँ, एक विशाल अंग्रेज़ी-भाषी कार्यबल के बल पर — बड़ा अधिशेष चलाता है और एक दशक में दोगुना हुआ। इसका वस्तु (माल) व्यापार घाटा चलाता है, क्योंकि भारत महँगा कच्चा तेल, सोना व इलेक्ट्रॉनिक्स आयात करता है। व्यापार नीति शुल्क, निर्यात-प्रोत्साहन योजनाएँ, और मुक्त-व्यापार समझौतों के तेज़ी से बढ़ते जाल का उपयोग बाज़ार पहुँच बढ़ाने हेतु करती है।
आगे की राह
कुल निर्यात 2025-26 में लगभग $860 अरब पहुँचा (एक दशक में 85% ऊपर), सेवा निर्यात $387 अरब पर। अगला लक्ष्य वस्तु निर्यात को सेवाओं की सफलता के बराबर लाना है — भारत में अधिक निर्माण (विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक्स) और UAE, ऑस्ट्रेलिया, EFTA, UK, ओमान, न्यूज़ीलैंड व EU के साथ नए समझौतों से वास्तविक बाज़ार पहुँच खोलते हुए।
आँकड़ों में
कुल निर्यात ~$466 अरब → $860 अरब (2025-26), +85%; सेवाएँ $158 → $387 अरब; UAE, ऑस्ट्रेलिया, EFTA, ब्रिटेन से FTA। स्रोत: वाणिज्य मंत्रालय / RBI।
आँकड़े इस तिथि तक: वित्त वर्ष 2025-26 (अप्रैल–मार्च)
स्रोत: वाणिज्य मंत्रालय, PIB के माध्यम से — कुल निर्यात, वस्तुएँ + सेवाएँ (US$ अरब), FY2013-14 से FY2025-26। FY2025-26: US$ 860.09 अरब, जबकि FY2024-25 में US$ 825.26 अरब। · लिंक