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निर्यात और व्यापार

निर्यात और व्यापार

भारत का कुल निर्यात — वस्तुएँ व सेवाएँ — दशक भर में लगभग 76% बढ़ा, 2013-14 के लगभग $466 अरब से 2024-25 के रिकॉर्ड $825 अरब तक। अकेले सेवा निर्यात दोगुने से अधिक होकर $387 अरब हुआ। भारत ने वर्षों की सावधानी के बाद UAE, ऑस्ट्रेलिया, EFTA व ब्रिटेन से व्यापार समझौते भी किए। काउंटर कुल निर्यात दिखाता है।

IMO: 9784295 Name: MAERSK HANOI General vessel type: Cargo - Hazard A (Major) Detailed vessel type: Container Ship Navigational Status: Acti
IMO: 9784295 Name: MAERSK HANOI General vessel type: Cargo - Hazard A (Major) Detailed vessel type: Container Ship Navigational Status: Acti · Petar Milošević · CC BY-SA 4.0 · Wikimedia Commons
$825 bn
कुल निर्यात (FY25)
$387 bn
सेवा निर्यात
~$437 bn
वस्तु निर्यात
Total exports (US$ bn)
Total exports
वर्षTotal exports
2014466 US$ bn
2015416 US$ bn
2016440 US$ bn
2017498 US$ bn
2018538 US$ bn
2019526 US$ bn
2020500 US$ bn
2021676 US$ bn
2022776 US$ bn
2023778 US$ bn
2024800 US$ bn
2025825 US$ bn
2014
0US$ bn
Total exports
20142025
Since 2014
Added
+359 US$ bn
2014
466 US$ bn
2025
825 US$ bn

यह क्यों मायने रखता है निर्यात विदेशी मुद्रा कमाता है, रोज़गार बनाता है व भारत को वैश्विक बाज़ारों से जोड़ता है — और व्यापार समझौते भारतीय वस्तुओं-सेवाओं के लिए द्वार खोलते हैं।

  • कुल निर्यात ~$466 अरब → ~$825 अरब; +76%
  • सेवा निर्यात $158 अरब → $387 अरब
  • नए FTA: UAE (2022), ऑस्ट्रेलिया (2022), EFTA (2024), ब्रिटेन (2025)
  • आगे का रास्ता: घर में अधिक बनाकर वस्तु व्यापार घाटा घटाना (कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स)
  • स्रोत: वाणिज्य मंत्रालय / RBI

इतिहास

भारत लंबे समय एक सतर्क व्यापारी था, मुक्त-व्यापार समझौतों से सावधान। 2014 के बाद यह बदला: वस्तुओं व सेवाओं का कुल निर्यात दशक भर में लगभग 76% बढ़ा, 2013-14 के लगभग $466 अरब से 2024-25 के रिकॉर्ड $825 अरब तक, 2020 की कोविड गिरावट के बावजूद।

सेवा शक्ति व नए समझौते

सेवा निर्यात — IT, परामर्श, वैश्विक क्षमता केंद्र — $158 अरब से दोगुने से अधिक $387 अरब हुआ, और भारत दुनिया के आधे से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर रखता है। वर्षों की झिझक के बाद भारत ने UAE (2022), ऑस्ट्रेलिया (2022), EFTA (2024) व ब्रिटेन (2025) से व्यापार समझौते किए, 2026 में EU समझौते के साथ।

यह कैसे काम करता है

भारत के व्यापार के दो बहुत अलग हिस्से हैं। इसका सेवा निर्यात — IT, सॉफ़्टवेयर व व्यावसायिक सेवाएँ, एक विशाल अंग्रेज़ी-भाषी कार्यबल के बल पर — बड़ा अधिशेष चलाता है और एक दशक में दोगुना हुआ। इसका वस्तु (माल) व्यापार घाटा चलाता है, क्योंकि भारत महँगा कच्चा तेल, सोना व इलेक्ट्रॉनिक्स आयात करता है। व्यापार नीति शुल्क, निर्यात-प्रोत्साहन योजनाएँ, और मुक्त-व्यापार समझौतों के तेज़ी से बढ़ते जाल का उपयोग बाज़ार पहुँच बढ़ाने हेतु करती है।

आगे की राह

कुल निर्यात 2024-25 में लगभग $825 अरब पहुँचा (एक दशक में 76% ऊपर), सेवा निर्यात $387 अरब पर। अगला क़दम घर में अधिक बनाकर (कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोना-विकल्प) माल-व्यापार घाटा घटाना और वस्तु निर्यात को सेवाओं के बराबर लाना है, जैसे नए समझौते — UAE व ऑस्ट्रेलिया, और UK व EU से वार्ता — वास्तविक बाज़ार पहुँच में परिपक्व होते हैं।

आगे का रास्ता

अगला क़दम घर में अधिक बनाकर (कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोना) वस्तु व्यापार घाटा घटाना है और वस्तु निर्यात को सेवाओं के बराबर लाना, जैसे नए व्यापार समझौते परिपक्व होते हैं।

आँकड़ों में

कुल निर्यात ~$466 अरब → ~$825 अरब, +76%; सेवाएँ $158 → $387 अरब; UAE, ऑस्ट्रेलिया, EFTA, ब्रिटेन से FTA। स्रोत: वाणिज्य मंत्रालय / RBI।

स्रोत: Ministry of Commerce / RBI — total exports, goods + services (US$ billion), 2014–2025.