2021 तक, भारत में ड्रोन उड़ाने के लिए फ़ॉर्मों और शुल्कों से भरी अनुमति-भारी व्यवस्था से गुज़रना पड़ता था। 25 अगस्त 2021 को अधिसूचित ड्रोन नियमों ने इसे एक हल्के, विश्वास-आधारित ढाँचे से बदला — फ़ॉर्म 25 से 5 और शुल्क के प्रकार 72 से 4 — और घरेलू ड्रोन उद्योग बनाने के लिए एक PLI योजना आई।
ड्रोन · ड्रोन शक्ति
2021 में भारत ने अनुमति-भारी ड्रोन नियमपुस्तिका को हटाकर एक हल्की, विश्वास-आधारित से बदला, 2030 तक वैश्विक ड्रोन हब बनने का लक्ष्य रखते हुए। तब से, किसान छिड़काव व मानचित्रण के लिए किसान ड्रोन उपयोग करते हैं, नमो ड्रोन दीदी योजना का लक्ष्य 15,000 महिला समूहों के हाथों में कृषि-ड्रोन देना है (जनवरी 2026 तक योजना के तहत 500 दिए गए), और स्टार्टअप नागरिक व सैन्य दोनों ड्रोन बनाते हैं। यह समयरेखा भारत के ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र के उदय को दर्शाती है।

यह क्यों मायने रखता है ड्रोन एक मितव्ययी भारतीय नवाचार अवसर हैं — खेती की लागत घटाते, दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँचते, और एक नई उच्च-तकनीक विनिर्माण व रक्षा क्षमता जोड़ते हुए।
- ड्रोन नियम 2021 उदार; PLI ₹120 करोड़; 38,575 ड्रोन पंजीकृत (फ़रवरी 2026)
- नमो ड्रोन दीदी: 15,000 महिला SHG का लक्ष्य, 500 ड्रोन दिए गए; 2030 हब विज़न
- स्रोत: नागर विमानन मंत्रालय; कृषि मंत्रालय; PIB
इतिहास
खेतों व रक्षा के लिए ड्रोन
किसान ड्रोन अब खेतों का छिड़काव व मानचित्रण करते हैं; नमो ड्रोन दीदी योजना का लक्ष्य 15,000 महिला समूहों को व्यवसाय के रूप में कृषि-ड्रोन देना है (जनवरी 2026 तक योजना के तहत 500 दिए गए); और गरुड़ एयरोस्पेस व आइडियाफ़ोर्ज जैसी कंपनियाँ ड्रोन PLI लाभार्थियों में हैं। भारत 2030 तक वैश्विक ड्रोन हब बनने का लक्ष्य पीछा कर रहा है।
यह कैसे काम करता है
भारत ने 2021 में भारी लाइसेंसिंग हटाकर उदारीकृत ड्रोन नियमों से ड्रोन खोले, फिर स्थानीय निर्माण हेतु तैयार विदेशी ड्रोन का आयात प्रतिबंधित किया, और एक छोटा उत्पादन प्रोत्साहन जोड़ा। उपयोग तीन तरह से बँटे: कृषि (छिड़काव व फ़सल-मानचित्रण, जिसमें नमो ड्रोन दीदी योजना शामिल जो ड्रोन महिला स्वयं-सहायता समूहों के हाथ में देती है), लॉजिस्टिक्स व सर्वेक्षण, और रक्षा, जहाँ सस्ते ड्रोन आधुनिक युद्ध के केंद्र में आ गए हैं।
आगे की राह
अगले क़दम हज़ारों ड्रोन हेतु एक राष्ट्रीय हवाई-क्षेत्र प्रबंधन प्रणाली और मोटर, सेंसर व चिप में गहरी घरेलू आपूर्ति शृंखला हैं, जिसे ड्रोन PLI और आयातित ड्रोन पर रोक का सहारा है। हाल के अभियानों में सिद्ध सैन्य माँग और नमो ड्रोन दीदी के तहत कृषि ड्रोन का प्रसार दोहरे विकास-इंजन हैं, जो भारत को ड्रोन असेंबली से ड्रोन तकनीक की ओर ले जा रहे हैं।
आँकड़ों में
ड्रोन नियम 2021; PLI ₹120 करोड़; 38,575 पंजीकृत ड्रोन और 39,890 रिमोट पायलट प्रमाणपत्र (फ़रवरी 2026); नमो ड्रोन दीदी में 15,000 SHG का लक्ष्य, 500 ड्रोन दिए गए (जनवरी 2026); 2030 वैश्विक-हब विज़न। स्रोत: नागर विमानन मंत्रालय, कृषि मंत्रालय, PIB।
आँकड़े इस तिथि तक: मील के पत्थर 2021–2026; आँकड़े फ़रवरी 2026 तक
स्रोत: PIB पृष्ठभूमि-पत्र, भारत का ड्रोन इकोसिस्टम (17 फ़रवरी 2026, लिंक), नागर विमानन और कृषि मंत्रालयों के साथ — ड्रोन नियम 25 अगस्त 2021 को अधिसूचित; ₹120 करोड़ के स्वीकृत परिव्यय वाली ड्रोन PLI योजना; 38,575 ड्रोन पंजीकृत (9 फ़रवरी 2026) और 39,890 रिमोट पायलट प्रमाणपत्र जारी; उर्वरक कंपनियों ने महिला स्वयं सहायता समूहों को 1,094 ड्रोन दिए, जिनमें 500 नमो ड्रोन दीदी के तहत, जिसका लक्ष्य 15,000 समूह है। 2030 तक वैश्विक ड्रोन हब बनना सरकार का घोषित विज़न है, मापा गया लक्ष्य नहीं। मील के पत्थर 2021–2026। · लिंक