प्रत्यक्ष कर प्रशासन का पिछला दशक सबसे सीधे CBDT के अपने टाइम सीरीज़ डेटा में दर्ज है। संशोधित रिटर्न सहित दाख़िल आयकर रिटर्न वित्त वर्ष 2013-14 के 3,79,74,966 से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 9,18,46,067 हो गए। CBDT यह गिनती रिटर्न दाख़िल होने के वित्त वर्ष के अनुसार रखता है, और उसकी टिप्पणी शृंखला के इकलौते व्यवधान को समझाती है: वित्त वर्ष 2017-18 तक एक ही वित्त वर्ष में दो निर्धारण वर्षों के रिटर्न — चालू वर्ष के साथ पिछले वर्ष के विलंबित रिटर्न — दाख़िल हो सकते थे, इसलिए वित्त वर्ष 2018-19 का आँकड़ा बढ़ने के बजाय थोड़ा घटा दिखता है। इन्हीं वर्षों में शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह ₹6,38,596 करोड़ (वित्त वर्ष 2013-14) से बढ़कर ₹22,26,375 करोड़ (वित्त वर्ष 2024-25, अनंतिम) हुआ, और उसकी वसूली की लागत कुल संग्रह के 0.57% से घटकर 0.41% रह गई।
आयकर और प्रत्यक्ष कर आधार
प्रत्यक्ष कर वे कर हैं जो कोई व्यक्ति या कंपनी अपनी आय पर स्वयं चुकाती है — निगम कर, व्यक्तिगत आयकर और कुछ छोटे कर — जबकि GST और सीमा शुल्क लेन-देन पर वसूले जाते हैं। पिछले दशक की कहानी दरों से कहीं अधिक दाख़िले और प्रसंस्करण की है: रिटर्न अब वार्षिक सूचना विवरण से पहले से भरे आते हैं, निर्धारण बिना करदाता और अधिकारी के आमने-सामने आए होते हैं, और 1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम, 2025 सन् 1961 के अधिनियम की जगह लागू हुआ। CBDT के टाइम सीरीज़ डेटा के अनुसार वित्त वर्ष 2013-14 में 3,79,74,966 और वित्त वर्ष 2024-25 में 9,18,46,067 आयकर रिटर्न दाख़िल हुए। काउंटर यही शृंखला दिखाता है, रिटर्न दाख़िल होने के वित्त वर्ष के अनुसार।
| वर्ष | दाख़िल आयकर रिटर्न, दाख़िल करने के वित्त वर्ष के अनुसार (करोड़) |
|---|---|
| 2014 | 3.80 करोड़ |
| 2015 | 4.04 करोड़ |
| 2016 | 4.63 करोड़ |
| 2017 | 5.58 करोड़ |
| 2018 | 6.87 करोड़ |
| 2019 | 6.74 करोड़ |
| 2020 | 6.79 करोड़ |
| 2021 | 7.39 करोड़ |
| 2022 | 7.30 करोड़ |
| 2023 | 7.78 करोड़ |
| 2024 | 8.61 करोड़ |
| 2025 | 9.18 करोड़ |
यह क्यों मायने रखता है प्रत्यक्ष कर बजट का वित्तपोषण करते हैं और अप्रत्यक्ष करों से अलग, ख़र्च पर नहीं, आय पर लगते हैं। दाख़िले का दायरा बढ़ने और प्रसंस्करण तेज़ होने से दो चीज़ें एक साथ बदलती हैं: सरकार कितना ख़र्च कर सकती है, और करदाता को रिफ़ंड के लिए कितना इंतज़ार करना पड़ता है। CBDT के अनुसार सत्यापन के बाद रिटर्न के प्रसंस्करण का औसत समय निर्धारण वर्ष 2019-20 के 82 दिन से घटकर निर्धारण वर्ष 2023-24 के लिए 10 दिन रह गया।
- दाख़िल आयकर रिटर्न (संशोधित रिटर्न सहित): वित्त वर्ष 2013-14 में 3,79,74,966 → वित्त वर्ष 2024-25 में 9,18,46,067 (CBDT टाइम सीरीज़ डेटा, दाख़िल करने के वित्त वर्ष के अनुसार)
- करदाता — वे जिन्होंने उस निर्धारण वर्ष का रिटर्न दाख़िल किया, या जिनका उस वर्ष स्रोत पर कर कटा पर रिटर्न नहीं भरा: निर्धारण वर्ष 2013-14 में 5,26,44,496 → निर्धारण वर्ष 2024-25 में 12,13,27,509
- शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह: वित्त वर्ष 2013-14 में ₹6,38,596 करोड़ → वित्त वर्ष 2024-25 में ₹22,26,375 करोड़ (अनंतिम), और वित्त वर्ष 2025-26 में ₹23,40,406 करोड़ (अनंतिम, 31 मार्च 2026 तक)
- कुल कर राजस्व में प्रत्यक्ष करों का हिस्सा: वित्त वर्ष 2013-14 में 56.32%, वित्त वर्ष 2020-21 में 46.84%, वित्त वर्ष 2024-25 में 58.81% (अनंतिम)
- सत्यापन के बाद रिटर्न के प्रसंस्करण का औसत समय: निर्धारण वर्ष 2023-24 के लिए 10 दिन, जबकि निर्धारण वर्ष 2019-20 के लिए 82 दिन और 2022-23 के लिए 16 दिन (CBDT, 5 सितंबर 2023)
- प्रत्यक्ष कर वसूली की लागत: वित्त वर्ष 2013-14 में कुल संग्रह का 0.57% → वित्त वर्ष 2024-25 में 0.41% (अनंतिम)
इतिहास
उल्लेखनीय पड़ाव
फेसलेस निर्धारण ने करदाता और निर्धारण अधिकारी की आमने-सामने की मुलाक़ात ख़त्म कर दी। ई-असेसमेंट स्कीम 2019 7 अक्टूबर 2019 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय ई-असेसमेंट केंद्र की स्थापना के साथ शुरू हुई, और पायलट आधार पर निर्धारण वर्ष 2018-19 के 58,322 नियमित निर्धारण मामले चुने गए। 13 अगस्त 2020 को यह योजना फेसलेस असेसमेंट स्कीम 2019 बनी और उसका दायरा बढ़ा — निर्धारण वर्ष 2018-19 के धारा 143(3) के सभी नियमित निर्धारण और लंबित आय-छूटी निर्धारण इसमें आ गए, सिवाय केंद्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कर प्रभारों को सौंपे मामलों के। राज्यसभा में वित्त राज्य मंत्री के उत्तर के अनुसार 10 मार्च 2021 तक 82,072 निर्धारण मामले फेसलेस तरीक़े से पूरे हो चुके थे। 1 अप्रैल 2021 से यह प्रक्रिया योजना न रहकर आयकर अधिनियम की धारा 144B ही बन गई।
यह कैसे काम करता है
रिटर्न किसी निर्धारण वर्ष के लिए उससे पिछले वित्त वर्ष की आय पर दाख़िल होता है: निर्धारण वर्ष 2024-25 का रिटर्न वित्त वर्ष 2023-24 में अर्जित आय बताता है। इसीलिए दोनों नाम आपस में बदले नहीं जा सकते — CBDT दाख़िल रिटर्न की गिनती वित्त वर्ष के अनुसार रखता है, जबकि करदाताओं की गिनती निर्धारण वर्ष के अनुसार। CBDT की परिभाषा में करदाता वह है जिसने संबंधित निर्धारण वर्ष का आय रिटर्न दाख़िल किया हो, या जिसका संबंधित वित्त वर्ष में स्रोत पर कर कटा हो पर रिटर्न न भरा हो; इस आधार पर यह संख्या निर्धारण वर्ष 2013-14 के 5,26,44,496 से बढ़कर निर्धारण वर्ष 2024-25 में 12,13,27,509 हुई। रिटर्न अब वार्षिक सूचना विवरण (AIS) से पहले से भरा आता है, जो नवंबर 2021 में अनुपालन पोर्टल पर लागू हुआ और TDS, TCS, शेयर तथा म्यूचुअल फंड लेन-देन जैसे दर्ज आँकड़ों पर आधारित है। ई-सत्यापन के बाद रिटर्न प्रसंस्करण में जाता है; CBDT ने 5 सितंबर 2023 को बताया कि सत्यापन के बाद औसत प्रसंस्करण समय निर्धारण वर्ष 2019-20 के 82 दिन से घटकर निर्धारण वर्ष 2023-24 के लिए 10 दिन रह गया। वित्त अधिनियम 2022 से जुड़ी धारा 139(8A) करदाता को अतिरिक्त कर चुकाकर पहले दाख़िल रिटर्न सुधारने के लिए अद्यतन रिटर्न भरने देती है; यह अवधि निर्धारण वर्ष की समाप्ति से 24 महीने थी, जिसे वित्त अधिनियम 2025 ने 48 महीने कर दिया।
आगे की राह
क़ानून ख़ुद नए सिरे से लिखा गया है। 13 फ़रवरी 2025 को संसद में रखा गया आयकर विधेयक, 2025 कर नीति या दरें बदले बिना 1961 के अधिनियम को सरल बनाने के लिए था: सरकार की अपनी तुलना में पुराने अधिनियम में 5,12,535 शब्द, 47 अध्याय और 819 धाराएँ थीं, जबकि विधेयक में 2,59,676 शब्द, 23 अध्याय और 536 धाराएँ; तालिकाएँ 18 से बढ़कर 57 और सूत्र 6 से बढ़कर 46 हुए। विधेयक 12 अगस्त 2025 को पारित हुआ और 21 अगस्त 2025 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने पर आयकर अधिनियम, 2025 बना। आयकर नियम, 2026 20 मार्च 2026 को अधिसूचित हुए और अधिनियम 1 अप्रैल 2026 से लागू हुआ। नया अधिनियम दाख़िले की संख्या और प्रसंस्करण के समय पर क्या असर डालेगा, यह वित्त वर्ष 2026-27 के आँकड़ों में ही दिखेगा; CBDT की प्रकाशित शृंखला रिटर्न के लिए वित्त वर्ष 2024-25 तक और संग्रह के लिए वित्त वर्ष 2025-26 तक जाती है।
आँकड़े इस तिथि तक: वित्त वर्ष 2024-25 (CBDT टाइम सीरीज़ डेटा, वित्त वर्ष 2000-01 से 2024-25)
स्रोत: CBDT, आयकर विभाग — टाइम सीरीज़ डेटा, वित्त वर्ष 2000-01 से 2024-25, तालिका 1.7 'Number of Income - Tax Returns Filed (Including Revised Return)', सभी PAN श्रेणियों का योग। CBDT यह गिनती रिटर्न दाख़िल होने के वित्त वर्ष के आधार पर रखता है, निर्धारण वर्ष के आधार पर नहीं; इसलिए चार्ट उसी आधार पर है और हर बिंदु उस वर्ष पर रखा गया है जिसमें वित्त वर्ष समाप्त होता है: 2014 = वित्त वर्ष 2013-14, 2025 = वित्त वर्ष 2024-25। CBDT की अपनी टिप्पणी बताती है कि वित्त वर्ष 2017-18 और उससे पहले एक ही वित्त वर्ष में दो निर्धारण वर्षों के रिटर्न दाख़िल हो सकते थे, इसीलिए वित्त वर्ष 2018-19 में संख्या थोड़ी घटी दिखती है। यह पृष्ठ बनाते समय इस शृंखला में वित्त वर्ष 2025-26 का आँकड़ा प्रकाशित नहीं था, इसलिए 2026 का बिंदु नहीं दिखाया गया है। पृष्ठ पर संग्रह के आँकड़े वित्त वर्ष के हैं; करदाताओं की संख्या निर्धारण वर्ष की है, और उसी रूप में अंकित है। · लिंक