जैसे-जैसे निजी क्रिप्टोकरेंसी फैलीं, दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने अपनी डिजिटल मुद्रा बनानी शुरू की। RBI ने एक डिजिटल रुपया प्रस्तावित किया व 2022 के अंत में पायलट शुरू किए — बैंकों हेतु एक थोक संस्करण (नवंबर) व जनता हेतु एक खुदरा संस्करण (दिसंबर)।
डिजिटल रुपया · CBDC
डिजिटल रुपया (e-रुपया) भारतीय रिज़र्व बैंक की केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा है — डिजिटल रूप में संप्रभु धन, RBI पर सीधा दावा। खुदरा व थोक पायलट 2022 के अंत में शुरू हुए। काउंटर खुदरा e-रुपया उपयोगकर्ताओं को लगभग 60 लाख की ओर बढ़ते दिखाता है (सांकेतिक)।

| वर्ष | Retail e-rupee users |
|---|---|
| 2022 | 1 lakh |
| 2023 | 10 lakh |
| 2024 | 40 lakh |
| 2025 | 60 lakh |
| 2026 | 65 lakh |
यह क्यों मायने रखता है UPI के विपरीत, जो आपकी बैंक जमा हिलाता है, e-रुपया स्वयं धन है — एक डिजिटल नोट की तरह जो ऑफलाइन काम कर सकता है व किसी विशेष उपयोग हेतु 'प्रोग्राम' किया जा सकता है। यह नकदी-संभाल लागत घटा सकता है, निपटान तेज़ कर सकता है, व लक्षित कल्याण सक्षम कर सकता है जो केवल इच्छित रूप में खर्च हो।
- RBI ने डिजिटल रुपया पायलट (थोक व खुदरा) 2022 के अंत में शुरू किए।
- खुदरा e-रुपया 2025 तक कई बैंकों व शहरों में लगभग 60 लाख उपयोगकर्ताओं तक पहुँचा।
- प्रोग्राम-योग्य, कल्याण-लिंक्ड e-रुपया पायलट (जैसे सब्सिडी हेतु) 2025-26 में चले।
- उपयोग UPI के मुक़ाबले अभी मामूली है, जो साल में अरबों लेनदेन संभालता है।
इतिहास
उल्लेखनीय उपलब्धि
खुदरा e-रुपया 2025 तक कई बैंकों व शहरों में लगभग 60 लाख उपयोगकर्ताओं तक बढ़ा। 2025-26 में RBI ने प्रोग्राम-योग्य, कल्याण-लिंक्ड पायलट शुरू किए — e-रुपया जिसे किसी उद्देश्य तक सीमित किया जा सकता है, जैसे कोई विशेष सब्सिडी या लाभ।
यह कैसे काम करता है
e-रुपया RBI द्वारा जारी एक डिजिटल टोकन है, नोटों व सिक्कों जैसी ही मूल्यवर्ग में, एक बैंक-प्रदत्त वॉलेट में रखा। UPI ट्रांसफर के विपरीत — जो आपकी बैंक जमा को हिलाता है — e-रुपये में भुगतान केंद्रीय-बैंक मुद्रा सीधे स्थानांतरित करता है, व ऑफलाइन, फ़ोन-से-फ़ोन भी काम कर सकता है।
आगे की राह
एक खुदरा CBDC नकदी छापने व संभालने की लागत घटा सकता है, निपटान तेज़ कर सकता है, व ऑफलाइन भुगतान से कमज़ोर इंटरनेट वाले क्षेत्रों तक पहुँच सकता है। प्रोग्राम-योग्यता कल्याण को 'रिसाव-रोधी' बना सकती है — धन जो केवल उसी पर खर्च हो सकता है जिसके लिए था।
आगे का रास्ता
चुनौती इसे उपयोग करने का एक वास्तविक कारण है: UPI पहले से डिजिटल भुगतान तत्काल व मुफ़्त बनाता है, इसलिए e-रुपये की बढ़त ऑफलाइन उपयोग व प्रोग्राम-योग्य धन में है, रोज़मर्रा की सुविधा में नहीं। अपनाना अभी छोटा है, व निजता — केंद्रीय बैंक कितना देख सकता है — एक वास्तविक बहस है जिससे भारत गुज़र रहा है।
आँकड़ों में
दिसंबर 2022 — खुदरा e-रुपया पायलट शुरू (थोक नवंबर 2022 से)। 2025 तक ~60 लाख खुदरा उपयोगकर्ता। 2025-26 में प्रोग्राम-योग्य कल्याण पायलट। ऑफलाइन, फ़ोन-से-फ़ोन काम करता है। स्रोत: भारतीय रिज़र्व बैंक, PIB।
स्रोत: Reserve Bank of India — retail e-rupee pilot, 2022→2026. User curve illustrative.