1 जुलाई 2015 को शुरू हुए डिजिटल इंडिया का लक्ष्य था भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज में बदलना — गाँवों को ब्रॉडबैंड से जोड़ना, सेवाओं को ऑनलाइन लाना और आधार के ऊपर डिजिटल-पहचान स्टैक बनाना। इसका नागरिक-सामना प्रमुख, डिजीलॉकर, हर उपयोगकर्ता को आधिकारिक दस्तावेज़ों के लिए क्लाउड वॉलेट देता है। उपयोगकर्ता शून्य से बढ़कर सितंबर 2026 तक 73 करोड़ से अधिक हुए, काग़ज़ के बराबर क़ानूनी मान्यता वाले लगभग 950 करोड़ दस्तावेज़ों के साथ।
ई-गवर्नेंस · डिजिटल इंडिया
2015 में शुरू हुए डिजिटल इंडिया का लक्ष्य था सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन लाना और नागरिकों को डिजिटल पहचान व दस्तावेज़ वॉलेट देना। इसका प्रमुख, डिजीलॉकर, लोगों को आधिकारिक दस्तावेज़ — आधार, ड्राइविंग लाइसेंस, मार्कशीट — संग्रहीत व तुरंत सत्यापित करने देता है, काग़ज़ के बराबर क़ानूनी मान्यता के साथ। पंजीकृत उपयोगकर्ता शून्य से बढ़कर सितंबर 2026 तक 73 करोड़ से अधिक हुए, लगभग 950 करोड़ दस्तावेज़ों के साथ। काउंटर डिजीलॉकर उपयोगकर्ता दिखाता है।

| वर्ष | डिजीलॉकर उपयोगकर्ता |
|---|---|
| 2015 | 0.2 करोड़ |
| 2016 | 0.5 करोड़ |
| 2017 | 1.0 करोड़ |
| 2018 | 2.0 करोड़ |
| 2019 | 3.3 करोड़ |
| 2020 | 5.0 करोड़ |
| 2021 | 9.0 करोड़ |
| 2022 | 13.5 करोड़ |
| 2023 | 20.0 करोड़ |
| 2024 | 37.0 करोड़ |
| 2025 | 54.0 करोड़ |
| 2026 | 73.5 करोड़ |
यह क्यों मायने रखता है डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना काग़ज़ी काम, भ्रष्टाचार और देरी घटाती है — एक सत्यापन जो कभी दिन लेता था अब मिनट लेता है — और बैंकिंग से कल्याण वितरण तक सब कुछ का आधार है।
- डिजीलॉकर उपयोगकर्ता: 0 → 73.53 करोड़ (2015→सितंबर 2026)
- ~950 करोड़ दस्तावेज़ जारी; डिजिटल इंडिया स्टैक का हिस्सा
- स्रोत: इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय (MeitY)
इतिहास
प्रमुख पहल
डिजीलॉकर व्यापक 'इंडिया स्टैक' की एक परत है। इसके साथ आधार (138 करोड़ डिजिटल पहचान), UMANG (एक ऐप में 1,600+ सरकारी सेवाएँ), DIKSHA (दुनिया का सबसे बड़ा शिक्षा मंच), और e-KYC है जिसने बैंक खाता खोलना काग़ज़-रहित, मिनटों का काम बनाया। मिलकर इन्होंने प्रशासनिक लागत में हज़ारों करोड़ बचाए और धोखाधड़ी घटाई।
यह कैसे काम करता है
डिजिटल इंडिया सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन लाकर और हर नागरिक को सत्यापित डिजिटल पहचान व काग़ज़-रहित दस्तावेज़ वॉलेट देकर काम करता है। DigiLocker से लोग आधिकारिक दस्तावेज़ — लाइसेंस, प्रमाणपत्र, अंक-तालिकाएँ — संग्रहीत व साझा करते हैं जो बिना प्रिंट क़ानूनी रूप से मान्य हैं; UMANG ऐप सैकड़ों सेवाओं को एक में समेटता है; और गाँव-स्तरीय कॉमन सर्विस सेंटर इन सेवाओं को उन तक पहुँचाते हैं जो स्वयं अभी ऑनलाइन नहीं हैं।
आगे की राह
लक्ष्य ऐसा नागरिक है जिसे शायद ही काग़ज़ या काउंटर चाहिए। आगे हैं BharatNet के तहत गाँवों तक व्यापक 5G व फ़ाइबर, एक ही साइन-ऑन के पीछे अधिक सेवाएँ, नए DPDP क़ानून से मज़बूत डेटा सुरक्षा, और स्थानीय भाषाओं में AI-सहायित सेवा — साथ ही शेष ग्रामीण परिवारों को ऑनलाइन लाना।
आँकड़ों में
0 → 73.53 करोड़ डिजीलॉकर उपयोगकर्ता (2015→सितंबर 2026)। ~950 करोड़ दस्तावेज़। 138 करोड़ आधार पहचान। 'इंडिया स्टैक' का हिस्सा। स्रोत: MeitY, PIB।
आँकड़े इस तिथि तक: 8 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार
स्रोत: MeitY, PIB के माध्यम से — डिजिलॉकर के पंजीकृत उपयोगकर्ता (करोड़), 2015 से सितंबर 2026। PIB: 8 सितंबर 2026 की फैक्टशीट में 73.53 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता (लिंक); 5 मार्च 2026 तक 67.63 करोड़। · लिंक