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ई-गवर्नेंस · डिजिटल इंडिया

ई-गवर्नेंस · डिजिटल इंडिया

2015 में शुरू हुए डिजिटल इंडिया का लक्ष्य था सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन लाना और नागरिकों को डिजिटल पहचान व दस्तावेज़ वॉलेट देना। इसका प्रमुख, डिजीलॉकर, लोगों को आधिकारिक दस्तावेज़ — आधार, ड्राइविंग लाइसेंस, मार्कशीट — संग्रहीत व तुरंत सत्यापित करने देता है, काग़ज़ के बराबर क़ानूनी मान्यता के साथ। पंजीकृत उपयोगकर्ता शून्य से बढ़कर 2025 तक 50 करोड़ से अधिक हुए, लगभग 950 करोड़ दस्तावेज़ों के साथ। काउंटर डिजीलॉकर उपयोगकर्ता दिखाता है।

Selfie in India means Digital India
Selfie in India means Digital India · Ajit Kumar · CC BY-SA 4.0 · Wikimedia Commons
0 → 54 cr
डिजीलॉकर उपयोगकर्ता
~950 cr
दस्तावेज़ जारी
138 cr
आधार संख्याएँ
DigiLocker users
DigiLocker users
वर्षDigiLocker users
20150 crore
20161 crore
20171 crore
20182 crore
20193 crore
20205 crore
20219 crore
202214 crore
202320 crore
202437 crore
202554 crore
2015
0crore
DigiLocker users
20152025
Since 2015
Added
+54 crore
2015
0 crore
2025
54 crore

यह क्यों मायने रखता है डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना काग़ज़ी काम, भ्रष्टाचार और देरी घटाती है — एक सत्यापन जो कभी दिन लेता था अब मिनट लेता है — और बैंकिंग से कल्याण वितरण तक सब कुछ का आधार है।

  • डिजीलॉकर उपयोगकर्ता: 0 → ~54 करोड़ (2015→2025)
  • ~950 करोड़ दस्तावेज़ जारी; डिजिटल इंडिया स्टैक का हिस्सा
  • स्रोत: इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय (MeitY)

इतिहास

1 जुलाई 2015 को शुरू हुए डिजिटल इंडिया का लक्ष्य था भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज में बदलना — गाँवों को ब्रॉडबैंड से जोड़ना, सेवाओं को ऑनलाइन लाना और आधार के ऊपर डिजिटल-पहचान स्टैक बनाना। इसका नागरिक-सामना प्रमुख, डिजीलॉकर, हर उपयोगकर्ता को आधिकारिक दस्तावेज़ों के लिए क्लाउड वॉलेट देता है। उपयोगकर्ता शून्य से बढ़कर 2025 तक 50 करोड़ से अधिक हुए, काग़ज़ के बराबर क़ानूनी मान्यता वाले लगभग 950 करोड़ दस्तावेज़ों के साथ।

प्रमुख पहल

डिजीलॉकर व्यापक 'इंडिया स्टैक' की एक परत है। इसके साथ आधार (138 करोड़ डिजिटल पहचान), UMANG (एक ऐप में 1,600+ सरकारी सेवाएँ), DIKSHA (दुनिया का सबसे बड़ा शिक्षा मंच), और e-KYC है जिसने बैंक खाता खोलना काग़ज़-रहित, मिनटों का काम बनाया। मिलकर इन्होंने प्रशासनिक लागत में हज़ारों करोड़ बचाए और धोखाधड़ी घटाई।

यह कैसे काम करता है

डिजिटल इंडिया सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन लाकर और हर नागरिक को सत्यापित डिजिटल पहचान व काग़ज़-रहित दस्तावेज़ वॉलेट देकर काम करता है। DigiLocker से लोग आधिकारिक दस्तावेज़ — लाइसेंस, प्रमाणपत्र, अंक-तालिकाएँ — संग्रहीत व साझा करते हैं जो बिना प्रिंट क़ानूनी रूप से मान्य हैं; UMANG ऐप सैकड़ों सेवाओं को एक में समेटता है; और गाँव-स्तरीय कॉमन सर्विस सेंटर इन सेवाओं को उन तक पहुँचाते हैं जो स्वयं अभी ऑनलाइन नहीं हैं।

आगे की राह

लक्ष्य ऐसा नागरिक है जिसे शायद ही काग़ज़ या काउंटर चाहिए। आगे हैं BharatNet के तहत गाँवों तक व्यापक 5G व फ़ाइबर, एक ही साइन-ऑन के पीछे अधिक सेवाएँ, नए DPDP क़ानून से मज़बूत डेटा सुरक्षा, और स्थानीय भाषाओं में AI-सहायित सेवा — साथ ही ग्रामीण इंटरनेट खाई (अब भी ~49% ग्रामीण बनाम 74% शहरी) पाटना।

आगे का रास्ता

अगला क़दम डिजिटल खाई पाटना है — ग्रामीण इंटरनेट (~49%) अब भी शहरी (~74%) से पीछे है, इसलिए वृद्ध, ग़रीब व कम-साक्षर नागरिकों तक पहुँचना, मज़बूत डेटा-सुरक्षा उपायों के साथ, जारी काम है।

आँकड़ों में

0 → ~54 करोड़ डिजीलॉकर उपयोगकर्ता (2015→2025)। ~950 करोड़ दस्तावेज़। 138 करोड़ आधार पहचान। 'इंडिया स्टैक' का हिस्सा। स्रोत: MeitY, PIB।

स्रोत: MeitY — DigiLocker registered users (crore), 2015–2025.