दशकों तक भारत अपने अधिकांश प्रमुख हथियार विदेश से खरीदता था — यह अब भी दुनिया के सबसे बड़े हथियार आयातकों में से एक है। 2014 से मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के तहत आत्मनिर्भरता अभियान ने क्षेत्र को नया रूप दिया: रक्षा निर्यात 2013-14 के लगभग ₹686 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹23,622 करोड़ और फिर 2025-26 में रिकॉर्ड ₹38,424 करोड़ — 63% उछाल और एक दशक में 50 गुना से अधिक — 80–100+ देशों तक पहुँचते हुए।
रक्षा निर्यात
भारत लंबे समय तक दुनिया के सबसे बड़े हथियार आयातकों में से एक था। पिछले दशक में 'मेक इन इंडिया' के तहत आत्मनिर्भरता के प्रयास ने इसे एक बढ़ते निर्यातक में बदला: रक्षा निर्यात 2013-14 के लगभग ₹686 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹23,622 करोड़ और 2025-26 में रिकॉर्ड ₹38,424 करोड़ हुआ — 50 गुना से अधिक वृद्धि — अब 80–100+ देशों तक। शीर्ष खरीदार अमेरिका, फ्रांस और आर्मेनिया हैं, और भारत ने ब्रह्मोस मिसाइल फिलीपींस व इंडोनेशिया को बेची है। काउंटर वार्षिक रक्षा निर्यात ₹ करोड़ में दिखाता है।

| वर्ष | Defence exports |
|---|---|
| 2014 | 686 ₹ crore |
| 2015 | 1,941 ₹ crore |
| 2016 | 2,059 ₹ crore |
| 2017 | 1,522 ₹ crore |
| 2018 | 4,682 ₹ crore |
| 2019 | 10,746 ₹ crore |
| 2020 | 9,116 ₹ crore |
| 2021 | 8,435 ₹ crore |
| 2022 | 12,815 ₹ crore |
| 2023 | 15,920 ₹ crore |
| 2024 | 21,083 ₹ crore |
| 2025 | 23,622 ₹ crore |
| 2026 | 38,424 ₹ crore |
| 2029 तक | 50,000 ₹ crore — सरकारी लक्ष्य |
यह क्यों मायने रखता है देश में हथियार बनाना सुरक्षा और आत्मनिर्भरता मज़बूत करता है, विदेशी मुद्रा बचाता है, और रक्षा को एक निर्यात उद्योग बनाता है।
- रक्षा निर्यात: ₹686 करोड़ (2014) → ₹38,424 करोड़ (FY26 रिकॉर्ड)
- शीर्ष खरीदार: अमेरिका, फ्रांस, आर्मेनिया; ब्रह्मोस फिलीपींस व इंडोनेशिया को
- घरेलू उत्पादन ने ₹1.27 लाख करोड़ (FY24) का रिकॉर्ड छुआ
- स्रोत: रक्षा मंत्रालय / PIB




इतिहास
खरीदार व प्रमुख सौदे
शीर्ष तीन गंतव्य अमेरिका, फ्रांस और आर्मेनिया हैं। अमेरिका व फ्रांस ज़्यादातर कंपोनेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स व सॉफ़्टवेयर खरीदते हैं, जबकि आर्मेनिया तैयार भारतीय हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार है — लगभग $2 अरब की साझेदारी के तहत आकाश वायु-रक्षा प्रणाली, पिनाका रॉकेट लॉन्चर और ATAGS होवित्ज़र। फिलीपींस ने ब्रह्मोस एंटी-शिप मिसाइल खरीदी ($375 मिलियन सौदा, 2022; 2024 से डिलीवरी), इंडोनेशिया ने अपना ब्रह्मोस सौदा किया, और फ्रांस पिनाका खरीदने की बातचीत में है — पुराने आपूर्तिकर्ता–प्राप्तकर्ता रिश्ते का उलटफेर। युद्धपोत सभी निर्यात का आधे से अधिक हैं, साथ में मिसाइल, तोप, डोर्नियर विमान, रडार व टॉरपीडो।
यह कैसे काम करता है
भारत रक्षा उपकरण अपने राज्य उपक्रमों और, तेज़ी से, निजी फ़र्मों दोनों से बेचता है, एक सुव्यवस्थित ऑनलाइन निर्यात-मंज़ूरी प्रणाली के समर्थन से जिसने पुरानी लालफ़ीताशाही घटाई। दायरा सरल वस्तुओं (बुलेटप्रूफ़ जैकेट, गोला-बारूद, पुर्ज़े) से पूर्ण प्लेटफ़ॉर्म तक है — डोर्नियर विमान, आकाश व पिनाका प्रणालियाँ, और स्टार उत्पाद ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल, रूस के साथ संयुक्त रूप से निर्मित व अब निर्यातित।
आगे की राह
यह कम आधार से तेज़ वृद्धि है: निर्यात 2014 में ₹1,000 करोड़ से कम से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड ₹38,424 करोड़ (एक वर्ष में 63% ऊपर), 100 से अधिक देशों तक पहुँचा — और निजी फ़र्में अब लगभग आधा आपूर्ति करती हैं। लक्ष्य है 2029 तक ₹50,000 करोड़। इसे बनाए रखने का अर्थ है उच्च-मूल्य प्रणालियों (मिसाइल, रडार, विमान) में चढ़ना और बड़े सरकार-से-सरकार सौदे जीतना, केवल कंपोनेंट बिक्री नहीं।
आगे का रास्ता
यह कम आधार से तेज़ वृद्धि है — भारत अब भी बहुत उच्च-स्तरीय तकनीक आयात करता है, इसलिए अगला क़दम स्वदेशी R&D (जेट इंजन, उन्नत सेंसर) बढ़ाना है ताकि निर्यात लगातार चढ़ता रहे।
आँकड़ों में
₹686 → ₹38,424 करोड़ रक्षा निर्यात (2014→FY26), रिकॉर्ड 63% उछाल। शीर्ष खरीदार अमेरिका, फ्रांस, आर्मेनिया; 80–100+ देश। प्रमुख सौदे: ब्रह्मोस फिलीपींस व इंडोनेशिया को; आकाश / पिनाका / ATAGS आर्मेनिया को। ₹50,000 करोड़ 2029 तक लक्ष्य। स्रोत: रक्षा मंत्रालय, PIB।
स्रोत: Ministry of Defence — annual defence exports in ₹ crore, 2014–2026 (FY26 record ₹38,424 cr).