सहकारी संस्थाएँ — अमूल जैसे डेयरी दिग्गज, चीनी मिलें, और ग्राम ऋण समितियाँ — एक सदी से ग्रामीण भारत को संगठित करती रही हैं, आज 8.5 लाख से अधिक समितियों और लगभग 32 करोड़ सदस्यों के साथ। 2021 में उन्हें आधुनिक बनाने के लिए एक समर्पित सहकारिता मंत्रालय बना।
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सहकारी संस्थाएँ — अमूल से ग्राम ऋण समितियों तक — लंबे समय से ग्रामीण भारत की रीढ़ रही हैं, 8.5 लाख से अधिक सहकारी समितियों और लगभग 32 करोड़ सदस्यों के साथ। 2021 में भारत ने उन्हें आधुनिक बनाने के लिए 'सहकार से समृद्धि' के आदर्श वाक्य के तहत एक समर्पित सहकारिता मंत्रालय बनाया: ग्राम ऋण समितियों का कंप्यूटरीकरण (79,630 स्वीकृत), उन्हें नए व्यवसाय, और जैविक, बीज व निर्यात के लिए राष्ट्रीय सहकारी। यह समयरेखा उन सुधारों को दर्शाती है।

यह क्यों मायने रखता है सहकारी संस्थाएँ छोटे किसानों और ग्रामीण उत्पादकों को संसाधन व सौदेबाज़ी शक्ति एकत्र करने देती हैं — ज़मीनी समृद्धि का एक सिद्ध, समावेशी मॉडल।
- सहकारिता मंत्रालय (2021); 8.53 लाख सहकारी समितियाँ (जुलाई 2026), ~32 करोड़ सदस्य
- 61,478 PACS साझा सॉफ़्टवेयर पर (79,630 स्वीकृत); नई राष्ट्रीय सहकारी समितियाँ
- स्रोत: सहकारिता मंत्रालय



इतिहास
सहकार से समृद्धि
सुधार 79,630 स्वीकृत ग्राम ऋण समितियों का कंप्यूटरीकरण कर रहे हैं, उन्हें नए व्यवसाय दे रहे हैं, और जैविक, बीज व निर्यात के लिए राष्ट्रीय सहकारी बना रहे हैं। सहकारी क्षेत्र में दुनिया की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना ग्राम समितियों में गोदाम बनाती है।
यह कैसे काम करता है
सहकारी समितियाँ सदस्य-स्वामित्व वाले व्यवसाय हैं — किसान, डेयरी उत्पादक या उधारकर्ता जो संयुक्त रूप से एक उद्यम रखते व चलाते हैं, गाँव की ऋण समिति से लेकर अमूल व IFFCO जैसे दिग्गजों तक। ये छोटे उत्पादकों को पैमाना व मुनाफ़े में हिस्सा देती हैं। 2021 में भारत ने 'सहकार से समृद्धि' नारे के तहत एक समर्पित सहकारिता मंत्रालय बनाया ताकि इस विशाल, अक्सर-उपेक्षित क्षेत्र का आधुनिकीकरण हो — हज़ारों प्राथमिक गाँव ऋण समितियों (PACS) के कंप्यूटरीकरण से शुरू करते हुए।
आगे की राह
आगे का धैर्यवान काम पुरानी सहकारी समितियों को पेशेवर, पारदर्शी उद्यमों में बदलना है — लाखों स्थानीय निकायों में शासन व वित्त मज़बूत करना। बीज, जैविक उपज व निर्यात हेतु नई राष्ट्रीय-स्तर बहु-राज्य सहकारी समितियाँ किसानों को बाज़ार तक सीधा रास्ता देने का लक्ष्य रखती हैं, जबकि PACS का कंप्यूटरीकरण व नई सेवाओं (ईंधन, पानी, बैंकिंग) में विस्तार हो रहा है ताकि गाँव समिति एक व्यापक ग्रामीण व्यापार केंद्र बने।
आँकड़ों में
सहकारिता मंत्रालय (2021); 8,53,430 सहकारी समितियाँ (15 जुलाई 2026), लगभग 32 करोड़ सदस्य; कंप्यूटरीकरण हेतु 79,630 PACS स्वीकृत, 61,478 साझा सॉफ़्टवेयर पर; 313 PACS में अनाज गोदाम पूरे (1.80 लाख टन, जुलाई 2026); राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025। स्रोत: सहकारिता मंत्रालय, PIB।
आँकड़े इस तिथि तक: 15 जुलाई 2026 तक
स्रोत: सहकारिता मंत्रालय, PIB द्वारा प्रकाशित संसद उत्तर (29 जुलाई 2026, लिंक) — राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस में 15 जुलाई 2026 तक 8,53,430 सहकारी समितियाँ दर्ज हैं, जिनमें 6.63 लाख कार्यरत हैं। मील के पत्थर मंत्रालय के वक्तव्यों पर आधारित हैं: 6 जुलाई 2021 को मंत्रालय बना; जून 2022 में 63,000 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) का कंप्यूटरीकरण स्वीकृत, जो बढ़कर 79,630 स्वीकृत और 61,478 जुड़ी समितियों तक पहुँचा (फ़रवरी 2026); 5 जनवरी 2023 को मॉडल उपनियम भेजे गए; 24 फ़रवरी 2024 को 11 पैक्स में अनाज भंडारण पायलट गोदाम खुले, और जुलाई 2026 तक 313 पैक्स में गोदाम पूरे हुए; 24 जुलाई 2025 को राष्ट्रीय सहकारिता नीति जारी हुई। मील के पत्थर 2021–2025। · लिंक