भारत का कोयला क्षेत्र 2014 के बाद नया बना। जब उस वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने पुराने कोयला-ब्लॉक आवंटन रद्द किए, सरकार ने क्षेत्र को पुनर्गठित किया — खनन क़ानून संशोधित किए और 2020 से इसे वाणिज्यिक और निजी खनिकों के लिए खोला। उत्पादन लगातार बढ़ा और 2024-25 में पहली बार 1 अरब टन पार किया (लगभग 1,048 MT), एक दशक पहले के लगभग 565 MT से।
कोयला और खनन
कोयला अब भी भारत की लगभग आधी ऊर्जा और 70% से अधिक बिजली का ईंधन है, इसलिए घरेलू उत्पादन बत्ती जलाए रखने के केंद्र में है। भारत का कोयला उत्पादन दशक में लगभग दोगुना हुआ, 2024-25 में पहली बार 1 अरब टन (लगभग 1,048 MT) पार करते हुए, 2014 के लगभग 565 MT से — निजी और वाणिज्यिक खनिकों के लिए क्षेत्र खोलने की मदद से। काउंटर वार्षिक कोयला उत्पादन मिलियन टन में दिखाता है।

| वर्ष | Coal production |
|---|---|
| 2014 | 565 MT |
| 2015 | 609 MT |
| 2016 | 639 MT |
| 2017 | 662 MT |
| 2018 | 675 MT |
| 2019 | 731 MT |
| 2020 | 729 MT |
| 2021 | 716 MT |
| 2022 | 778 MT |
| 2023 | 893 MT |
| 2024 | 998 MT |
| 2025 | 1,048 MT |
यह क्यों मायने रखता है कोयला भारत की बिजली और इस्पात का आधार है, इसलिए इसका उत्पादन ऊर्जा सुरक्षा और आयात बिल तय करता है — भले ही भारत नवीकरणीय ऊर्जा बढ़ा रहा है।
- कोयला उत्पादन: ~565 MT (2014) → ~1,048 MT (2025)
- 2024-25 में पहली बार 1 अरब टन पार किया
- स्रोत: कोयला मंत्रालय
इतिहास
प्रमुख पहल
कोल इंडिया लिमिटेड रीढ़ बना हुआ है, लगभग 781 MT उत्पादन करते हुए, जबकि निजी और कैप्टिव खदानें सबसे तेज़ बढ़ीं — एक साल में लगभग 29%। छत्तीसगढ़ में गेवरा और कुसमुंडा जैसी मेगा-खदानें दुनिया की सबसे बड़ी में शुमार हैं। अधिक घरेलू उत्पादन ने कोयला आयात घटाया और अरबों की विदेशी मुद्रा बचाई, और यह क्षेत्र 350 से अधिक खदानों में लगभग 5 लाख खदान श्रमिकों को रोज़गार देता है।
यह कैसे काम करता है
भारत का अधिकांश कोयला राज्य दिग्गज कोल इंडिया लिमिटेड विशाल खुली खदानों से निकालता है, फिर रेल से उन बिजलीघरों तक ले जाता है जो अब भी देश की अधिकांश बिजली बनाते हैं। दशकों तक खनन सरकारी एकाधिकार था; 2020 से यह क्षेत्र वाणिज्यिक निजी खनन के लिए खोला गया, जिससे कंपनियाँ पहली बार स्वतंत्र रूप से कोयला खनन व बिक्री कर सकीं, उत्पादन बढ़ाने व आयात निर्भरता घटाने हेतु।
आगे की राह
नवीकरणीय के उभार के बावजूद कोयला भारत का ऊर्जा-सहारा बना है — उत्पादन प्रति वर्ष 1 अरब टन से ऊपर चढ़ा है, और सरकार आयात घटाने हेतु और ऊँचा ले जा रही है। दिशा सावधान है, अचानक नहीं: आज बत्ती जलाए रखना व उद्योग को ईंधन देना, साथ ही धीरे-धीरे स्वच्छ स्रोत बढ़ाना, खदान सुरक्षा व भूमि पुनर्स्थापन सुधारना — और सेवानिवृत्त कोयला स्थलों को भविष्य के परमाणु संयंत्रों हेतु देखना।
आगे का रास्ता
कोयला भारत का केंद्रीय ऊर्जा-संतुलन है — यह अब भी देश की अधिकांश बिजली देता है, इसलिए दीर्घकालिक काम आज की ऊर्जा सुरक्षा पूरी करते हुए धीरे-धीरे कम-कार्बन मिश्रण की ओर बढ़ना है।
आँकड़ों में
~565 → ~1,048 MT कोयला उत्पादन (2014→2025)। 2024-25 में पहली बार 1 अरब टन। ऊर्जा मिश्रण का ~55%; बिजली का 70%+। ~5 लाख खदान श्रमिक। स्रोत: कोयला मंत्रालय, CIL, PIB।
स्रोत: Ministry of Coal — all-India coal production (million tonnes), 2014–2025.