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भारतनेट · ग्रामीण ब्रॉडबैंड

भारतनेट · ग्रामीण ब्रॉडबैंड

भारतनेट दुनिया की सबसे बड़ी ग्रामीण-कनेक्टिविटी परियोजनाओं में से एक है: भारत की ग्राम पंचायतों तक ऑप्टिकल फाइबर बिछाना ताकि गाँवों को शहरों जैसा ब्रॉडबैंड आधार मिले। ~2.56 लाख में से लगभग 2.14 लाख पंचायतें जुड़ी हैं। काउंटर वह रोलआउट दिखाता है।

Propagation of light through the core of an optical fiber. Macro visualization.
Propagation of light through the core of an optical fiber. Macro visualization. · Wikimedia Commons
2.14 lakh
ग्राम पंचायतें जुड़ीं
42 lakh km
ऑप्टिकल फाइबर बिछाया (2025)
100 cr+
ब्रॉडबैंड कनेक्शन (2025)
Gram panchayats connected
Gram panchayats connected
वर्षGram panchayats connected
20140 lakh
20150 lakh
20161 lakh
20171 lakh
20181 lakh
20191 lakh
20202 lakh
20212 lakh
20222 lakh
20232 lakh
20242 lakh
20252 lakh
20262 lakh
2014
0lakh
Gram panchayats connected
20142026
Since 2014
Added
+2 lakh
2014
0 lakh
2026
2 lakh

यह क्यों मायने रखता है गाँव तक फाइबर डिजिटल इंडिया का आधार है — यह ग्रामीण ई-गवर्नेंस, टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन शिक्षा, बैंकिंग व बाज़ारों को शक्ति देता है। इसके बिना UPI व आधार अंतिम छोर तक नहीं पहुँच सकते। यह कनेक्टिविटी को अवसर में बदलता है।

  • भारत की ~2.56 लाख ग्राम पंचायतों में से ~2.14 लाख जुड़ी हैं (चरण I व II, ~₹42,000 करोड़)।
  • ऑप्टिकल फाइबर ~19 लाख रूट-किमी (2019) से बढ़कर ~42 लाख रूट-किमी (2025) हुआ।
  • भारतनेट चरण III (2026) 2028 तक शेष सभी पंचायतों व ~6.25 लाख गाँवों को जोड़ने का लक्ष्य रखता है।
  • भारत के ब्रॉडबैंड कनेक्शन 2025 के अंत में 100 करोड़ पार कर गए, एक दशक पहले ~13 करोड़ से।

इतिहास

जब 2015 में डिजिटल इंडिया शुरू हुआ, अधिकांश गाँवों में ब्रॉडबैंड नहीं था। भारतनेट — राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क का उत्तराधिकारी — ने हर ग्राम पंचायत तक सरकारी ऑप्टिकल फाइबर बिछाकर इसे ठीक करने का बीड़ा उठाया। चरण I ने दिसंबर 2017 तक 1 लाख से अधिक पंचायतें जोड़ीं।

उल्लेखनीय उपलब्धि

2025 के अंत तक, भारत की ~2.56 लाख ग्राम पंचायतों में से लगभग 2.14–2.15 लाख सेवा-तैयार थीं, लगभग 6.95 लाख किमी ऑप्टिकल फाइबर के साथ। एक समानांतर उपलब्धि में, भारत के कुल ब्रॉडबैंड कनेक्शन नवंबर 2025 में 100 करोड़ (1 अरब) पार कर गए — एक दशक पहले मात्र ~13 करोड़ से।

यह कैसे काम करता है

भारतनेट BSNL, RailTel व PowerGrid जैसे सार्वजनिक उपक्रमों के मौजूदा फाइबर का पुनः उपयोग करता है, व हर पंचायत तक अंतिम अंतर पाटने हेतु अतिरिक्त फाइबर बिछाता है। वहाँ से, स्थानीय ऑपरेटर व वाई-फाई (PM-WANI हॉटस्पॉट) घरों, स्कूलों व सामान्य सेवा केंद्रों तक सेवा पहुँचाते हैं। दूरस्थ व सीमावर्ती पंचायतें उपग्रह से जुड़ती हैं जहाँ फाइबर नहीं पहुँच सकता।

आगे की राह

सस्ते डेटा ने भारत को एक डिजिटल राष्ट्र बनाया — लागत 2014 में ~₹269 प्रति GB से आज ₹8–10 तक गिरी, दुनिया में सबसे कम में से। भारतनेट का फाइबर उसका थोक आधार है: यह UPI भुगतान, टेलीमेडिसिन, ई-गवर्नेंस व ऑनलाइन कक्षाएँ ढोता है जो अब ग्रामीण भारत में गहराई तक पहुँचती हैं।

आगे का रास्ता

बिना जुड़ी पंचायतें सबसे कठिन हैं — दूरस्थ, पहाड़ी या विरल आबादी वाली। भारतनेट चरण III, मई 2026 में ~₹1.5 लाख करोड़ परिव्यय से शुरू, सार्वजनिक-निजी मॉडल पर 2028 तक शेष सभी पंचायतों व लगभग 6.25 लाख गाँवों को जोड़ने का लक्ष्य रखता है, 5G-बैकहॉल तैयार। नेटवर्क को बनाए रखना व वास्तव में उपयोग करना असली परीक्षा है।

आँकड़ों में

~2.56 लाख में से ~2.14 लाख ग्राम पंचायतें जुड़ीं। देशभर में ~42 लाख रूट-किमी ऑप्टिकल फाइबर (2025)। चरण I व II में ₹42,000 करोड़ व्यय। 100 करोड़+ ब्रॉडबैंड कनेक्शन (2025)। चरण III: ~₹1.5 लाख करोड़, 2028 तक सभी गाँव। स्रोत: DoT, BBNL, PIB।

स्रोत: Dept of Telecom / BBNL — gram panchayats connected by optical fibre under BharatNet, 2014–2026.