एक ऋण उछाल के बाद, भारतीय बैंक ख़राब ऋणों से कुचले गए — सकल NPA 2018 में 11.2% पहुँचा। एक सफ़ाई हुई: 2016 दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, बड़े पूंजी निवेश, और सार्वजनिक-क्षेत्र के बैंकों का 27 से 12 में विलय।
बैंकिंग और वित्तीय सुधार
एक दशक पहले भारतीय बैंक ख़राब ऋणों के नीचे दबे थे — सकल ग़ैर-निष्पादित परिसंपत्तियाँ (NPA) 2018 में 11.2% के शिखर पर पहुँचीं। सुधारों की एक शृंखला ने इसे पलटा: दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (2016) ने बकाया वसूलने का तेज़ तरीक़ा दिया, सार्वजनिक-क्षेत्र के बैंक पुनर्पूंजीकृत हुए और 27 से 12 में विलय हुए, और एक 'बैड बैंक' (NARCL) स्थापित हुआ। सकल NPA 2024 तक लगभग 2.8% गिरा, बहु-वर्षीय निचला स्तर, और बैंक रिकॉर्ड लाभ पर लौटे। काउंटर सकल NPA अनुपात दिखाता है।

| वर्ष | Gross bank NPA ratio |
|---|---|
| 2015 | 5 % |
| 2016 | 8 % |
| 2017 | 9 % |
| 2018 | 11 % |
| 2019 | 9 % |
| 2020 | 8 % |
| 2021 | 7 % |
| 2022 | 6 % |
| 2023 | 4 % |
| 2024 | 3 % |
| 2025 | 2 % |
यह क्यों मायने रखता है स्वस्थ बैंक वृद्धि के लिए अधिक ऋण दे सकते हैं; IBC ने चूक के इर्द-गिर्द संस्कृति भी बदली — उधारकर्ता अब न चुकाने पर अपनी कंपनी खो सकते हैं।
- सकल NPA: 11.2% (2018 शिखर) → ~2.8% (2024)
- IBC (2016); PSU बैंक 27 → 12; रिकॉर्ड बैंक लाभ
- स्रोत: भारतीय रिज़र्व बैंक




इतिहास
बदलाव
सकल NPA 2024 तक ~2.8% के बहु-वर्षीय निचले स्तर पर गिरा और बैंक रिकॉर्ड लाभ पर लौटे। IBC ने उधारकर्ता व्यवहार भी बदला — प्रवर्तक अब न चुकाने पर अपनी कंपनी खो सकते हैं — जबकि UPI व डिजिटल ऋण ने पहुँच बढ़ाई।
यह कैसे काम करता है
भारत की बैंकिंग बड़े सार्वजनिक-क्षेत्र बैंकों व मज़बूत निजी बैंकों पर टिकी है, सभी RBI की देखरेख में। दशक का केंद्रीय सुधार ख़राब ऋणों की सफ़ाई था: दिवाला व दिवालियापन संहिता (2016) ने पहली बार, चूककर्ता कंपनियों की संपत्ति ज़ब्त कर पुनः बेचने का तेज़, समयबद्ध तरीक़ा बनाया — शक्ति चूककर्ताओं से ऋणदाताओं की ओर स्थानांतरित करते हुए। कमज़ोर सार्वजनिक बैंकों को मज़बूत बनाने हेतु विलय व पुनर्पूँजीकरण भी किया गया।
आगे की राह
बदलाव वास्तविक है: बैंकों का सकल ख़राब-ऋण अनुपात लगभग 11-12% के शिखर से घटकर 3% से नीचे आया — एक बहु-दशकीय न्यूनतम — और सार्वजनिक बैंक रिकॉर्ड मुनाफ़े में लौटे। अगली परीक्षा उस अनुशासन को अगले ऋण-चक्र में बनाए रखना है: छोटे व्यवसायों को ऋण रोके बिना वसूली स्थिर रखना, और दिवाला अदालतों को तेज़ करना, जो धीमी व भरी हो गई हैं।
आगे का रास्ता
अगली परीक्षा अगले चक्र में ऋण अनुशासन बनाए रखना है — छोटे व्यवसायों को ऋण रोके बिना IBC वसूली स्थिर रखना।
आँकड़ों में
सकल NPA 11.2% (2018) → ~2.8% (2024); PSU बैंक 27 → 12; IBC (2016); रिकॉर्ड बैंक लाभ। स्रोत: RBI।
स्रोत: RBI — gross NPA ratio of scheduled commercial banks (%), 2015–2025.