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भ्रष्टाचार-रोधी व काला धन

भ्रष्टाचार-रोधी व काला धन

एक दशक के विधिक व तकनीकी सुधार ने भ्रष्टाचार पर उसके लक्षणों के बजाय उसकी जड़ पर प्रहार किया। काला धन अधिनियम (2015) व पुनर्जीवित बेनामी क़ानून (2016) ने वहाँ प्रवर्तनीय क़ानून बनाए जहाँ पहले कोई काम नहीं करता था। 2.25 लाख से अधिक शेल कंपनियाँ हटाई गईं। फ़ेसलेस कर आकलन ने अधिकारी-करदाता संपर्क हटाया। और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण — अब 320 योजनाओं में — ने सब्सिडी सीधे बैंक खातों में भेजी; DBT मिशन के अनुमान के अनुसार DBT और संबंधित सुधारों से मार्च 2025 तक लगभग ₹5.14 लाख करोड़ की बचत हुई। यह टाइमलाइन उन सुधारों को दर्शाती है।

नई दिल्ली में एक सरकारी भवन।
नई दिल्ली में एक सरकारी भवन। · Abhinav Tripathi · Pexels
₹5.14 लाख करोड़
डीबीटी से अनुमानित बचत (मार्च 2025 तक)
320
योजनाएँ डीबीटी पर
2.25 लाख
शेल कंपनियाँ हटाई गईं
DBT से अनुमानित बचत (मार्च 2025 तक)
2015
काला धन कानून
काला धन (अघोषित विदेशी आय और संपत्ति) अधिनियम ने विदेशी संपत्तियों के लिए एक समर्पित कानून बनाया, जिसमें अनुपालन की एक अवधि के बाद अभियोजन का प्रावधान है।
2016
बेनामी कानून हुआ सख्त
2017
शेल कंपनियों का पंजीकरण रद्द
2018
भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम
2021
फेसलेस आकलन और अपील
2025
DBT से अनुमानित बचत ₹5.14 लाख करोड़
2015
1उपलब्धियाँ
20152025
नवीनतम
काला धन कानून
काला धन (अघोषित विदेशी आय और संपत्ति) अधिनियम ने विदेशी संपत्तियों के लिए एक समर्पित कानून बनाया, जिसमें अनुपालन की एक अवधि के बाद अभियोजन का प्रावधान है।

यह क्यों मायने रखता है रिसाव वह कर था जो ग़रीब दो बार चुकाता था — एक बार करों में, एक बार अपने उस हक़ के हिस्से में जो कभी पहुँचा ही नहीं। सब्सिडी शृंखला से बिचौलियों को, और सूचियों से दोहरे व फ़र्ज़ी नामों को हटाने का अर्थ है कि पैसा उस व्यक्ति तक पहुँचता है जिसके लिए वह स्वीकृत हुआ। फ़ेसलेस प्रक्रियाएँ उस विवेकाधिकार को हटाती हैं जिसने रिश्वतखोरी संभव बनाई।

  • डीबीटी 320 योजनाओं को कवर करता है; DBT मिशन के अनुमान के अनुसार DBT व संबंधित सुधारों से मार्च 2025 तक लगभग ₹5.14 लाख करोड़ की बचत हुई।
  • काला धन अधिनियम (2015) व प्रवर्तनीय बेनामी अधिनियम (2016) ने ज़ब्ती संभव बनाई।
  • 2017 से 2.25 लाख से अधिक शेल कंपनियाँ पंजीकरण से हटाई गईं।
  • फ़ेसलेस आकलन व अपील ने आयकर से करदाता-अधिकारी संपर्क हटाया।
  • भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (2018) फ़रार व्यक्तियों की भारतीय संपत्ति ज़ब्त करने देता है।

इतिहास

2010 के दशक का आरंभ बड़े घोटालों की एक शृंखला व इस सार्वजनिक भावना से परिभाषित था कि रिसाव आकस्मिक नहीं, संरचनात्मक है। सब्सिडी बिचौलियों की परतों से गुज़रती थी; 1988 का बेनामी क़ानून मौजूद था पर कभी प्रवर्तनीय नहीं बना; अघोषित विदेशी संपत्ति हेतु कोई समर्पित क़ानून नहीं था; और आयकर आकलन आमने-सामने के विवेकाधिकार पर निर्भर था।

उल्लेखनीय उपलब्धि

प्रत्यक्ष लाभ अंतरण एकल सबसे बड़ा रिसाव-रोधी उपकरण बना। अब 50 से अधिक मंत्रालयों की 320 योजनाओं में फैला, यह सब्सिडी, पेंशन, छात्रवृत्ति व मज़दूरी सीधे आधार-लिंक्ड बैंक खातों में भेजता है। DBT मिशन के अनुमान के अनुसार DBT व संबंधित सुधारों से, जिनमें दोहरे, अपात्र व अस्तित्वहीन लाभार्थी हटाना शामिल है, मार्च 2025 तक लगभग ₹5.14 लाख करोड़ की बचत हुई।

यह कैसे काम करता है

चार सुधार मिलकर काम करते हैं। काला धन अधिनियम (2015) ने अघोषित विदेशी संपत्ति हेतु समर्पित क़ानून बनाया। बेनामी संशोधन (2016) ने बेनामी संपत्ति को ज़ब्त-योग्य व प्रथा को कारावास-योग्य बनाया — 1988 से निष्क्रिय क़ानून को सक्रिय करते हुए। भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (2018) फ़रार व्यक्ति की भारतीय संपत्ति ज़ब्त करने देता है। और फ़ेसलेस आकलन व अपील ने आयकर से अधिकारी-करदाता संपर्क पूरी तरह हटाया, विवेकाधिकार को यादृच्छिक आवंटन से बदलते हुए।

आगे की राह

पारदर्शिता सुधार साथ-साथ चले: 2017 से 2.25 लाख से अधिक शेल कंपनियाँ हटाई गईं, कोयला व स्पेक्ट्रम सहित प्राकृतिक संसाधनों की इलेक्ट्रॉनिक नीलामी, सार्वजनिक ख़रीद हेतु जेम (सरकारी ई-बाज़ार), और जीएसटी की चालान-शृंखला, जिसने अप्रत्यक्ष-कर चोरी के एक बड़े हिस्से को संरचनात्मक रूप से कठिन बनाया।

आँकड़ों में

~₹5.14 लाख करोड़ DBT व संबंधित सुधारों से अनुमानित बचत (मार्च 2025 तक)। 50+ मंत्रालयों की 320 योजनाएँ डीबीटी पर। 2.25 लाख+ शेल कंपनियाँ हटाई गईं। काला धन अधिनियम 2015, बेनामी संशोधन 2016, भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम 2018स्रोत: वित्त मंत्रालय, डीबीटी मिशन, सीबीडीटी, पीआईबी।

आँकड़े इस तिथि तक: मार्च 2025 तक संचयी

स्रोत: वित्त मंत्रालय / ED / CBDT / DBT मिशन — प्रवर्तन और पारदर्शिता के प्रमुख सुधार, 2014→2025। · लिंक