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रोपवे · पर्वतमाला

रोपवे · पर्वतमाला

पर्वतमाला, यानी राष्ट्रीय रोपवे विकास कार्यक्रम, की घोषणा केंद्रीय बजट 2022-23 में की गई थी, ताकि पहाड़ी इलाक़ों और भीड़भाड़ वाले शहरों में सार्वजनिक-निजी भागीदारी से रोपवे बनाए जाएँ। इसे नेशनल हाईवेज़ लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML) लागू करती है, जो भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है। कार्यक्रम का लक्ष्य पाँच वर्षों में 1,200 किमी की 250 से अधिक रोपवे परियोजनाएँ बनाना है। दिसंबर 2025 तक 11.01 किमी की 5 परियोजनाएँ निर्माणाधीन थीं, और केदारनाथ व हेमकुंड साहिब रोपवे आवंटित हो चुके थे।

पश्चिम बंगाल में चाय बागानों के ऊपर दार्जिलिंग रोपवे की केबल कार।
पश्चिम बंगाल में चाय बागानों के ऊपर दार्जिलिंग रोपवे की केबल कार। · JyotiPN · CC BY-SA 4.0 · Wikimedia Commons
25.45 किमी
DBFOT पर आवंटित 2 परियोजनाएँ, केदारनाथ और हेमकुंड साहिब (दिसंबर 2025)
₹4,081.28 करोड़
सोनप्रयाग–केदारनाथ रोपवे की पूंजीगत लागत (मार्च 2025)
1,200 किमी
कार्यक्रम का लक्ष्य, पाँच वर्षों में 250 से अधिक परियोजनाएँ (मार्च 2025)
निर्माणाधीन रोपवे, 5 परियोजनाएँ (दिसंबर 2025)
2021
रोपवे सड़क परिवहन मंत्रालय को सौंपे गए
फ़रवरी 2021 में कार्य आवंटन नियमों में संशोधन किया गया, ताकि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय रोपवे और वैकल्पिक परिवहन समाधानों का विकास भी देखे।
2022
बजट 2022-23 में पर्वतमाला की घोषणा
2022
7 रोपवे के लिए हिमाचल प्रदेश के साथ समझौता
2023
वाराणसी शहरी रोपवे का शिलान्यास
2024
पर्वतमाला की पहली दो परियोजनाएँ आवंटित
2025
मंत्रिमंडल ने सोनप्रयाग–केदारनाथ रोपवे को मंज़ूरी दी
2025
मंत्रिमंडल ने गोविंदघाट–हेमकुंड साहिब जी रोपवे को मंज़ूरी दी
2025
11.01 किमी निर्माणाधीन
2021
1उपलब्धियाँ
20212025
नवीनतम
रोपवे सड़क परिवहन मंत्रालय को सौंपे गए
फ़रवरी 2021 में कार्य आवंटन नियमों में संशोधन किया गया, ताकि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय रोपवे और वैकल्पिक परिवहन समाधानों का विकास भी देखे।

यह क्यों मायने रखता है पहाड़ों में रोपवे सीधी रेखा में उस इलाक़े के ऊपर से गुज़र सकता है, जहाँ सड़कों को लंबे, घुमावदार रास्ते चाहिए, और ज़मीन पर इसके लिए केवल पतले खंभे लगते हैं। मार्च 2025 में केदारनाथ का रास्ता गौरीकुंड से 16 किमी की पैदल चढ़ाई का था; मंज़ूर रोपवे सोनप्रयाग से एक ओर का सफ़र लगभग 36 मिनट का करने के लिए बनाया गया है।

  • पर्वतमाला की घोषणा केंद्रीय बजट 2022-23 में (फ़रवरी 2022)
  • कार्यक्रम का लक्ष्य: पाँच वर्षों में 1,200 किमी की 250 से अधिक रोपवे परियोजनाएँ (मार्च 2025)
  • सोनप्रयाग–केदारनाथ रोपवे, 12.9 किमी, ₹4,081.28 करोड़, 5 मार्च 2025 को मंज़ूर
  • गोविंदघाट–हेमकुंड साहिब जी रोपवे, 12.4 किमी, ₹2,730.13 करोड़, 5 मार्च 2025 को मंज़ूर
  • वाराणसी कैंट–गोदौलिया शहरी रोपवे का शिलान्यास 24 मार्च 2023 को
  • 1.69 किमी की 2 रोपवे परियोजनाएँ आवंटन के अंतिम चरण में (दिसंबर 2025)

इतिहास

फ़रवरी 2021 में कार्य आवंटन नियमों में संशोधन किया गया, ताकि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय रोपवे और वैकल्पिक परिवहन समाधान भी देखे। इसके बाद केंद्रीय बजट 2022-23 में कठिन पहाड़ी इलाक़ों और भीड़भाड़ वाले शहरों के लिए PPP मोड में राष्ट्रीय रोपवे विकास कार्यक्रम, पर्वतमाला, की घोषणा हुई। बजट में कहा गया कि 2022-23 में 60 किमी की 8 रोपवे परियोजनाओं के ठेके दिए जाएँगे। 26 अप्रैल 2022 को हिमाचल प्रदेश के साथ हुए समझौता ज्ञापन में ₹3,232 करोड़ की कुल लागत वाली 57.1 किमी की 7 परियोजनाएँ शामिल की गईं।

उल्लेखनीय उपलब्धि

5 मार्च 2025 को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने पर्वतमाला की अब तक की दो सबसे बड़ी परियोजनाओं को मंज़ूरी दी, और दोनों उत्तराखंड में हैं। ₹4,081.28 करोड़ का 12.9 किमी लंबा सोनप्रयाग–केदारनाथ रोपवे ट्राई-केबल डिटैचेबल गोंडोला (3S) तकनीक पर आधारित है, जिसकी क्षमता हर दिशा में प्रति घंटे 1,800 यात्रियों की है। ₹2,730.13 करोड़ का 12.4 किमी लंबा गोविंदघाट–हेमकुंड साहिब जी रोपवे प्रतिदिन 11,000 यात्रियों के लिए बनाया गया है। दोनों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी में डिज़ाइन-निर्माण-वित्त-संचालन-हस्तांतरण (DBFOT) आधार पर बनाया जाना है।

यह कैसे काम करता है

NHAI के पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी NHLML को मंत्रालय ने रोपवे लागू करने का ज़िम्मा दिया है, और यह उन राज्यों के साथ काम करती है जो समझौता ज्ञापन करते हैं; मार्च 2025 तक 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समझौते हो चुके थे। छोटी परियोजनाएँ हाइब्रिड एन्युटी मोड पर बनती हैं, जिसमें सरकार निर्माण लागत का 60% सहयोग देती है, जबकि राष्ट्रीय राजमार्गों में यह 40% है। उत्तराखंड की दोनों तीर्थ रोपवे परियोजनाएँ इसके बजाय DBFOT मॉडल पर हैं। कार्यक्रम में रोपवे निर्माण में कम से कम 50% स्वदेशी पुर्ज़े अनिवार्य हैं।

आगे की राह

कार्यक्रम का लक्ष्य पाँच वर्षों में 1,200 किमी की 250 से अधिक रोपवे परियोजनाएँ हैं, जो दिसंबर 2025 में निर्माणाधीन 11.01 किमी से कहीं अधिक है। उस समय 1.69 किमी की 2 और परियोजनाएँ, महाराष्ट्र में रामटेक गड मंदिर और जम्मू-कश्मीर में शंकराचार्य मंदिर, आवंटन के अंतिम चरण में थीं। असम में कामाख्या मंदिर और महाराष्ट्र में ब्रह्मगिरि–अंजनेरी के प्रस्ताव मंज़ूरी के लिए भेजे जा चुके थे। तवांग मठ–पीटी त्सो झील और काठगोदाम–हनुमान गढ़ी परियोजनाएँ व्यवहार्यता अध्ययन के चरण में थीं।

आँकड़ों में

11.01 किमी, 5 परियोजनाएँ निर्माणाधीन (दिसंबर 2025)। 25.45 किमी, DBFOT पर आवंटित 2 परियोजनाएँ (दिसंबर 2025)। ₹4,081.28 करोड़ सोनप्रयाग–केदारनाथ, 12.9 किमी (मार्च 2025)। ₹2,730.13 करोड़ गोविंदघाट–हेमकुंड साहिब जी, 12.4 किमी (मार्च 2025)। ₹645 करोड़ अनुमानित लागत, वाराणसी शहरी रोपवे (मार्च 2023)। 1,200 किमी पाँच वर्षों का कार्यक्रम लक्ष्य। स्रोत: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय और मंत्रिमंडल के निर्णय, PIB के माध्यम से।

आँकड़े इस तिथि तक: दिसंबर 2025 तक

स्रोत: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, PIB के माध्यम से — राष्ट्रीय रोपवे विकास कार्यक्रम (पर्वतमाला) की समयरेखा: फ़रवरी 2021 के उस बदलाव से, जिसके बाद रोपवे मंत्रालय की ज़िम्मेदारी बने, 30 दिसंबर 2025 की वर्षांत समीक्षा (लिंक) तक। शीर्ष आँकड़े का स्रोत यही समीक्षा है: हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) पर 11.01 किमी की 5 रोपवे परियोजनाएँ निर्माणाधीन हैं, और डिज़ाइन-निर्माण-वित्त-संचालन-हस्तांतरण (DBFOT) आधार पर 25.45 किमी की 2 परियोजनाएँ आवंटित हुई हैं। रोपवे किमी की कोई आधिकारिक वर्षवार शृंखला नहीं है, इसलिए चार्ट नहीं दिखाया गया है। · लिंक