भारतीय अवसंरचना लंबे समय तक समन्वय की कमी से धीमी रही — एक एजेंसी की सड़क महीनों बाद दूसरे की पाइपलाइन से खोदी जाती। अक्टूबर 2021 में शुरू हुई पीएम गति शक्ति एक राष्ट्रीय मास्टर प्लान है जो सड़क, रेल, बंदरगाह, हवाई अड्डे, दूरसंचार और बिजली को एकल GIS-आधारित डिजिटल मंच पर रखती है, ताकि मंत्रालय साथ योजना बनाएँ। इसके बाद 2022 में भारत की लगातार ऊँची लॉजिस्टिक्स लागत घटाने के लिए राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति आई।
पीएम गति शक्ति
वर्षों तक, भारत के अवसंरचना मंत्रालय अलग-अलग योजना बनाते थे — एक सड़क बिछाने के महीनों बाद खोदी जाती, एक पाइपलाइन जो रेल लाइन से चूक जाती। 2021 में शुरू हुई पीएम गति शक्ति एक राष्ट्रीय मास्टर प्लान है जो सड़क, रेल, बंदरगाह, हवाई अड्डे, दूरसंचार और उपयोगिताओं को एक साझा डिजिटल मानचित्र पर रखती है ताकि परियोजनाएँ साथ बनें। यह समयरेखा इसके रोलआउट और इसके आसपास के लॉजिस्टिक्स सुधारों को दर्शाती है।

यह क्यों मायने रखता है समन्वित अवसंरचना योजना बर्बादी और देरी घटाती है, और कम लॉजिस्टिक्स लागत भारतीय वस्तुओं को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाती है — लॉजिस्टिक्स लंबे समय से भारत के सबसे बड़े छिपे करों में से एक रहा है।
- राष्ट्रीय मास्टर प्लान (2021): 1,600+ डेटा परतें, 44+ मंत्रालय
- लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक: 54वाँ (2014) → 38वाँ (2023)
- स्रोत: DPIIT / वाणिज्य मंत्रालय
इतिहास
प्रमुख प्रगति
गति शक्ति पोर्टल अब 44+ मंत्रालयों में 1,600 से अधिक डेटा परतें और सभी राज्यों को एकीकृत करता है, जिससे योजनाकार परियोजना स्वीकृत करने से पहले भूभाग, मौजूदा संपत्ति और मंज़ूरियाँ एक मानचित्र पर देख सकते हैं। विश्व बैंक लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक पर भारत की रैंक 2014 के 54वें से 2023 में 38वें पर पहुँची, और लॉजिस्टिक्स व अवसंरचना प्रतिभा बनाने के लिए एक समर्पित गति शक्ति विश्वविद्यालय स्थापित हुआ।
यह कैसे काम करता है
PM गति शक्ति एक डिजिटल मास्टर प्लान है — एक एकल GIS मानचित्र जो हर मंत्रालय की अवसंरचना (सड़क, रेल, बंदरगाह, बिजली, टेलीकॉम, गैस) को एक मंच पर परत करता है। परियोजना योजना से पहले, एजेंसियाँ देख सकती हैं कि पहले से क्या मौजूद है और समन्वय कर सकती हैं, ताकि नया राजमार्ग, रेल लाइन व बिजली लाइन साथ बिछें, न कि एक दूसरे को खोदे। यह भारत को अलग-थलग निर्माण से एकीकृत योजना की ओर ले जाता है।
आगे की राह
असली परीक्षा योजना मानचित्र को माल की तेज़, सस्ती आवाजाही में बदलना है — हर राज्य व विभाग को मंच का वास्तव में उपयोग कराना, और भारत की लॉजिस्टिक्स लागत (लंबे समय से ~13-14% GDP पर अटकी) को वैश्विक 8-10% की ओर लाना। राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के साथ, लक्ष्य निर्बाध बहु-मॉडल माल-ढुलाई है जो निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाए।
आगे का रास्ता
असली परीक्षा योजना मानचित्र को माल की तेज़, सस्ती आवाजाही में बदलना है — हर राज्य व विभाग को मंच का उपयोग कराना और भारत की लॉजिस्टिक्स लागत (लंबे समय से लगभग 13-14% GDP) घटाना।
आँकड़ों में
2021 शुरुआत; 1,600+ डेटा परतें; 44+ मंत्रालय। राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति 2022। LPI रैंक 54वाँ (2014) → 38वाँ (2023)। स्रोत: DPIIT, वाणिज्य मंत्रालय, विश्व बैंक।
स्रोत: DPIIT / Ministry of Commerce — PM Gati Shakti & logistics milestones, 2021–2025.